
भागलपुर। जिले के पीरपैंती रेफरल अस्पताल में सोमवार को डॉक्टरों की कमी के कारण स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होती नजर आईं। अस्पताल की ओपीडी में इलाज कराने पहुंचे मरीजों को लंबी कतारों में खड़े होकर अपनी बारी का घंटों इंतजार करना पड़ा। निर्धारित संख्या के मुकाबले कम चिकित्सकों की मौजूदगी के कारण मरीजों की भीड़ लगातार बढ़ती रही, जिससे इलाज की प्रक्रिया धीमी हो गई। इस स्थिति से मरीजों के साथ-साथ उनके परिजनों को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। कई लोगों ने अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से नियमित रूप से पर्याप्त संख्या में चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की है।
स्थानीय लोगों के अनुसार पीरपैंती रेफरल अस्पताल आसपास के कई गांवों और कस्बों के हजारों लोगों के लिए सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का प्रमुख केंद्र है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज सामान्य बीमारी से लेकर विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं के इलाज के लिए यहां पहुंचते हैं। ऐसे में यदि अस्पताल में निर्धारित संख्या में चिकित्सक मौजूद नहीं रहते हैं, तो इसका सीधा असर मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ता है।
सोमवार को भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला। अस्पताल की ओपीडी में चार चिकित्सकों की ड्यूटी निर्धारित थी, लेकिन मौके पर केवल दो डॉक्टर ही मौजूद थीं। मरीजों की संख्या अपेक्षा से अधिक होने के कारण दोनों चिकित्सकों पर काम का दबाव काफी बढ़ गया। परिणामस्वरूप मरीजों को अपनी बारी आने तक लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा। सुबह से ही अस्पताल परिसर में मरीजों और उनके परिजनों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी, जो दोपहर तक बनी रही।
अस्पताल में ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सक डॉ. अर्चना कुमारी और डॉ. स्वाती कुमारी यादव ने बताया कि सोमवार के लिए ओपीडी में कुल चार डॉक्टरों की ड्यूटी तय की गई थी, लेकिन केवल वे दोनों ही अस्पताल में मौजूद थीं। उन्होंने कहा कि मरीजों की संख्या काफी अधिक थी और सीमित संसाधनों के बीच सभी मरीजों का समय पर इलाज करना चुनौतीपूर्ण हो गया। दोनों चिकित्सकों ने लगातार मरीजों का इलाज किया, लेकिन भीड़ अधिक होने के कारण सभी को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना संभव नहीं हो पाया।
डॉक्टरों ने बताया कि सरकारी अस्पतालों में प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। यदि निर्धारित सभी चिकित्सक ड्यूटी पर मौजूद रहें तो मरीजों का इलाज अधिक व्यवस्थित और कम समय में किया जा सकता है। लेकिन डॉक्टरों की संख्या कम होने पर मरीजों की कतार लंबी हो जाती है और इलाज में देरी होना स्वाभाविक है।
अस्पताल पहुंचे कई मरीजों ने बताया कि उन्हें सुबह से ही पंजीकरण कराने के बाद अपनी बारी का इंतजार करना पड़ा। कुछ मरीज ऐसे भी थे जिन्हें कई घंटे तक लाइन में खड़े रहने के बाद डॉक्टर से परामर्श मिल सका। गर्म मौसम और भीड़भाड़ के बीच बुजुर्ग, महिलाएं और छोटे बच्चों के साथ आए परिजनों को सबसे अधिक कठिनाई का सामना करना पड़ा।
मरीजों के परिजनों ने भी अस्पताल की व्यवस्था पर चिंता जताई। उनका कहना था कि सरकारी अस्पताल में इलाज के लिए लोग इसलिए आते हैं क्योंकि यहां कम खर्च में बेहतर चिकित्सा सुविधा मिलने की उम्मीद रहती है। लेकिन यदि चिकित्सकों की संख्या पर्याप्त नहीं होगी तो मरीजों को अनावश्यक रूप से घंटों इंतजार करना पड़ेगा, जिससे उनकी परेशानी और बढ़ जाएगी।
स्थानीय लोगों ने कहा कि पीरपैंती रेफरल अस्पताल केवल नगर क्षेत्र ही नहीं बल्कि आसपास के ग्रामीण इलाकों के लिए भी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य केंद्र है। यहां प्रतिदिन दूर-दराज के गांवों से लोग इलाज कराने पहुंचते हैं। ऐसे में डॉक्टरों की अनुपस्थिति या कमी पूरे स्वास्थ्य तंत्र को प्रभावित करती है। लोगों का मानना है कि अस्पताल में चिकित्सकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
कुछ मरीजों ने यह भी कहा कि लंबा इंतजार करने के कारण कई लोगों को निजी क्लीनिकों का रुख करना पड़ता है, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है। उनका कहना है कि यदि सरकारी अस्पताल में समय पर इलाज मिल जाए तो गरीब और जरूरतमंद लोगों को काफी राहत मिल सकती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि रेफरल अस्पतालों की भूमिका प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और जिला अस्पताल के बीच महत्वपूर्ण कड़ी की होती है। यहां पर्याप्त संख्या में चिकित्सक, दवाएं और अन्य संसाधन उपलब्ध रहना आवश्यक है ताकि सामान्य और मध्यम स्तर की बीमारियों का उपचार स्थानीय स्तर पर ही हो सके। इससे बड़े अस्पतालों पर भी मरीजों का दबाव कम होता है।
अस्पताल में बढ़ती भीड़ और सीमित चिकित्सकीय संसाधनों को देखते हुए स्थानीय नागरिकों ने स्वास्थ्य विभाग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि अस्पताल में डॉक्टरों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के साथ-साथ आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त चिकित्सकों की भी प्रतिनियुक्ति की जानी चाहिए। इससे मरीजों को समय पर इलाज मिलेगा और अस्पताल की कार्यप्रणाली भी बेहतर होगी।
लोगों ने यह भी मांग की कि ड्यूटी चार्ट के अनुसार सभी चिकित्सकों की उपस्थिति की नियमित निगरानी की जाए। यदि किसी कारणवश कोई चिकित्सक अनुपस्थित रहता है तो उसके स्थान पर वैकल्पिक व्यवस्था तत्काल की जाए, ताकि मरीजों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
फिलहाल पीरपैंती रेफरल अस्पताल में डॉक्टरों की कमी के कारण उत्पन्न स्थिति स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। मरीजों और उनके परिजनों को उम्मीद है कि स्वास्थ्य विभाग इस मामले को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कदम उठाएगा। यदि अस्पताल में पर्याप्त संख्या में चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित होती है तो क्षेत्र के हजारों लोगों को बेहतर और समय पर स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल सकेगा, साथ ही मरीजों को घंटों लंबी कतारों में खड़े होकर इलाज का इंतजार भी नहीं करना पड़ेगा।


