जांबाज ईओ कृष्ण भूषण कुमार को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई: आंसुओं में डूबा मधुबनी, पत्नी शालू कुमारी को मिला 25 लाख का चेक

मधुबनी/भागलपुर। बिहार की प्रशासनिक व्यवस्था के एक जांबाज सिपाही और सुल्तानगंज नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी (ईओ) कृष्ण भूषण कुमार बुधवार, 29 अप्रैल 2026 को पंचतत्व में विलीन हो गए। मधुबनी जिले के पैतृक आवास पर जब इस वीर अधिकारी का पार्थिव शरीर पहुँचा, तो समूचा इलाका ‘कृष्ण भूषण अमर रहे’ के नारों से गूँज उठा। कर्तव्य की वेदी पर अपने प्राणों की आहुति देने वाले इस युवा अधिकारी को बिहार सरकार के निर्देश पर पूरे राजकीय सम्मान (State Honors) के साथ अंतिम विदाई दी गई। यह केवल एक अंतिम संस्कार नहीं था, बल्कि एक ईमानदार और साहसी लोक सेवक के उस जज्बे को सलाम था, जिसने अपराधियों की बंदूकों के सामने घुटने टेकने के बजाय निहत्थे लड़ना बेहतर समझा। इस शोकपूर्ण घड़ी में जिला प्रशासन के तमाम वरीय अधिकारी, जनप्रतिनिधि और हजारों की संख्या में आम नागरिक मौजूद रहे, जिनकी आंखें अपने इस होनहार लाल के असमय चले जाने से नम थीं।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर राजकीय सम्मान और आर्थिक सहायता

​मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सुल्तानगंज की इस हृदयविदारक घटना को बिहार के प्रशासनिक इतिहास की एक अत्यंत दुखद क्षति बताया है। मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति (संख्या-cm-288) के माध्यम से यह स्पष्ट किया गया कि कृष्ण भूषण कुमार ने कर्तव्य निर्वहन के दौरान जिस अदम्य साहस और वीरता का परिचय दिया, वह अतुलनीय है। उनके इस सर्वोच्च बलिदान को देखते हुए राज्य सरकार ने उनके आश्रितों को 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की।

​इसी निर्देश के आलोक में, बुधवार को अंतिम विदाई के समय जिलाधिकारी आनंद शर्मा ने दिवंगत अधिकारी की पत्नी शालू कुमारी से मुलाकात की और उन्हें ढांढस बंधाते हुए 25 लाख रुपये का चेक प्रदान किया। सरकार का यह कदम उस परिवार के प्रति एक छोटी सी संवेदना है, जिसने अपना सबसे मजबूत स्तंभ खो दिया है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कृष्ण भूषण कुमार की शहादत बेकार नहीं जाएगी और उनका नाम बिहार के प्रशासनिक इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज रहेगा।

मधुबनी में उमड़ा जनसैलाब: गार्ड ऑफ ऑनर के साथ विदाई

​जैसे ही कृष्ण भूषण कुमार का पार्थिव शरीर उनके पैतृक आवास पहुँचा, वहां कोहराम मच गया। मधुबनी के जिलाधिकारी आनंद शर्मा और पुलिस अधीक्षक योगेंद्र कुमार स्वयं मौके पर मौजूद रहे। दोनों अधिकारियों ने दिवंगत के पार्थिव शरीर पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

​प्रशासन ने राजकीय सम्मान के प्रोटोकॉल के तहत पुलिस बल को तैनात किया था। बिहार पुलिस के जवानों ने हवा में गोलियां दागकर और शस्त्र झुकाकर अपने साथी और वरिष्ठ अधिकारी को ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ दिया। तिरंगे में लिपटे कृष्ण भूषण कुमार के पार्थिव शरीर को देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति का गला रुंध गया। जिलाधिकारी ने कहा कि स्वर्गीय कृष्ण भूषण कुमार एक कर्तव्यनिष्ठ और समर्पित अधिकारी थे, जिन्होंने अंतिम क्षण तक अपनी निष्ठा और ईमानदारी का परिचय दिया। उनके योगदान को न केवल सुल्तानगंज की जनता, बल्कि पूरा विभाग सदैव याद रखेगा।

अधिकारियों का जमावड़ा: विभाग ने खोया अपना सितारा

​इस दुखद अवसर पर केवल जिला स्तरीय अधिकारी ही नहीं, बल्कि पटना स्थित मुख्यालय से भी वरीय अधिकारी पहुँचे। नगर विकास एवं आवास विभाग के विशेष सचिव मनन राम और उप सचिव रंजन कुमार ने भी परिजनों से मिलकर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं। विभाग के अधिकारियों का कहना था कि कृष्ण भूषण कुमार जैसे मेधावी अधिकारी का जाना पूरे नगर सेवा संवर्ग के लिए एक अपूरणीय क्षति है।

​अंतिम यात्रा में नगर आयुक्त उमेश भारती, डीपीआरओ परिमल कुमार, एसडीओ चंदन झा, एसडीपीओ अमित कुमार सहित कई जिला स्तरीय पदाधिकारी और पुलिस अधिकारी शामिल हुए। इन सभी ने कृष्ण भूषण कुमार के साथ बिताए गए समय और उनकी कार्यशैली को याद किया। अधिकारियों ने स्वीकार किया कि टेंडर माफियाओं और अपराधियों के खिलाफ कृष्ण भूषण ने जिस तरह की पारदर्शिता और सख्ती अपनाई थी, वह आने वाले अधिकारियों के लिए एक मिसाल होगी।

शालू कुमारी का धैर्य और प्रशासन का भरोसा

​कृष्ण भूषण कुमार की पत्नी शालू कुमारी, जो स्वयं उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक पद पर कार्यरत हैं, इस संकट की घड़ी में गहरे सदमे में थीं। जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने उनके पास बैठकर उन्हें सांत्वना दी। पुलिस अधीक्षक योगेंद्र कुमार ने उन्हें भरोसा दिलाया कि कानून की नजर में अपराधी चाहे कितना भी रसूखदार क्यों न हो, उसे उसके किए की सजा मिलकर रहेगी।

​जिलाधिकारी ने आश्वस्त किया कि इस कठिन घड़ी में पूरा जिला प्रशासन शोक संतप्त परिवार के साथ मजबूती से खड़ा है। सहायता राशि का चेक प्रदान करना केवल एक आर्थिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि सरकार की ओर से यह एक वचन है कि शहीद के परिवार की देखभाल और उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी अब शासन की है। ग्रामीणों ने भी अधिकारियों से मांग की कि जिस वीरता का परिचय कृष्ण भूषण ने दिया है, उसके सम्मान में इलाके के किसी प्रमुख स्थल या संस्थान का नाम उनके नाम पर रखा जाए।

मेधा और वीरता का संगम: एक शानदार करियर का दुखद अंत

​कृष्ण भूषण कुमार बीपीएससी के 59वें बैच के अधिकारी थे। उन्होंने आईआईटी (IIT) और बीआईटी सिंदरी जैसे संस्थानों से शिक्षा ग्रहण की थी। सुल्तानगंज नगर परिषद में अपनी पोस्टिंग के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण सुधार किए थे। हाल ही में उनके नेतृत्व में सुल्तानगंज को राष्ट्रीय स्तर पर ‘बेस्ट अकाउंट्स प्रैक्टिस अवॉर्ड’ मिला था। यह उनकी प्रशासनिक कुशलता का ही परिणाम था कि सुल्तानगंज जैसे छोटे शहर ने दिल्ली के मंच पर अपनी चमक बिखेरी थी।

​सहकर्मियों ने बताया कि वे कभी भी दबाव में काम करना पसंद नहीं करते थे। मंगलवार को जब अपराधी रामधनी यादव हथियार लेकर चैंबर में घुसा, तो कृष्ण भूषण निहत्थे थे। बावजूद इसके, उन्होंने भागने के बजाय अपराधी को पकड़ने की कोशिश की। यही वह क्षण था जिसने उन्हें एक साधारण अधिकारी से ‘शहीद’ बना दिया। उनकी बहादुरी ने सभापति की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई, हालांकि इस क्रम में उन्होंने स्वयं का बलिदान दे दिया।

मधुबनी के लाल को शत-शत नमन

​अंतिम संस्कार की प्रक्रिया के दौरान गंगा तट पर हजारों लोगों की मौजूदगी यह बता रही थी कि कृष्ण भूषण कुमार ने अपने छोटे से कार्यकाल में कितने लोगों का दिल जीता था। उनके चचेरे भाई अजय कुमार ने मुखाग्नि दी। जैसे ही चिता की लपटें आसमान की ओर उठीं, वहां मौजूद हर शख्स की आंखें भीग गईं। प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया कि अंतिम विदाई की हर प्रक्रिया पूरी गरिमा और सम्मान के साथ संपन्न हो।

​वॉयस ऑफ बिहार (VOB) न्यूज़ डेस्क इस जांबाज अधिकारी की शहादत को नमन करता है। कृष्ण भूषण कुमार जैसे अधिकारी ही व्यवस्था की रीढ़ होते हैं, जो अपनी जान की परवाह किए बिना समाज के दुश्मनों से लोहा लेते हैं। मधुबनी की मिट्टी ने आज अपने एक ऐसे लाल को खोया है, जिसकी चमक बिहार की प्रशासनिक सेवा में सदा बरकरार रहेगी।

वॉयस ऑफ बिहार (VOB) न्यूज़ डेस्क की विशेष ग्राउंड रिपोर्ट।

​ओम शांति! 🙏

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