
पटना। बिहार की धरती अब केवल मेधा पैदा करने के लिए ही नहीं, बल्कि उस मेधा को संवारने और उसे वैश्विक मंच के लिए तैयार करने का भी केंद्र बन चुकी है। बुधवार, 29 अप्रैल 2026 को राजधानी पटना के संवाद कक्ष में आयोजित एक उच्चस्तरीय प्रेस वार्ता के दौरान उपमुख्यमंत्री सह विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी ने राज्य की बदलती शैक्षणिक तस्वीर का खाका पेश किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह दौर बीत गया जब बिहार के युवाओं को एक अदद तकनीकी डिग्री के लिए दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ता था। आज बिहार के सभी 38 जिलों में इंजीनियरिंग कॉलेज और 46 पॉलिटेक्निक संस्थान न केवल संचालित हैं, बल्कि वे गुणवत्ता के मामले में देश के शीर्ष संस्थानों को टक्कर दे रहे हैं। उपमुख्यमंत्री ने इस दौरान एक बड़ा राजनैतिक और प्रशासनिक संदेश भी दिया कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की उन दूरदर्शी नीतियों और संकल्पों को आगे बढ़ाने का बीड़ा उठाया है, जिनका आधार ‘सात निश्चय’ जैसी क्रांतिकारी योजनाएं थीं।
पलायन की मजबूरी से ‘घर बैठे शिक्षा’ तक का सफर
उपमुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में बिहार के उस पुराने घाव का जिक्र किया, जहाँ हजारों छात्र और करोड़ों रुपये का राजस्व हर साल उच्च शिक्षा के नाम पर राज्य से बाहर चला जाता था। उन्होंने कहा कि पहले संसाधनों का अभाव था, जिसके कारण बिहार का पैसा और प्रतिभा दोनों बाहर जाते थे, लेकिन अब यह सिलसिला पूरी तरह थम चुका है।
”नीतीश कुमार के नेतृत्व में जो नीतियां बनाई गई थीं, उनके नतीजे अब धरातल पर नजर आ रहे हैं। बिहार के छात्र-छात्राएं अब अपने ही घर में, अपने माता-पिता के सामने उच्चस्तरीय तकनीकी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। इससे न केवल छात्रों का आत्मविश्वास बढ़ा है, बल्कि उनके अभिभावकों को भी आर्थिक और मानसिक सुकून मिला है। पलायन में आई यह भारी कमी बिहार के आत्मनिर्भर होने का सबसे बड़ा प्रमाण है।”
नीतीश की नीतियों को नई रफ्तार दे रहे सम्राट चौधरी
प्रेस वार्ता के दौरान उपमुख्यमंत्री ने सत्ता परिवर्तन के बाद की निरंतरता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि राज्य में शीघ्र ही मंत्रिपरिषद का विस्तार होने जा रहा है, लेकिन विकास की रफ्तार में कोई कमी नहीं आएगी। वर्तमान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने नीतीश कुमार के विजन को ही अपनी प्राथमिकता बनाया है। राज्य के हर कोने में तकनीकी शिक्षा का जाल बिछाना और युवाओं को रोजगार के काबिल बनाना इस सरकार का मुख्य एजेंडा है। विजय कुमार चौधरी ने विश्वास जताया कि आने वाले समय में बिहार न केवल भारत का, बल्कि दक्षिण एशिया का एक महत्वपूर्ण तकनीकी शिक्षा हब (Hub) बनकर उभरेगा।
विज्ञान और तकनीक: सुबह से रात तक की जीवनरेखा
उपमुख्यमंत्री ने बहुत ही सरल शब्दों में विज्ञान और तकनीक के महत्व को जन-जन से जोड़ा। उन्होंने कहा कि आज के दौर में विज्ञान के बिना सामान्य जीवन की कल्पना भी असंभव है। सुबह जागने से लेकर रात को सोने तक हमारी हर गतिविधि—चाहे वह संचार हो, परिवहन हो या स्वास्थ्य—पूरी तरह तकनीक पर टिकी है।
- सरल जीवन: तकनीक ने कार्यों को आसान, गतिशील और पारदर्शी बनाया है।
- समावेशी प्रभाव: यह विभाग केवल डिग्री नहीं बांट रहा, बल्कि लोगों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने की तकनीक विकसित कर रहा है।
- भविष्य की आधारशिला: आने वाली पीढ़ी को तकनीकी रूप से सक्षम बनाना ही इस विभाग का प्राथमिक उद्देश्य है।
महिला सशक्तिकरण: 33% आरक्षण से आई क्रांतिकारी तब्दीली
बिहार सरकार की एक और बड़ी उपलब्धि का जिक्र करते हुए उपमुख्यमंत्री ने बताया कि तकनीकी संस्थानों में महिलाओं और बच्चियों को दिया जा रहा 33 फीसदी आरक्षण समाज में एक मूक क्रांति का आधार बन रहा है।
- अग्रणी राज्य: इस नीति के कारण बिहार आज महिला सशक्तिकरण की दिशा में देश के अग्रणी राज्यों में खड़ा है।
- बदलता नजरिया: इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक जैसे क्षेत्रों में बेटियों की बढ़ती भागीदारी यह साबित करती है कि वे अब चुनौतीपूर्ण करियर के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
- सामाजिक प्रभाव: जब एक बेटी तकनीकी रूप से शिक्षित होती है, तो वह पूरे परिवार की आर्थिक स्थिति और सोच को बदल देती है।
₹10 में बीटेक: आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए वरदान
इस प्रेस वार्ता का सबसे चौंकाने वाला और सुखद पहलू विभागीय सचिव लोकेश कुमार सिंह द्वारा प्रस्तुत आंकड़े रहे। उन्होंने बताया कि बिहार सरकार ने तकनीकी शिक्षा को इतना सुलभ बना दिया है कि पैसे की कमी अब किसी की पढ़ाई में बाधा नहीं बनेगी।
संस्थान का प्रकार | पाठ्यक्रम | नामांकन शुल्क (फीस) |
|---|---|---|
राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालय | बीटेक (B.Tech) | मात्र ₹10 |
राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थान | डिप्लोमा | मात्र ₹5 |
सचिव ने बताया कि शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए इंजीनियरिंग कॉलेजों में 14,553 सीटें और पॉलिटेक्निक संस्थानों में 17,243 सीटें स्वीकृत हैं। इतनी मामूली फीस के कारण अब गरीब से गरीब छात्र भी बिना किसी कर्ज या आर्थिक बोझ के इंजीनियर बनने का अपना सपना पूरा कर सकता है।
रोजगार का मोर्चा: 15 हजार से अधिक युवाओं को मिली नौकरी
केवल डिग्री देना ही सरकार का लक्ष्य नहीं है, बल्कि उस डिग्री को रोजगार में बदलना भी प्राथमिकता है। सचिव लोकेश कुमार सिंह ने बताया कि राज्य स्तर पर ‘नियोजन कमिटी’ और संस्थान स्तर पर ‘नियोजन सेल’ (Placement Cell) लगातार सक्रिय हैं।
- सत्र 2025-26 की उपलब्धि: अब तक करीब 15,246 बच्चों को विभिन्न प्रतिष्ठित निजी कंपनियों में रोजगार मिल चुका है।
- सेटर ऑफ एक्सीलेंस: कॉलेजों में इन्फ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड कर ‘सेटर ऑफ एक्सीलेंस’ बनाया गया है, जहाँ छात्रों को नई तकनीक (जैसे AI, रोबोटिक्स और डेटा साइंस) की ट्रेनिंग दी जा रही है।
- इंडस्ट्री की मांग: पढ़ाई की गुणवत्ता बढ़ने के कारण अब बड़ी कंपनियां स्वयं बिहार के सरकारी कॉलेजों में कैंपस सिलेक्शन के लिए पहुँच रही हैं।
विशेषज्ञों और वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी
प्रेस वार्ता में शिक्षा और तकनीक के क्षेत्र के कई दिग्गज शामिल थे, जिन्होंने विभाग की भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डाला। इसमें विभाग के निदेशक अहमद महमूद, राज्य प्रावैधिक शिक्षा पर्षद के सचिव चंद्रशेखर सिंह और बिहार अभियंत्रण विश्वविद्यालय के कुलपति सुरेश कान्त वर्मा प्रमुख थे। इन अधिकारियों ने संयुक्त रूप से यह संदेश दिया कि बिहार अभियंत्रण विश्वविद्यालय अब वैश्विक मानकों के अनुरूप पाठ्यक्रम तैयार कर रहा है, ताकि यहाँ के छात्र किसी भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर पिछड़ें नहीं।
विजय कुमार चौधरी ने अंत में यह दोहराया कि ‘सात निश्चय’ के तहत जो बीज बोया गया था, वह अब एक विशाल वटवृक्ष बन चुका है, जिसकी छाया में बिहार के लाखों छात्र अपना उज्ज्वल भविष्य गढ़ रहे हैं। राज्य में इंजीनियरिंग कॉलेजों की संख्या बढ़ने से न केवल शैक्षणिक माहौल सुधरा है, बल्कि स्थानीय स्तर पर अर्थव्यवस्था को भी गति मिली है। बिहार का युवा अब ‘जॉब सीकर’ (नौकरी मांगने वाला) नहीं, बल्कि ‘जॉब क्रिएटर’ (नौकरी देने वाला) बनने की दिशा में अग्रसर है।


