
पटना। बिहार की प्रगति और लोक-कल्याण के संकल्प को दोहराते हुए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में बुधवार, 29 अप्रैल 2026 को मंत्रिपरिषद की एक ऐतिहासिक बैठक संपन्न हुई। इस महाबैठक में राज्य के सर्वांगीण विकास से जुड़े कुल 64 महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई है। सरकार ने अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट करते हुए जहाँ एक तरफ आम आदमी की जेब पर पड़ने वाले बिजली के बोझ को कम करने के लिए खजाना खोल दिया है, वहीं दूसरी तरफ ‘सात निश्चय-3’ के तहत शिक्षा क्षेत्र में ऐसी बुनियादी तब्दीली का खाका खींचा है जिसकी गूँज आने वाले दशकों तक सुनाई देगी। ऊर्जा, शिक्षा, गृह, और पथ निर्माण जैसे विभागों में लिए गए ये दूरगामी निर्णय न केवल वर्तमान व्यवस्था को आधुनिक बनाएंगे, बल्कि बिहार के युवाओं के लिए घर बैठे उच्च शिक्षा और रोजगार के नए द्वार भी खोलेंगे।
ऊर्जा क्षेत्र: उपभोक्ताओं के लिए ₹23,165 करोड़ का सुरक्षा कवच
राज्य सरकार ने बिजली की बढ़ती कीमतों के बीच आम उपभोक्ताओं को बड़ी राहत देने का फैसला किया है। मंत्रिपरिषद ने “मुख्यमंत्री विद्युत उपभोक्ता सहायता योजना” के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 23,165.00 करोड़ रुपये की अनुदान राशि को प्रशासनिक स्वीकृति दी है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य के घरेलू और व्यावसायिक उपभोक्ताओं को निर्बाध एवं किफायती दर पर बिजली उपलब्ध कराना है।
इस अनुदान राशि के प्रबंधन के लिए सरकार ने एक पारदर्शी व्यवस्था तैयार की है। कुल राशि में से 18,005.00 करोड़ रुपये रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के माध्यम से सीधे एनटीपीसी (NTPC) को भुगतान किए जाएंगे। यह भुगतान अप्रैल 2026 से मार्च 2027 तक प्रति माह 1,500.41 करोड़ रुपये की दर से किया जाएगा, ताकि बिजली उत्पादन और आपूर्ति की कड़ी में कोई वित्तीय बाधा न आए। शेष 5,160.00 करोड़ रुपये बिहार स्टेट पावर (होल्डिंग) कंपनी लिमिटेड को उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे राज्य के भीतर बिजली के बुनियादी ढांचे और वितरण तंत्र को और अधिक सशक्त बनाया जा सके। यह निर्णय बिहार के उन लाखों परिवारों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है जो बिजली बिल की बढ़ती चिंताओं से घिरे रहते थे।
शिक्षा क्रांति: 208 नए डिग्री कॉलेज और मॉडल स्कूलों का सपना
शिक्षा के क्षेत्र में ‘सात निश्चय-3’ के तहत “उन्नत शिक्षा-उज्ज्वल भविष्य” कार्यक्रम के जरिए सरकार ने एक बड़ी घोषणा की है। राज्य के उन 208 प्रखंडों में डिग्री महाविद्यालयों की स्थापना की जाएगी जहाँ वर्तमान में उच्च शिक्षा का एक भी संस्थान उपलब्ध नहीं है। यह कदम उन ग्रामीण मेधावी छात्रों के लिए मील का पत्थर साबित होगा जिन्हें स्नातक की पढ़ाई के लिए मीलों दूर शहरों का रुख करना पड़ता था।
इन नए कॉलेजों के सुचारू संचालन के लिए कैबिनेट ने 9,152 नए पदों के सृजन को मंजूरी दी है। प्रत्येक महाविद्यालय में शिक्षक और शिक्षकेत्तर कर्मियों के 44-44 पद होंगे। सरकार ने इन कॉलेजों के प्रारंभिक संचालन और भवनों के जीर्णोद्धार के लिए प्रति कॉलेज 50 लाख रुपये की दर से कुल 104 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी है।
इसके साथ ही, स्कूली शिक्षा को विश्वस्तरीय बनाने के लिए सरकार ने 8,000 करोड़ रुपये की लागत से राज्य के सभी जिला स्कूलों और प्रत्येक प्रखंड के एक-एक उच्च माध्यमिक विद्यालय को ‘मॉडल स्कूल’ के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है। इन स्कूलों में:
- आधुनिक सुविधाएं: डिजिटल स्क्रीन के साथ स्मार्ट कक्षाएं, उन्नत विज्ञान प्रयोगशालाएं और हाई-स्पीड इंटरनेट।
- नवाचार आधारित शिक्षा: मेधावी छात्रों के लिए विशेष कोचिंग और साप्ताहिक टेस्ट के जरिए प्रगति की निगरानी।
- बुनियादी ढांचा: स्वच्छ पेयजल, आधुनिक शौचालय, खेल मैदान और बाउंड्री वाल सुनिश्चित की जाएगी।
निजी कॉलेजों पर नकेल और नामांकन में पारदर्शिता
उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के आलोक में, बिहार सरकार ने निजी व्यावसायिक शिक्षण संस्थानों में मनमानी फीस और नामांकन में होने वाली धांधली पर लगाम लगाने के लिए नई नियमावली, 2026 को मंजूरी दी है। इस व्यवस्था के तहत एक नौ सदस्यीय नामांकन विनियमन एवं शुल्क निर्धारण समिति का गठन किया जाएगा। यह समिति निजी कॉलेजों द्वारा लिए जाने वाले शुल्कों की समीक्षा करेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि शिक्षा के क्षेत्र में मुनाफाखोरी न हो। इस निर्णय से उन हजारों अभिभावकों को राहत मिलेगी जो निजी कॉलेजों की भारी-भरकम फीस के कारण अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित रहते थे।
ट्रैफिक चालान और प्रशासनिक सुधार
परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली को सरल बनाने के लिए सरकार ने “एकमुश्त यातायात चालान निपटान योजना, 2026” लागू करने का निर्णय लिया है। अक्सर देखा जाता है कि जुर्माने की राशि में विसंगतियों के कारण लोग चालान भरने में देरी करते हैं, जिससे राजस्व का नुकसान होता है। अब 90 दिनों से अधिक समय से लंबित चालानों का निपटारा वर्चुअल कोर्ट के माध्यम से राष्ट्रीय लोक अदालत में कराया जाएगा।
प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण के लिए गृह विभाग में भी कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं:
- ट्रैफिक पुलिस के नए पद: भागलपुर, मुजफ्फरपुर, गया और बिहारशरीफ में यातायात व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए 485 नए पदों का सृजन किया गया है।
- पुलिस पदोन्नति: पुलिस अवर निरीक्षक के 20,937 पदों में से 50% पदों को अब पदोन्नति के माध्यम से भरा जाएगा, जिससे पुलिस बल के मनोबल में वृद्धि होगी।
- साइबर सुरक्षा: साइबर अपराधों पर नकेल कसने के लिए पटना में 51.19 करोड़ रुपये की लागत से एक आधुनिक साइबर अपराध इकाई भवन का निर्माण किया जाएगा।
क्षेत्रीय विकास और सामाजिक कल्याण
कैबिनेट ने अंग और मगध प्रक्षेत्र के विकास के लिए भी कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को हरी झंडी दी है। भागलपुर के पीरपैंती में थर्मल पावर प्रोजेक्ट के लिए सरकारी भूमि का हस्तांतरण और बांका में सिपाही प्रशिक्षण विद्यालय (CTS) के लिए जमीन की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है।
सामाजिक सुरक्षा के मोर्चे पर, अनुसूचित जाति और जनजाति के छात्रों के लिए छात्रावास अनुदान राशि को ₹1,000 से बढ़ाकर सीधे ₹2,000 प्रति माह कर दिया गया है। स्वास्थ्य क्षेत्र में पटना के गर्दनीबाग में ऑटिज्म से ग्रसित बच्चों के लिए ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ की स्थापना का निर्णय लिया गया है। पर्यावरण संरक्षण के लिए “बिहार हरित जलवायु कोष” के गठन को मंजूरी दी गई है और संजय गांधी जैविक उद्यान का नाम आधिकारिक तौर पर ‘पटना जू’ कर दिया गया है।
वाराणसी हेलीपोर्ट और बेतिया राज की संपत्तियां
एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय में, उत्तर प्रदेश के वाराणसी में प्रस्तावित हेलीपोर्ट परियोजना के लिए बिहार सरकार ने अनापत्ति (NOC) प्रदान कर दी है। यह भूमि मूल रूप से बेतिया राज की संपत्ति रही है, जो अब बिहार सरकार के राजस्व विभाग के अधीन है। इसके साथ ही, बेतिया राज की अवैध जमीनों पर कब्जा वापस लेने के लिए नई नियमावली को भी मंजूरी दी गई है, जिससे राज्य सरकार के राजस्व में बड़ी वृद्धि होने की उम्मीद है।
मंत्रिपरिषद की इस बैठक ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सम्राट सरकार अब ‘एक्शन मोड’ में है और विकास की योजनाओं को केवल कागजों तक सीमित रखने के बजाय धरातल पर उतारने के लिए तेजी से कदम बढ़ा रही है।
वॉयस ऑफ बिहार (VOB) न्यूज़ डेस्क की विशेष रिपोर्ट।


