
भागलपुर। बिहार के प्रशासनिक इतिहास में जब भी कर्तव्यनिष्ठा और अदम्य साहस की चर्चा होगी, सुल्तानगंज के कार्यपालक पदाधिकारी कृष्ण भूषण कुमार का नाम सुनहरे अक्षरों में लिया जाएगा। बुधवार, 29 अप्रैल 2026 की दोपहर भागलपुर का समीक्षा भवन एक ऐसी भावुक और गरिमामय शोक सभा का साक्षी बना, जहाँ आंसुओं से ज्यादा गर्व का भाव प्रशासनिक गलियारों में तैर रहा था। अपराह्न 2.35 बजे जिलाधिकारी डॉक्टर नवल किशोर चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित इस विशेष शोक सभा में जिला प्रशासन के तमाम वरीय अधिकारियों और कर्मचारियों ने अपने उस साथी को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिसने अपराधियों की गोलियों के सामने पीठ दिखाने के बजाय निहत्थे होकर काल से टकराना स्वीकार किया। 2 मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई, लेकिन उस सन्नाटे में भी कृष्ण भूषण के साहसिक कार्यों की गूँज स्पष्ट सुनाई दे रही थी। इस दौरान पूरा समाहरणालय परिसर गमगीन रहा और हर चेहरे पर अपने एक काबिल सहयोगी को खोने का दुख साफ झलक रहा था।
समीक्षा भवन में उमड़ा प्रशासनिक महकमा: भावभीनी श्रद्धांजलि
शोक सभा में जिले के लगभग सभी महत्वपूर्ण विभागों के प्रमुखों की उपस्थिति यह बता रही थी कि कृष्ण भूषण कुमार ने अपने छोटे से कार्यकाल में प्रशासनिक बिरादरी के भीतर कितनी गहरी पैठ बना ली थी। नगर आयुक्त किशलय कुशवाहा, अपर समाहर्ता दिनेश राम, अपर समाहर्ता आपदा प्रबंधन कुंदन कुमार, अपर समाहर्ता विधि व्यवस्था राकेश रंजन, जिला परिवहन पदाधिकारी जनार्दन सिंह और उप निर्वाचन पदाधिकारी श्वेता कुमारी सहित समाहरणालय के तमाम कर्मचारी इस सभा का हिस्सा बने।
शोक सभा की शुरुआत में जिलाधिकारी ने कृष्ण भूषण कुमार के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। इसके बाद उपस्थित सभी अधिकारियों ने बारी-बारी से श्रद्धांजलि दी। समाहरणालय के कर्मचारियों ने बताया कि कृष्ण भूषण केवल एक अधिकारी नहीं थे, बल्कि वे एक ऐसे ऊर्जावान व्यक्तित्व के स्वामी थे जो कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी मुस्कुराते हुए समाधान निकालते थे। समीक्षा भवन की दीवारों ने पहले भी कई शोक सभाएं देखी होंगी, लेकिन एक अधिकारी की वीरता पर गर्व करने वाली ऐसी सभा शायद ही पहले कभी आयोजित हुई हो।
डीएम नवल किशोर चौधरी की ललकार: “कृष्ण भूषण ने अपराधियों का मनोबल तोड़ा”
शोक सभा के उपरांत संवाददाताओं को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी डॉक्टर नवल किशोर चौधरी के शब्दों में संवेदना और संकल्प दोनों का संगम दिखा। उन्होंने 28 अप्रैल 2026 की उस काली शाम का जिक्र करते हुए कहा कि सुल्तानगंज नगर परिषद कार्यालय में जो घटित हुआ, वह अत्यंत पीड़ादायक है, लेकिन उस घटना के बीच कृष्ण भूषण कुमार ने जो वीरता दिखाई, वह अद्भुत और अविश्वसनीय है। जिलाधिकारी ने रेखांकित किया कि जब तीन हथियारबंद अपराधी चैंबर में घुसे और सभापति पर हमला किया, तो वैसी विपरीत परिस्थिति में कोई भी सामान्य व्यक्ति अपनी जान बचाने की सोचता, लेकिन कृष्ण भूषण ने अदम्य साहस का परिचय दिया।
जिलाधिकारी ने बताया कि कृष्ण भूषण निहत्थे थे, फिर भी उन्होंने अपराधियों को पकड़ने के लिए उनसे सीधा मुकाबला किया। उन्होंने उन हमलावरों को दबोचने का सराहनीय प्रयास किया, जो यह साबित करता है कि उनके भीतर राज्य की सेवा का जज्बा किसी सैनिक से कम नहीं था। नवल किशोर चौधरी ने दृढ़ता के साथ कहा कि कृष्ण भूषण का यह साहसिक कार्य अन्य पदाधिकारियों, कर्मचारियों और आम नागरिकों के लिए न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि अनुकरणीय भी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसे साहसी प्रयास ही अपराधियों के मनोबल को जड़ से उखाड़ने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्रशासन अब कृष्ण भूषण की इस वीरता को एक मानक के रूप में देख रहा है, जो यह संदेश देता है कि व्यवस्था के रक्षक अब अपराधियों के सामने झुकने वाले नहीं हैं।
शांत और कर्तव्यनिष्ठ छवि: राज्य स्तर पर सम्मानित था ‘मधुबनी का लाल’
कृष्ण भूषण कुमार की पहचान एक शांत और सरल स्वभाव के अधिकारी की थी। जिलाधिकारी ने उनके व्यक्तित्व के उन पहलुओं पर भी प्रकाश डाला जो अक्सर फाइलों के पीछे छिपे रहते थे। उन्होंने बताया कि कृष्ण भूषण विकास कार्यों के प्रति गहरी रुचि रखते थे। वे उन अधिकारियों में से थे जो ऑफिस के काम को केवल ड्यूटी नहीं बल्कि एक मिशन मानते थे। सुल्तानगंज नगर परिषद में उनके द्वारा किए गए उत्कृष्ट कार्यों, विशेषकर वित्तीय पारदर्शिता और स्वच्छता के क्षेत्र में उनके योगदान के कारण उन्हें राज्य स्तर पर कई बार सम्मानित भी किया गया था।
हाल ही में दिल्ली में उनके नेतृत्व में सुल्तानगंज को जो राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था, वह उनकी कड़ी मेहनत का ही परिणाम था। मधुबनी जिले से निकलकर आईआईटी जैसे संस्थानों से शिक्षा प्राप्त करने वाले इस अधिकारी ने बिहार प्रशासनिक सेवा में अपनी एक अलग पहचान बनाई थी। शोक सभा में मौजूद कई अधिकारियों ने याद किया कि वे कभी भी किसी विवाद में नहीं पड़ते थे, लेकिन जब बात नियमों की आती थी, तो वे अडिग रहते थे। उनकी यही कर्तव्यनिष्ठा शायद उन अपराधियों को नागवार गुजरी जिन्होंने व्यवस्था को चुनौती देने का दुस्साहस किया।
प्रशासनिक संकल्प: शहादत को व्यर्थ नहीं जाने देंगे
इस शोक सभा के माध्यम से भागलपुर जिला प्रशासन ने एक स्वर में यह संदेश दिया है कि कृष्ण भूषण कुमार की शहादत को व्यर्थ नहीं जाने दिया जाएगा। जिलाधिकारी ने ईश्वर से प्रार्थना की कि वे दिवंगत आत्मा को चिर शांति प्रदान करें और उनके शोक संतप्त परिजनों, विशेषकर उनकी पत्नी शालू कुमारी और छोटे बच्चों को इस असहनीय पीड़ा को सहने की असीम शक्ति दें। सभा में मौजूद अपर समाहर्ता विधि व्यवस्था राकेश रंजन ने भी कहा कि पुलिस और प्रशासन की ओर से की गई त्वरित कार्रवाई और मुख्य आरोपी का खात्मा यह दर्शाता है कि कृष्ण भूषण की शहादत का सम्मान राज्य सरकार के सर्वोच्च स्तर पर है।
प्रशासन ने यह भी निर्णय लिया है कि कृष्ण भूषण कुमार की वीरता की इस गाथा को जिला स्तर पर दस्तावेजों में संरक्षित किया जाएगा ताकि भविष्य के अधिकारियों को उनके साहस से प्रेरणा मिल सके। कर्मचारियों के बीच इस बात की चर्चा आम थी कि कृष्ण भूषण ने अपनी जान देकर सभापति और अन्य सहयोगियों की रक्षा की, जो किसी भी लोक सेवक के लिए सर्वोच्च बलिदान है।
भयमुक्त वातावरण का वादा: अपराधियों को कड़ा संदेश
शोक सभा का समापन एक सामूहिक संकल्प के साथ हुआ। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि कृष्ण भूषण कुमार ने जिस तरह अपराधियों का मुकाबला किया, उसने पूरे प्रशासनिक अमले के भीतर एक नया आत्मविश्वास भर दिया है। अब कोई भी अधिकारी किसी टेंडर माफिया या अपराधी के दबाव में नहीं झुकेगा। समाहरणालय के कर्मचारियों ने भी एक सुर में कहा कि वे कृष्ण भूषण के दिखाए रास्ते पर चलते हुए पूरी ईमानदारी से अपना काम करेंगे।
भागलपुर का समीक्षा भवन आज केवल एक बैठक स्थल नहीं था, वह एक मंदिर की तरह पवित्र लग रहा था जहाँ एक शहीद की वीरता की आरती उतारी जा रही थी। कृष्ण भूषण कुमार अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके अदम्य साहस की गूँज भागलपुर की हवाओं में हमेशा बनी रहेगी। मुख्यमंत्री द्वारा घोषित राजकीय सम्मान और मुआवजे के बाद भागलपुर जिला प्रशासन ने इस शोक सभा के माध्यम से अपने स्तर पर उस महान आत्मा को श्रद्धांजलि दी है। पूरा जिला प्रशासन इस दुख की घड़ी में परिवार के साथ खड़ा है और यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि कृष्ण भूषण का परिवार खुद को अकेला न समझे।
वॉयस ऑफ बिहार (VOB) न्यूज़ डेस्क की विशेष प्रशासनिक रिपोर्ट।


