
भागलपुर, 19 मई 2026: भागलपुर और नवगछिया के बीच संपर्क की सबसे अहम कड़ी माने जाने वाले विक्रमशिला सेतु पर राहत की उम्मीद अब तेज होती दिखाई दे रही है। सेतु का स्लैब टूटने के बाद जहां लाखों लोगों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हो गई थी, वहीं अब युद्धस्तर पर बनाए जा रहे बेली ब्रिज के कारण लोगों को जल्द राहत मिलने की संभावना जताई जा रही है। अधिकारियों के अनुसार निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है और जून के पहले सप्ताह तक छोटे वाहनों के लिए आवागमन शुरू किया जा सकता है।
विक्रमशिला सेतु को भागलपुर की लाइफलाइन कहा जाता है। यह पुल भागलपुर को नवगछिया, कटिहार, पूर्णिया और सीमांचल के कई जिलों से जोड़ता है। कुछ दिन पहले सेतु के पिलर संख्या 133 के पास का स्लैब अचानक टूटकर गंगा नदी में गिर गया था। घटना के बाद पुल पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह रोक दी गई थी। इसके कारण दोनों तरफ लंबा ट्रैफिक संकट खड़ा हो गया और लाखों लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
पुल बंद होने के बाद लोगों के लिए नाव ही एकमात्र सहारा बन गई। गंगा नदी पार करने के लिए रोज बड़ी संख्या में लोग नावों का इस्तेमाल करने लगे, जिससे घाटों पर भारी भीड़ देखी जाने लगी। स्कूल-कॉलेज जाने वाले छात्र, नौकरीपेशा लोग, व्यापारी और मरीजों को सबसे अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कई लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए घंटों अतिरिक्त समय लगाना पड़ रहा है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री ने घटना के बाद इलाके का हवाई सर्वेक्षण किया था। इसके बाद पटना में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें पुल की मरम्मत और वैकल्पिक व्यवस्था पर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में फैसला लिया गया कि लोगों को जल्द राहत देने के लिए सेतु पर अस्थायी बेली ब्रिज बनाया जाए।
सरकार के निर्देश के बाद बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन यानी ने युद्धस्तर पर निर्माण कार्य शुरू कर दिया। निर्माण एजेंसियों की कई टीमें लगातार मौके पर काम कर रही हैं। भारी मशीनों और आधुनिक तकनीक की मदद से बेली ब्रिज को तेजी से तैयार किया जा रहा है।
अधिकारियों के मुताबिक अब तक निर्माण कार्य का 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सा पूरा हो चुका है। पुल के क्षतिग्रस्त हिस्से पर स्टील स्ट्रक्चर लगाने का काम तेजी से चल रहा है। इंजीनियरों की टीम दिन-रात निर्माण कार्य की निगरानी कर रही है ताकि तय समय सीमा के भीतर पुल तैयार किया जा सके।
प्रशासन का कहना है कि यदि मौसम सामान्य रहा और तकनीकी स्तर पर कोई बड़ी बाधा नहीं आई तो जून के पहले सप्ताह तक छोटे वाहनों के लिए आवागमन शुरू किया जा सकता है। शुरुआत में हल्के वाहनों को अनुमति दी जाएगी, जबकि भारी वाहनों के लिए अलग व्यवस्था पर विचार किया जा रहा है।
स्थानीय लोगों के लिए यह खबर बड़ी राहत लेकर आई है। पुल बंद होने के बाद व्यापार और परिवहन पर भी बड़ा असर पड़ा है। भागलपुर से सीमांचल और कोसी क्षेत्र की ओर जाने वाले मालवाहक वाहन लंबे वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे परिवहन लागत बढ़ गई है। कई व्यापारियों ने बताया कि समय पर सामान नहीं पहुंचने के कारण आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है।
स्वास्थ्य सेवाओं पर भी इसका असर देखने को मिला है। नवगछिया और आसपास के इलाकों से इलाज के लिए भागलपुर आने वाले मरीजों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। नाव और लंबी सड़क यात्रा के कारण आपातकालीन सेवाएं प्रभावित हुई हैं। ऐसे में बेली ब्रिज के तैयार होने से आम लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बेली ब्रिज अस्थायी समाधान जरूर है, लेकिन वर्तमान स्थिति में यह सबसे तेज और प्रभावी विकल्प साबित हो सकता है। बेली ब्रिज ऐसी संरचना होती है जिसे कम समय में तैयार किया जा सकता है और संकट की स्थिति में यातायात बहाल करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है।
इधर, पुल की मरम्मत के साथ-साथ स्थायी समाधान को लेकर भी सरकार गंभीर दिखाई दे रही है। सूत्रों के मुताबिक सेतु की तकनीकी जांच लगातार जारी है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए व्यापक योजना तैयार की जा रही है। इंजीनियरिंग विशेषज्ञों की टीम पुल के अन्य हिस्सों की भी जांच कर रही है ताकि किसी संभावित खतरे को पहले ही रोका जा सके।
स्थानीय लोगों ने सरकार और निर्माण एजेंसियों से मांग की है कि कार्य की गुणवत्ता से किसी तरह का समझौता न किया जाए। लोगों का कहना है कि जल्दबाजी में काम पूरा करने के बजाय सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन होना चाहिए ताकि भविष्य में कोई और दुर्घटना न हो।
घटना के बाद प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी है। पुल के आसपास पुलिस बल की तैनाती बढ़ाई गई है और आम लोगों की आवाजाही को नियंत्रित किया जा रहा है। घाटों पर भी निगरानी बढ़ाई गई है क्योंकि नावों पर यात्रियों का दबाव लगातार बढ़ रहा है।
भागलपुर और नवगछिया के लाखों लोगों की नजर अब बेली ब्रिज के निर्माण कार्य पर टिकी हुई है। यदि निर्धारित समय के भीतर आवागमन शुरू हो जाता है तो क्षेत्र की आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों को बड़ी राहत मिलेगी। फिलहाल प्रशासन और निर्माण एजेंसियां तेजी से काम में जुटी हैं ताकि लोगों की मुश्किलें जल्द कम की जा सकें।
विक्रमशिला सेतु पर चल रहा यह निर्माण कार्य केवल एक पुल की मरम्मत नहीं बल्कि लाखों लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को पटरी पर लौटाने की कोशिश माना जा रहा है। आने वाले कुछ दिन इस लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होंगे कि कब तक लोगों को सामान्य आवागमन की सुविधा दोबारा मिल पाती है।


