
पटना: बिहार सरकार ने राज्य के दो अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटरों को बड़ा सम्मान देने का फैसला किया है। भारतीय क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाज मुकेश कुमार और आकाश दीप को खेल कोटे के तहत पुलिस उपाधीक्षक (DSP) पद पर सीधी नियुक्ति देने की सिफारिश की गई है।
दोनों खिलाड़ियों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार उपलब्धियों को देखते हुए बिहार उत्कृष्ट खिलाड़ियों की सीधी नियुक्ति (संशोधन) नियमावली, 2026 के तहत यह प्रस्ताव गृह विभाग को भेजा गया है।
चयन समिति ने दी मंजूरी
सामान्य प्रशासन विभाग के अवर सचिव सिद्धेश्वर चौधरी द्वारा गृह विभाग को भेजे गए प्रस्ताव में दोनों खिलाड़ियों के नाम शामिल किए गए हैं। चयन समिति ने भी इनके नामों को स्वीकृति प्रदान कर दी है।
अब गृह विभाग की औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोनों खिलाड़ियों की नियुक्ति का रास्ता साफ हो जाएगा।
एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक का मिला पुरस्कार
सरकार की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, मुकेश कुमार और आकाश दीप दोनों चीन के हांगझोउ में आयोजित 2022 Asian Games में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय क्रिकेट टीम का हिस्सा रहे थे।
इसके अलावा आकाश दीप ने वर्ष 2025 में इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट श्रृंखला में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व कर अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया था।
बिहार के लालों को बड़ा सम्मान
मुकेश कुमार का जन्म 12 अक्टूबर 1993 को गोपालगंज जिले के काकड़कुंड गांव में हुआ था। वहीं आकाश दीप का जन्म 15 फरवरी 1994 को रोहतास जिले के सासाराम के बड्डी गांव में हुआ था।
दोनों खिलाड़ियों ने संघर्ष के बल पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पहचान बनाई है। अब उन्हें प्रशासनिक सेवा में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने जा रही है।
मिलेगा DSP स्तर का वेतन और सुविधाएं
नियुक्ति के बाद दोनों खिलाड़ियों को बिहार पुलिस में DSP स्तर का पद मिलेगा। इसके तहत उन्हें 9,300 से 34,800 रुपये के वेतनमान, 5,400 रुपये ग्रेड पे और वेतन स्तर-9 का लाभ मिलेगा। इसके साथ ही राज्य सरकार द्वारा निर्धारित अन्य भत्ते और सुविधाएं भी प्रदान की जाएंगी।
शुरुआती छह महीने रहेगी प्रोविजनल नियुक्ति
सरकार ने नियुक्ति के लिए कुछ शर्तें भी तय की हैं। चरित्र एवं पूर्ववृत्त सत्यापन रिपोर्ट प्राप्त होने तक दोनों खिलाड़ियों की नियुक्ति शुरुआती छह माह के लिए औपबंधिक (प्रोविजनल) रहेगी।
सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही नियुक्ति नियमित की जाएगी।
पांच साल तक खेलना होगा अनिवार्य
खेल कोटे के तहत नियुक्त खिलाड़ियों को एक विशेष बांड भरना होगा। इसके अनुसार उन्हें नियुक्ति के बाद अगले पांच वर्षों तक सक्रिय खिलाड़ी के रूप में विभिन्न प्रतियोगिताओं में बिहार और देश का प्रतिनिधित्व करना होगा।
यदि निर्धारित शर्तों का पालन नहीं किया गया तो उनकी सेवा स्थायी नहीं की जाएगी।
फर्जी दस्तावेज मिलने पर होगी कार्रवाई
बिहार राज्य खेल प्राधिकरण द्वारा दोनों खिलाड़ियों के खेल प्रमाणपत्रों का सत्यापन किया जा चुका है। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में यदि कोई शैक्षणिक, आवासीय या खेल संबंधी दस्तावेज गलत या फर्जी पाया जाता है तो नियुक्ति तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी जाएगी और नियमानुसार कार्रवाई भी की जाएगी।
बिहार सरकार के इस फैसले को राज्य के खिलाड़ियों के लिए बड़ा प्रोत्साहन माना जा रहा है। इससे खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ने और राज्य का नाम रोशन करने के लिए नई प्रेरणा मिलेगी।


