भागलपुर के बलहा गांव में जलजमाव से बढ़ी मुश्किलें, महादलित टोला के 50 परिवार गंदगी और संक्रमण के खतरे के बीच रहने को मजबूर

भागलपुर। जिले के नारायणपुर प्रखंड स्थित बलहा गांव का महादलित टोला इन दिनों जलजमाव और गंदगी की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। लगातार बारिश के बाद वार्ड संख्या-3 की गलियों और सड़कों पर पानी जमा होने से करीब 50 परिवारों का जनजीवन प्रभावित हो गया है। हालात ऐसे हैं कि लोगों का घरों से निकलना तक मुश्किल हो गया है। सड़क पर जमा गंदा पानी और उससे उठ रही दुर्गंध के कारण पूरे इलाके में संक्रमण फैलने की आशंका बढ़ गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह समस्या हर वर्ष बरसात के मौसम में सामने आती है, लेकिन अब तक इसका स्थायी समाधान नहीं किया गया है।

ग्रामीणों के अनुसार महादलित टोला में रहने वाले सभी परिवार लंबे समय से जल निकासी की समस्या का सामना कर रहे हैं। बारिश होते ही बस्ती की मुख्य सड़क तालाब जैसी दिखाई देने लगती है। कई स्थानों पर घुटनों तक पानी भर जाता है, जिससे लोगों को दैनिक कार्यों के लिए भी काफी परेशानी उठानी पड़ती है। बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को सबसे अधिक कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि सड़क पर जमा पानी कई दिनों तक नहीं निकलता। इसके कारण पानी सड़ने लगता है और पूरे मोहल्ले में तेज दुर्गंध फैल जाती है। हालात इतने खराब हो जाते हैं कि घरों के भीतर भी बदबू पहुंचने लगती है। लोगों का कहना है कि ऐसे वातावरण में रहना स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है।

ग्रामीणों ने बताया कि जलजमाव के कारण बच्चों के बीमार पड़ने की घटनाएं भी बढ़ रही हैं। गंदे पानी और मच्छरों के प्रकोप से डायरिया, बुखार, त्वचा संबंधी संक्रमण और अन्य मौसमी बीमारियों का खतरा लगातार बना हुआ है। अभिभावकों का कहना है कि छोटे बच्चों को घर से बाहर निकलने देना भी मुश्किल हो गया है, क्योंकि गंदे पानी में गिरने या संक्रमण होने की आशंका बनी रहती है।

महादलित टोला निवासी गौतम मलिक ने बताया कि यह समस्या कोई नई नहीं है। हर वर्ष मानसून के दौरान पूरा इलाका जलमग्न हो जाता है और लोगों को महीनों तक इसी स्थिति में रहने के लिए मजबूर होना पड़ता है। उन्होंने कहा कि गंदगी और जलजमाव के कारण बच्चों का स्वास्थ्य सबसे अधिक प्रभावित होता है। कई बार बीमारी फैलने की आशंका इतनी बढ़ जाती है कि लोगों में डर का माहौल बन जाता है।

गौतम मलिक ने बताया कि इलाके में जल निकासी की कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं है। यदि कहीं पानी निकालने का रास्ता मौजूद भी है तो वह निजी भूमि से होकर गुजरता है, जिसके कारण नियमित निकासी संभव नहीं हो पाती। परिणामस्वरूप बारिश का पानी मोहल्ले में ही जमा रह जाता है और धीरे-धीरे स्थिति और गंभीर हो जाती है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से इस समस्या के समाधान की मांग की जा रही है। उन्होंने कई बार जनप्रतिनिधियों, पंचायत स्तर के अधिकारियों और जिला प्रशासन को इसकी जानकारी दी, लेकिन अब तक कोई स्थायी पहल नहीं हो सकी। ग्रामीणों का आरोप है कि हर वर्ष आश्वासन तो मिलता है, लेकिन बारिश शुरू होते ही वही पुरानी समस्या फिर सामने आ जाती है।

ग्रामीणों ने बताया कि जलजमाव के कारण आवागमन भी प्रभावित हो गया है। स्कूल जाने वाले बच्चों, काम पर जाने वाले मजदूरों और बुजुर्गों को रोजाना गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ता है। कई जगह सड़क पूरी तरह पानी में डूब जाने के कारण लोगों को वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ता है, जिससे दूरी और समय दोनों बढ़ जाते हैं।

महिलाओं ने भी इस समस्या को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि घरों के आसपास लगातार पानी जमा रहने से घरेलू कामकाज प्रभावित होता है। पीने के पानी, साफ-सफाई और बच्चों की देखभाल जैसी सामान्य गतिविधियां भी कठिन हो जाती हैं। बरसात के दिनों में पूरे मोहल्ले में नमी और गंदगी बनी रहने से जीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं की गई तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। लगातार बारिश होने पर पानी का स्तर और बढ़ सकता है, जिससे घरों में पानी घुसने की आशंका भी बनी हुई है। ऐसे हालात में लोगों को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का भी सामना करना पड़ सकता है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि महादलित टोला में स्थायी जल निकासी योजना तैयार की जाए। साथ ही नालियों का निर्माण, सड़क की ऊंचाई बढ़ाने और नियमित सफाई की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि बरसात के दौरान लोगों को इस तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। उनका कहना है कि यदि समय पर आवश्यक कदम उठाए जाएं तो वर्षों पुरानी इस समस्या का समाधान संभव है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का भी मानना है कि लंबे समय तक जलजमाव रहने से मच्छरों का प्रजनन तेजी से होता है, जिससे डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा गंदे पानी के संपर्क में आने से त्वचा रोग और पेट संबंधी संक्रमण की आशंका भी बढ़ जाती है। ऐसे में नियमित सफाई, जल निकासी और स्वच्छता बनाए रखना बेहद जरूरी है।

फिलहाल बलहा गांव के महादलित टोला के लोग प्रशासन से शीघ्र हस्तक्षेप की उम्मीद लगाए हुए हैं। उनका कहना है कि बरसात का मौसम अभी जारी है और यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो हालात और बिगड़ सकते हैं। ग्रामीण चाहते हैं कि जिला प्रशासन मौके का निरीक्षण कर स्थायी जल निकासी की व्यवस्था कराए, ताकि करीब 50 परिवारों को हर वर्ष होने वाली इस गंभीर समस्या से स्थायी राहत मिल सके।

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