पटना।बिहार की राजनीति में सरकारी बंगले को लेकर एक बार फिर सियासी घमासान शुरू हो गया है। इस बार विवाद के केंद्र में हैं लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे और पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव। उनके द्वारा खाली किए गए 26 एम स्टैंड रोड स्थित सरकारी बंगले को लेकर भाजपा कोटे के मंत्री लखेन्द्र पासवान ने गंभीर आरोप लगाए हैं।
लखेन्द्र पासवान को यह बंगला आवंटित हुआ है। सोमवार को जब वे पहली बार बंगला देखने पहुंचे, तो अंदर का नजारा देखकर हैरान रह गए।
“ना पंखा, ना कुर्सी, ना सोफा…”
मंत्री लखेन्द्र पासवान ने मीडिया से कहा,
“यह बंगला अब खंडहर जैसा हो चुका है। ना पंखा है, ना बिजली के तार, ना कुर्सी, ना टेबल और ना सोफा। यहां कुछ भी नहीं बचा है।”
उन्होंने बताया कि फिलहाल बंगले में मरम्मत का काम चल रहा है।
“जब काम पूरा हो जाएगा, तब एक-दो हफ्ते में मैं यहां शिफ्ट हो जाऊंगा।”
“हमें तो पूरा सुसज्जित बंगला मिला था”
लखेन्द्र पासवान ने सवाल उठाते हुए कहा कि जब उन्हें सरकारी आवास मिला था, तो वह पूरी तरह सुसज्जित था।
“अब मुझे नहीं पता कि तेज प्रताप यादव को यहां क्या-क्या मिला था, लेकिन इस बंगले में फिलहाल कुछ भी नहीं है।”
उन्होंने यह भी कहा कि आमतौर पर किसी मंत्री या विधायक को बंगला मिलने पर जनता से मिलने के लिए कुर्सी, टेबल और सोफा जैसी सुविधाएं विभाग द्वारा दी जाती हैं।
“तेज प्रताप ने भी शायद ऐसी मांग की होगी, लेकिन यहां कुछ भी नहीं बचा है। अब इस बारे में या तो तेज प्रताप बताएंगे या भवन निर्माण विभाग।”
चुनाव हारने के बाद छोड़ा बंगला
26 एम स्टैंड रोड का यह बंगला पहले तेज प्रताप यादव के पास था। इस बार विधानसभा चुनाव हारने के बाद उन्हें सरकारी आवास छोड़ना पड़ा। इसके बाद यह बंगला एससी-एसटी कल्याण मंत्री लखेन्द्र पासवान को आवंटित कर दिया गया।
बंगले को लेकर पहले भी होती रही राजनीति
बिहार में सरकारी बंगले और उसमें मौजूद फर्नीचर को लेकर पहले भी कई बार विवाद सामने आ चुके हैं। कई मामलों में आरोप लगे हैं कि बंगला खाली करते वक्त सरकारी सामान हटा लिया गया।
अब इस ताजा मामले में भी सवाल उठ रहे हैं कि
- क्या सच में बंगला खाली करते समय सारा सामान हटाया गया?
- या फिर विभाग की ओर से पहले से कोई सूची और रिकॉर्ड मौजूद नहीं था?
अब सबकी नजरें इस पर टिकी हैं कि
तेज प्रताप यादव और भवन निर्माण विभाग इस आरोप पर क्या सफाई देते हैं।


