
भागलपुर, 19 मई 2026: भागलपुर जिले के सबौर प्रखंड स्थित मामलखा पंचायत में गंगा कटाव को लेकर लोगों का गुस्सा अब खुलकर सामने आने लगा है। वर्षों से कटाव की समस्या झेल रहे ग्रामीणों ने सोमवार को आयोजित ‘सहयोग शिविर’ के दौरान जमकर विरोध प्रदर्शन किया। स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई जब नाराज ग्रामीणों ने स्थानीय विधायक का घेराव कर लिया और कटावरोधी कार्यों में हो रही देरी को लेकर सवाल उठाने लगे।
ग्रामीणों का आरोप था कि हर साल गंगा का कटाव गांवों की ओर बढ़ता जा रहा है, लेकिन प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की ओर से केवल आश्वासन दिए जा रहे हैं। जमीन पर प्रभावी और स्थायी समाधान अब तक दिखाई नहीं दे रहा है। लोगों ने कहा कि मानसून आने में अब ज्यादा समय नहीं बचा है और गंगा का जलस्तर बढ़ते ही कटाव फिर तेज हो जाएगा, जिससे कई गांवों पर बड़ा खतरा मंडराने लगेगा।
मामलखा पंचायत के हाई स्कूल परिसर में सरकार की ओर से सहयोग शिविर का आयोजन किया गया था। शिविर में विभिन्न विभागों के अधिकारी, कर्मचारी और जनप्रतिनिधि पहुंचे थे। कार्यक्रम की शुरुआत औपचारिक संबोधन और प्रशासनिक गतिविधियों के साथ हुई। लोगों की समस्याएं सुनने के लिए अलग-अलग विभागों के स्टॉल लगाए गए थे, जहां ग्रामीणों ने अपने आवेदन जमा किए।
हालांकि शिविर का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान करना था, लेकिन सबसे ज्यादा आक्रोश गंगा कटाव को लेकर देखने को मिला। जैसे ही विधायक मिथुन यादव कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे, बड़ी संख्या में ग्रामीण उनके आसपास जमा हो गए और सवालों की बौछार शुरू कर दी। कुछ ग्रामीण विधायक की गाड़ी के सामने खड़े हो गए और विरोध जताने लगे।
स्थिति कुछ देर के लिए काफी तनावपूर्ण हो गई। मौके पर मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय लोगों ने बीच-बचाव कर माहौल को शांत करने की कोशिश की। ग्रामीण लगातार यह मांग कर रहे थे कि कटावरोधी कार्यों को युद्धस्तर पर शुरू किया जाए और केवल निरीक्षण व घोषणाओं तक मामला सीमित न रहे।
ग्रामीणों का कहना था कि मामलखा पंचायत में गंगा का कटाव हर साल नई तबाही लेकर आता है। कई खेत नदी में समा चुके हैं और अब आबादी वाले इलाके भी खतरे की जद में आ गए हैं। लोगों का आरोप है कि कटावरोधी कार्यों की गति बेहद धीमी है और संबंधित विभाग समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।
स्थानीय ग्रामीण सुनील मंडल ने बताया कि गंगा लगातार गांव की ओर बढ़ रही है। खेतों के साथ-साथ कई कच्चे घर और सड़कें भी खतरे में हैं। उन्होंने कहा कि यदि जल्द मजबूत सुरक्षा कार्य नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में स्थिति और भयावह हो सकती है। ग्रामीणों का आरोप था कि कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को समस्या बताई गई, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला।
एक अन्य ग्रामीण बिशु मंडल ने कहा कि अब स्थिति बेहद गंभीर हो चुकी है। उन्होंने बताया कि गंगा का कटाव गांव के काफी करीब पहुंच गया है और लोग भय के माहौल में जी रहे हैं। उनका कहना था कि बारिश शुरू होते ही कटाव तेज हो जाएगा, लेकिन अब तक कोई ठोस तैयारी नजर नहीं आ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि महीनों से केवल फाइलों और बैठकों में काम चल रहा है, जबकि जमीन पर बहुत कम काम दिखाई देता है।
ग्रामीणों के विरोध के बीच विधायक मिथुन यादव ने लोगों को शांत कराने की कोशिश की। उन्होंने स्वीकार किया कि कटावरोधी कार्यों की रफ्तार धीमी है और इसी कारण लोगों में नाराजगी बढ़ी है। विधायक ने कहा कि ग्रामीणों की चिंता पूरी तरह जायज है और प्रशासन को इस दिशा में तेजी से काम करना चाहिए।
विधायक ने भरोसा दिलाया कि वह खुद तीन दिनों के भीतर कटाव प्रभावित इलाके का दौरा करेंगे और संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक कर स्थिति की समीक्षा करेंगे। उन्होंने कहा कि कटाव की समस्या गंभीर है और इसका स्थायी समाधान निकालना जरूरी है।
उन्होंने ग्रामीणों से कहा कि विरोध लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है और जनता की आवाज सुनना जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है। विधायक ने यह भी कहा कि सरकार की ओर से कटावरोधी कार्यों के लिए प्रयास किए जा रहे हैं और आगे इस कार्य में तेजी लाने का प्रयास होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि गंगा किनारे बसे इलाकों में कटाव की समस्या हर वर्ष गंभीर रूप लेती जा रही है। खासकर भागलपुर और उसके आसपास के क्षेत्रों में नदी का बहाव कई गांवों के लिए लगातार खतरा बनता जा रहा है। मानसून के दौरान जलस्तर बढ़ने पर स्थिति और खतरनाक हो जाती है।
कटाव के कारण केवल जमीन का नुकसान नहीं होता बल्कि लोगों की आजीविका, खेती और आवास भी प्रभावित होते हैं। कई परिवारों को हर साल विस्थापन का खतरा झेलना पड़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्थायी तटबंध, मजबूत कटावरोधी संरचना और वैज्ञानिक तरीके से नदी प्रबंधन ही इसका दीर्घकालिक समाधान हो सकता है।
इधर, सहयोग शिविर में पहुंचे अधिकारियों ने ग्रामीणों से आवेदन लिए और समस्याओं के समाधान का भरोसा दिया। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि कटाव प्रभावित क्षेत्रों की रिपोर्ट तैयार की जा रही है और आवश्यक कार्रवाई के लिए विभागीय स्तर पर प्रक्रिया चल रही है।
हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि अब उन्हें केवल आश्वासन नहीं बल्कि जमीन पर तेज कार्रवाई चाहिए। लोगों का मानना है कि यदि मानसून से पहले मजबूत कटावरोधी कार्य नहीं हुआ तो इस बार कई गांवों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
मामलखा पंचायत में सहयोग शिविर के दौरान सामने आया यह विरोध अब प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के लिए चेतावनी माना जा रहा है। ग्रामीणों का गुस्सा यह साफ संकेत दे रहा है कि गंगा कटाव का मुद्दा अब केवल स्थानीय समस्या नहीं बल्कि बड़े जनसंकट का रूप लेता जा रहा है, जिस पर तत्काल और प्रभावी कार्रवाई की जरूरत है।


