गहरे पानी में डूबते दो युवक, महिला सिपाही ने वर्दी में ही गंगा में लगा दी छलांग

माघ पूर्णिमा पर पटना के पाटीपुल घाट पर बड़ा हादसा, दिनभर चला रेस्क्यू

पटना।माघ पूर्णिमा के मौके पर गंगा स्नान श्रद्धालुओं के लिए जीवनदायिनी माना जाता है, लेकिन रविवार सुबह पटना के दीघा थाना क्षेत्र स्थित पाटीपुल घाट पर यह स्नान दो परिवारों के लिए मातम बन गया। गयाजी के चाकंद थाना क्षेत्र के पाचू बिगहा गांव से आए दो युवक गहरे पानी में डूब गए।

घटना के बाद घाट पर अफरा-तफरी मच गई। लोगों की आंखों के सामने दोनों युवक कुछ ही पलों में गंगा की लहरों में समा गए।


वर्दी में ही कूद गई महिला सिपाही

घटना के तुरंत बाद वहां तैनात यातायात सिपाही तारा कुमारी ने साहस की मिसाल पेश की। बिना किसी सुरक्षा उपकरण या सहायता के इंतजार किए, वह वर्दी में ही गंगा में उतर गईं और डूब रहे युवकों को खोजने और बचाने का प्रयास किया।

इंटरनेट मीडिया पर इसका वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें तारा कुमारी जान की परवाह किए बिना गहरे पानी में उतरती नजर आ रही हैं। काफी देर तक वह नदी में तलाश करती रहीं, लेकिन तब तक दोनों युवक नजरों से ओझल हो चुके थे। पुलिस विभाग ने उनकी बहादुरी की सराहना की है।


गयाजी से पटना पहुंचे थे परिवार के साथ

डूबने वालों की पहचान
धनंजय कुमार (30 वर्ष) और
बाबू उर्फ रविंद्र कुमार (50 वर्ष)
के रूप में हुई है।

दोनों अपने परिवार के साथ गयाजी के चाकंद थाना क्षेत्र के पाचू बिगहा गांव से पटना जंक्शन पहुंचे थे। वहां से ऑटो लेकर वे पाटीपुल घाट आए थे। सुबह करीब 9 बजे दोनों स्नान के लिए गंगा में उतरे।


बैरिकेडिंग नहीं, किनारे ही गहराई

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार घाट पर किसी तरह की घेराबंदी नहीं थी और किनारे ही पानी काफी गहरा था। जैसे ही दोनों युवक स्नान के लिए आगे बढ़े, संतुलन बिगड़ गया और वे गहराई में चले गए। कुछ ही सेकेंड में वे डूबने लगे और फिर नजरों से ओझल हो गए।


दिनभर चला रेस्क्यू, नहीं मिला सुराग

घटना की सूचना मिलते ही दीघा थाना पुलिस, यातायात पुलिस और गाय घाट से एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची। स्थानीय गोताखोरों के साथ मिलकर दिनभर सर्च ऑपरेशन चलाया गया, लेकिन देर शाम तक दोनों का कोई पता नहीं चल सका।

दीघा थानाध्यक्ष ने बताया कि सोमवार को फिर से रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जाएगा।

घाट पर मौजूद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। धनंजय राजमिस्त्री थे और उनके परिवार में पत्नी और दो छोटी बेटियां हैं।


सवालों के घेरे में घाटों की सुरक्षा

इस हादसे के बाद घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था और चेतावनी संकेतों की कमी पर सवाल उठने लगे हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि अगर समय रहते बैरिकेडिंग और चेतावनी बोर्ड लगाए जाते, तो शायद यह दर्दनाक हादसा टल सकता था।

  • ये भी पढ़े..

    बिहार विधानसभा में सात विधेयकों पर चर्चा से लेकर TRE-4 भर्ती तक, मानसून सत्र के दूसरे दिन सदन में क्या-क्या हुआ?

    Share Add as a preferred…

    बिहार में जमीन की दाखिल-खारिज अब होगी महंगी, विधानसभा से विधेयक पास होने के बाद 200 रुपये शुल्क का प्रावधान

    Share Add as a preferred…