सीवान में भाजपा नेता मनोज सिंह के रिश्तेदारों पर अंधाधुंध फायरिंग; भांजे की मौत, तिलक की खुशियां लहू में डूबीं

सीवान। बिहार के सीवान जिले में अपराधियों के बेखौफ होने की दास्तान अब सड़कों पर खून के धब्बों से लिखी जा रही है। जिला मुख्यालय के नगर थाना क्षेत्र स्थित आंदर ढाला ओवरब्रिज के पास बुधवार, 29 अप्रैल 2026 की शाम एक ऐसी दुस्साहसिक वारदात हुई जिसने पूरे बिहार की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अपराधियों ने पूर्व एमएलसी और भाजपा के कद्दावर नेता मनोज सिंह के सगे रिश्तेदारों को अपना निशाना बनाया है। इस अंधाधुंध फायरिंग में भाजपा नेता के भांजे हर्ष कुमार की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनके बहनोई चंदन सिंह गोलियों से छलनी होकर जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे हैं। यह घटना उस वक्त हुई जब पूरा परिवार घर में ‘तिलक’ की खुशियां मना रहा था। संगीत और जश्न की आवाजों के बीच अचानक गूँजी गोलियों की तड़तड़ाहट ने खुशियों के माहौल को मातम के उस समंदर में बदल दिया, जहाँ अब सिर्फ चीखें और इंसाफ की गुहार शेष है।

तिलक का शगुन और मौत का ‘ट्रैप’: क्या है पूरी दास्तान?

​सीवान के भाजपा नेता मनोज सिंह के बहनोई चंदन सिंह के घर में इन दिनों मंगल गीतों की गूँज थी। परिवार के एक सदस्य का तिलक समारोह तय था और रिश्तेदार दूर-दराज से खुशियों में शरीक होने पहुँच रहे थे। चारों तरफ उत्साह का माहौल था और लोग तिलक की रस्मों के लिए निकलने की तैयारी कर रहे थे। इसी बीच चंदन सिंह अपने जवान बेटे हर्ष कुमार के साथ किसी काम से बाहर निकले थे। किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि घर की दहलीज लांघते ही मौत उनके कदम चूमने के लिए खड़ी है।

​चंदन सिंह और हर्ष जैसे ही आंदर ढाला ओवरब्रिज के पास पहुँचे, वहां पहले से घात लगाए बैठे एक सफेद रंग की कार में सवार अपराधियों ने उनका रास्ता रोक लिया। चश्मदीदों की मानें तो हमलावरों और चंदन सिंह के बीच पहले कुछ मिनटों तक तीखी बहस हुई। ऐसा लगा कि अपराधी किसी खास मकसद या पुरानी रंजिश को लेकर वहां पहुँचे थे। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि कार से उतरे नकाबपोश बदमाशों ने अपनी पिस्तौलें निकाल लीं और पिता-पुत्र पर गोलियों की बौछार कर दी। हमलावरों ने तब तक ट्रिगर दबाए रखा जब तक कि दोनों लहूलुहान होकर सड़क पर नहीं गिर पड़े। वारदात को अंजाम देने के बाद अपराधी अपनी कार में सवार होकर शहर की भीड़भाड़ वाली सड़कों से बड़ी आसानी से ओझल हो गए।

सदर अस्पताल में चीख-पुकार और पटना रेफर का दौर

​ओवरब्रिज पर हुई इस खूनी वारदात के बाद इलाके में भगदड़ मच गई। स्थानीय लोगों ने हिम्मत दिखाते हुए पुलिस को सूचना दी और तत्काल दोनों घायलों को सीवान सदर अस्पताल पहुँचाया। अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में जैसे ही घायलों को लाया गया, वहां का मंजर हृदयविदारक था। डॉक्टरों की टीम ने सबसे पहले 21 वर्षीय हर्ष कुमार की जांच की, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। डॉक्टरों ने हर्ष को ‘मृत’ घोषित कर दिया। अपनी आंखों के सामने जवान बेटे का शव देख परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई।

​वहीं, चंदन सिंह की स्थिति अत्यंत नाजुक बनी हुई थी। उन्हें शरीर के कई हिस्सों में गोलियां लगी थीं, जिससे अत्यधिक रक्तस्राव हो चुका था। सदर अस्पताल के डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार कर उन्हें बेहतर चिकित्सा के लिए तुरंत पटना रेफर कर दिया। फिलहाल चंदन सिंह को एयर एंबुलेंस या हाई-स्पीड एम्बुलेंस के जरिए पटना के एक बड़े निजी अस्पताल में ले जाया गया है, जहाँ उनकी स्थिति अब भी चिंताजनक बनी हुई है। भाजपा नेता मनोज सिंह भी खबर मिलते ही अस्पताल पहुँचे, उनके चेहरे पर दुख और आक्रोश की लकीरें साफ देखी जा सकती थीं।

प्रशासनिक महकमे में हड़कंप: सीसीटीवी फुटेज की तलाश

​एक हाई-प्रोफाइल परिवार पर हुए इस हमले ने जिला प्रशासन की नींद उड़ा दी है। घटना की जानकारी मिलते ही सदर एसडीपीओ अजय कुमार सिंह और नगर थाना की पुलिस टीम दलबल के साथ सदर अस्पताल और घटनास्थल पर पहुँची। अस्पताल परिसर में बढ़ती भीड़ और जनाक्रोश को देखते हुए भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है। एसडीपीओ ने परिजनों से बात की और घटनास्थल का मुआयना किया।

​पुलिस की प्राथमिक जांच अब उस ‘सफेद कार’ के इर्द-गिर्द घूम रही है जिसका इस्तेमाल अपराधियों ने किया था। आंदर ढाला ओवरब्रिज और उसके आसपास के रास्तों पर लगे सीसीटीवी कैमरों को खंगाला जा रहा है। पुलिस को उम्मीद है कि कैमरों की मदद से अपराधियों की गाड़ी का नंबर और उनके चेहरे स्पष्ट हो सकेंगे। अजय कुमार सिंह ने मीडिया को बताया कि अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीम (SIT) का गठन किया गया है और जिले के सभी निकास द्वारों पर नाकेबंदी कर दी गई है। हालांकि, घटना के कई घंटे बीत जाने के बाद भी हमलावरों का कोई सुराग नहीं मिल पाया है।

पुरानी रंजिश या राजनैतिक साजिश? जांच के कई पहलू

​सीवान की राजनीति और अपराध का चोली-दामन का साथ रहा है। भाजपा नेता मनोज सिंह के रिश्तेदारों पर हुए इस जानलेवा हमले के पीछे कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। क्या यह केवल एक आपसी विवाद का नतीजा था या इसके पीछे कोई गहरी राजनैतिक साजिश छिपी है? पुलिस इन सभी कोणों पर काम कर रही है।

  1. आपसी रंजिश: पुलिस परिवार के पुराने विवादों और चंदन सिंह के व्यापारिक संपर्कों की जांच कर रही है।
  2. वर्चस्व की लड़ाई: भाजपा नेता के बढ़ते कद को देखते हुए क्या विरोधियों ने उनके परिवार को निशाना बनाया?
  3. कॉन्ट्रैक्ट किलिंग: जिस सफाई से अपराधियों ने ओवरब्रिज जैसे सार्वजनिक स्थान पर वारदात को अंजाम दिया, वह किसी पेशेवर गिरोह की ओर इशारा करता है।

​नगर परिषद और स्थानीय निकायों के चुनावों के बाद से ही जिले में राजनैतिक तनाव बढ़ा हुआ है, ऐसे में इस घटना ने सुलगती आग में घी डालने का काम किया है।

कानून-व्यवस्था पर सवाल और जनता का आक्रोश

​सीवान में दिनदहाड़े हुई इस हत्या ने ‘सुशासन’ के दावों की कलई खोल कर रख दी है। स्थानीय नागरिकों में इस बात को लेकर भारी गुस्सा है कि जब एक कद्दावर नेता के परिवार वाले सुरक्षित नहीं हैं, तो आम आदमी की सुरक्षा का क्या होगा? ओवरब्रिज के पास पुलिस की गश्ती न होने और अपराधियों के आसानी से फरार हो जाने पर लोग पुलिसिया कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं।

​भाजपा समर्थकों और स्थानीय युवाओं ने अस्पताल के बाहर प्रदर्शन किया और मांग की कि अपराधियों का ‘हिसाब’ तुरंत होना चाहिए। लोगों का तर्क है कि हाल के दिनों में सीवान में रंगदारी और लूट की घटनाओं में बेतहाशा वृद्धि हुई है। पुलिस केवल कागजी कार्रवाई में जुटी रहती है, जबकि अपराधी सरेराह मौत बांट रहे हैं। इस घटना के बाद पूरे शहर में एक अघोषित सन्नाटा और डर का माहौल व्याप्त है।

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