
सीवान: बिहार के सीवान जिले में पुलिस ने नकली भारतीय मुद्रा तैयार करने वाले एक संगठित गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए बड़ी सफलता हासिल की है। मैरवा थाना क्षेत्र के पंडितपुरा गांव में की गई विशेष छापेमारी के दौरान पुलिस ने 5 लाख 45 हजार रुपये मूल्य के जाली नोट, नोट छापने में इस्तेमाल होने वाली मशीन, प्रिंटिंग से जुड़े कई उपकरण और अन्य संदिग्ध सामग्री बरामद की है। इस कार्रवाई में एक महिला समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस का मानना है कि यह केवल स्थानीय स्तर पर सक्रिय गिरोह नहीं, बल्कि इसके तार दूसरे जिलों और संभवतः अंतरराज्यीय नेटवर्क से भी जुड़े हो सकते हैं। फिलहाल गिरफ्तार आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है और पूरे नेटवर्क को खंगालने का अभियान तेज कर दिया गया है।
गुप्त सूचना के बाद बनी विशेष रणनीति
पुलिस को विश्वसनीय स्रोतों से जानकारी मिली थी कि मैरवा थाना क्षेत्र के पंडितपुरा गांव में एक मकान के भीतर फोटो कॉपी और प्रिंटिंग के काम की आड़ में नकली भारतीय मुद्रा तैयार की जा रही है। सूचना को गंभीरता से लेते हुए वरिष्ठ अधिकारियों ने तत्काल इसकी पुष्टि कराई। प्रारंभिक जांच में सूचना सही पाए जाने के बाद अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ) के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई।
टीम ने पूरी योजना के साथ संदिग्ध ठिकाने की निगरानी की और उचित समय पर छापेमारी की। पुलिस की कार्रवाई इतनी तेज थी कि आरोपियों को किसी भी तरह के सबूत नष्ट करने का मौका नहीं मिल सका। मौके से भारी मात्रा में जाली नोट और उन्हें तैयार करने वाली मशीन बरामद होने के बाद पूरे मामले का खुलासा हो गया।
5.45 लाख रुपये के जाली नोट बरामद
छापेमारी के दौरान पुलिस ने अलग-अलग मूल्यवर्ग के कुल 5 लाख 45 हजार रुपये के नकली नोट बरामद किए। इसके अलावा मौके से 88 हजार रुपये नकद भी जब्त किए गए हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि बरामद नकद राशि वैध कारोबार की थी या फिर नकली नोटों के लेनदेन से प्राप्त की गई थी।
पुलिस ने नकली नोट छापने में इस्तेमाल होने वाली प्रिंटिंग मशीन, कंप्यूटर से जुड़े उपकरण, प्रिंटिंग सामग्री, विशेष कागज और अन्य तकनीकी संसाधनों को भी अपने कब्जे में ले लिया है। सभी बरामद वस्तुओं को फॉरेंसिक जांच के लिए सुरक्षित रखा गया है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि जाली नोट तैयार करने की तकनीक कितनी उन्नत थी और अब तक कितनी मात्रा में नकली मुद्रा बाजार में पहुंचाई जा चुकी थी।
महिला समेत तीन लोगों की गिरफ्तारी
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने एक महिला सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार लोगों में विमला देवी, उसका भाई मनु और एक अन्य आरोपी शामिल है। पुलिस तीनों से अलग-अलग पूछताछ कर रही है ताकि गिरोह के संचालन, अन्य सदस्यों और नकली नोटों की सप्लाई चेन के बारे में विस्तृत जानकारी हासिल की जा सके।
जांच अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं, जिनके आधार पर जल्द ही अन्य स्थानों पर भी छापेमारी की जा सकती है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि गिरोह में और कितने लोग सक्रिय हैं तथा कौन लोग वित्तीय और तकनीकी सहायता उपलब्ध करा रहे थे।
फोटो कॉपी और प्रिंटिंग की आड़ में चल रहा था अवैध कारोबार
प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि आरोपी लंबे समय से फोटो कॉपी और प्रिंटिंग के व्यवसाय की आड़ में नकली नोट तैयार कर रहे थे। सामान्य ग्राहकों की आवाजाही के कारण किसी को उन पर आसानी से संदेह नहीं होता था। इसी का फायदा उठाकर गिरोह कथित रूप से नकली भारतीय मुद्रा तैयार करता और उसे अलग-अलग माध्यमों से बाजार में पहुंचाता था।
जांच एजेंसियां अब यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि क्या आरोपियों ने केवल नकली नोट ही तैयार किए या फिर अन्य फर्जी दस्तावेज और पहचान पत्र भी बनाए जाते थे। इस पूरे नेटवर्क की आर्थिक गतिविधियों की भी जांच शुरू कर दी गई है।
किन जिलों तक पहुंची नकली मुद्रा, पुलिस कर रही जांच
पुलिस के अनुसार फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि बरामद नकली नोटों की सप्लाई किन-किन जिलों और राज्यों तक की जा रही थी। जांच एजेंसियां गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन, कॉल डिटेल, बैंक खातों, डिजिटल भुगतान रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की जांच कर रही हैं।
तकनीकी टीम मोबाइल डेटा और सोशल मीडिया संपर्कों का विश्लेषण कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि गिरोह किन लोगों से जुड़ा हुआ था। यदि जांच में किसी बड़े नेटवर्क की पुष्टि होती है तो दूसरे राज्यों की एजेंसियों से भी संपर्क किया जाएगा।
फॉरेंसिक जांच से खुलेंगे कई राज
बरामद मशीन, प्रिंटर, विशेष कागज और अन्य उपकरणों को विशेषज्ञों के पास भेजा जाएगा। फॉरेंसिक जांच से यह पता लगाया जाएगा कि नकली नोटों की गुणवत्ता कितनी उच्च स्तर की थी और उन्हें असली नोटों की तरह दिखाने के लिए कौन-कौन सी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया।
विशेषज्ञ यह भी जांच करेंगे कि क्या मशीनों का उपयोग केवल भारतीय मुद्रा की नकल के लिए किया जाता था या फिर अन्य प्रकार के सुरक्षा दस्तावेज भी तैयार किए जाते थे। रिपोर्ट मिलने के बाद पुलिस आगे की कार्रवाई को और मजबूत करेगी।
नकली मुद्रा से अर्थव्यवस्था पर पड़ता है गंभीर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि नकली नोटों का कारोबार केवल कानून व्यवस्था का मामला नहीं है, बल्कि इससे देश की अर्थव्यवस्था और वित्तीय व्यवस्था पर भी गंभीर प्रभाव पड़ता है। जाली मुद्रा बाजार में पहुंचने से आम लोगों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है, जबकि व्यापारियों और बैंकिंग प्रणाली के लिए भी यह बड़ी चुनौती बन जाती है।
इसी वजह से सुरक्षा एजेंसियां समय-समय पर ऐसे गिरोहों के खिलाफ अभियान चलाती रहती हैं। आधुनिक तकनीक और डिजिटल निगरानी के माध्यम से अब ऐसे नेटवर्क तक पहुंचना पहले की तुलना में अधिक आसान हुआ है, लेकिन अपराधी भी लगातार नए तरीके अपनाने की कोशिश करते रहते हैं।
डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ रही जांच
जांच अधिकारियों के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन, लैपटॉप, पेन ड्राइव, प्रिंटिंग फाइलें और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। इससे यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि गिरोह कितने समय से सक्रिय था और अब तक कितनी मात्रा में नकली मुद्रा तैयार कर बाजार में भेजी जा चुकी है।
पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि कहीं आरोपियों का संबंध किसी ऐसे नेटवर्क से तो नहीं है जो दूसरे राज्यों में नकली मुद्रा की सप्लाई करता हो। जरूरत पड़ने पर केंद्रीय एजेंसियों की भी सहायता ली जा सकती है।
लोगों से सतर्क रहने की अपील
पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि नकदी का लेन-देन करते समय प्रत्येक नोट की सावधानीपूर्वक जांच करें। यदि किसी को किसी नोट पर संदेह हो या नकली मुद्रा मिलने की आशंका हो तो उसे बाजार में चलाने की बजाय तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन या संबंधित बैंक को इसकी सूचना दें।
अधिकारियों ने यह भी कहा कि यदि किसी क्षेत्र में संदिग्ध प्रिंटिंग गतिविधि, अवैध मशीनों का उपयोग या नकली नोटों के कारोबार की जानकारी मिले तो तुरंत पुलिस को सूचित करें। नागरिकों की सतर्कता से ऐसे संगठित अपराधों पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है।
पूरे नेटवर्क को खत्म करने तक जारी रहेगा अभियान
पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई केवल एक छापेमारी तक सीमित नहीं रहेगी। गिरफ्तार आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तलाश की जा रही है और जल्द ही कई स्थानों पर नई कार्रवाई की जा सकती है। अधिकारियों का कहना है कि नकली भारतीय मुद्रा तैयार करने और उसके वितरण में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। तकनीकी जांच, फॉरेंसिक रिपोर्ट और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पूरे गिरोह को कानून के दायरे में लाने के लिए अभियान लगातार जारी रहेगा।


