
भागलपुर, 19 मई 2026: बिहार के भागलपुर में गंगा नदी के बीच एक बार फिर बड़ा हादसा होते-होते टल गया। यात्रियों से भरी नाव अचानक बीच धारा में खराब हो गई, जिसके बाद नाव पर सवार लोगों में अफरा-तफरी और दहशत का माहौल बन गया। घटना की जानकारी मिलते ही SDRF की टीम मौके पर पहुंची और तेजी से रेस्क्यू अभियान चलाकर सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी प्रकार की जानमाल की क्षति नहीं हुई, लेकिन लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने प्रशासन और नाव संचालन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार यह घटना उस समय हुई जब बड़ी संख्या में यात्री महादेवपुर गंगा घाट से बरारी गंगा घाट की ओर नाव के जरिए सफर कर रहे थे। बताया जा रहा है कि नाव में करीब 75 यात्री मौजूद थे, जबकि 13 मोटरसाइकिल भी लदी हुई थीं। गंगा नदी के बीच पहुंचते ही नाव के इंजन में तकनीकी खराबी आ गई और नाव अचानक रुक गई। देखते ही देखते नाव धारा के बीच असंतुलित स्थिति में फंस गई, जिससे यात्रियों में चीख-पुकार मच गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार नाव के बीच नदी में बंद होते ही कई यात्री घबरा गए। कुछ लोगों ने अपने परिजनों को फोन कर घटना की जानकारी दी तो कुछ लोग बच्चों को संभालते नजर आए। तेज धारा और नाव के रुक जाने से लोगों को किसी बड़े हादसे का डर सताने लगा था। नाव पर महिलाएं और बुजुर्ग भी मौजूद थे, जिनमें काफी भय का माहौल देखा गया।
घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन हरकत में आया और SDRF की टीम को तुरंत मौके पर भेजा गया। बचाव दल ने तेजी से कार्रवाई करते हुए दूसरी नावों और सुरक्षा उपकरणों की मदद से सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला। रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा कर्मियों ने पहले महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को सुरक्षित किनारे तक पहुंचाया, इसके बाद अन्य यात्रियों और मोटरसाइकिलों को निकाला गया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से गंगा घाटों पर यात्रियों की संख्या अचानक बढ़ गई है। इसका सबसे बड़ा कारण विक्रमशिला सेतु का क्षतिग्रस्त होना माना जा रहा है। पुल के स्लैब टूटने के बाद लोगों का सड़क संपर्क प्रभावित हुआ है और बड़ी संख्या में लोग अब नाव के सहारे नदी पार करने को मजबूर हैं। यही वजह है कि नावों पर क्षमता से अधिक दबाव बढ़ता जा रहा है।
बताया जा रहा है कि तीन दिनों के भीतर यह तीसरी घटना है जब गंगा नदी के बीच नाव खराब हुई है। लगातार सामने आ रही घटनाओं ने यात्रियों की चिंता बढ़ा दी है। लोगों का आरोप है कि कई नावों का संचालन बिना उचित तकनीकी जांच और सुरक्षा मानकों के किया जा रहा है। कुछ नावों की स्थिति काफी खराब है, फिर भी उन्हें यात्रियों से भरकर नदी में उतारा जा रहा है।
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि नावों की नियमित जांच कराई जाए और केवल फिटनेस प्रमाणित नावों को ही संचालन की अनुमति दी जाए। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो भविष्य में बड़ा हादसा हो सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नदी परिवहन में सुरक्षा मानकों का पालन बेहद जरूरी होता है। नावों के इंजन, लाइफ जैकेट, क्षमता सीमा और आपातकालीन उपकरणों की नियमित जांच होनी चाहिए। लेकिन भागलपुर में अचानक बढ़े दबाव के कारण कई बार सुरक्षा नियमों की अनदेखी होने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
घटना के बाद प्रशासन ने भी मामले को गंभीरता से लिया है। सूत्रों के मुताबिक संबंधित अधिकारियों को नावों की तकनीकी स्थिति की जांच करने और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन अब घाटों पर निगरानी बढ़ाने और नाव संचालन को व्यवस्थित करने की तैयारी में जुट गया है।
इधर, SDRF की टीम की त्वरित कार्रवाई की स्थानीय लोगों ने सराहना की है। यदि समय पर रेस्क्यू नहीं होता तो तेज धारा के कारण स्थिति और खतरनाक हो सकती थी। बचाव अभियान में शामिल कर्मियों ने काफी सतर्कता के साथ यात्रियों को बाहर निकाला, जिससे बड़ा हादसा टल गया।
घटना के बाद घाटों पर मौजूद लोगों में भी भय का माहौल देखा गया। कई यात्रियों ने नाव से यात्रा करने को लेकर चिंता जाहिर की। लोगों का कहना है कि मजबूरी में उन्हें नाव का सहारा लेना पड़ रहा है क्योंकि विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने के बाद वैकल्पिक व्यवस्था पर्याप्त नहीं है।
विक्रमशिला सेतु की मरम्मत का कार्य जारी है, लेकिन जब तक पुल पूरी तरह सामान्य नहीं हो जाता, तब तक नदी मार्ग पर दबाव बने रहने की संभावना है। ऐसे में प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती सुरक्षित और व्यवस्थित नाव संचालन सुनिश्चित करने की है।
भागलपुर में लगातार हो रही नाव खराब होने की घटनाओं ने यह साफ कर दिया है कि वर्तमान व्यवस्था पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत है। यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन को अब सख्त कदम उठाने होंगे ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
फिलहाल राहत की बात यही है कि SDRF की तत्परता और स्थानीय प्रशासन की सक्रियता से इस घटना में सभी यात्री सुरक्षित बचा लिए गए। लेकिन लगातार तीसरी बार हुई ऐसी घटना ने यह संकेत जरूर दे दिया है कि गंगा नदी में नाव संचालन को लेकर व्यापक सुधार की आवश्यकता अब बेहद जरूरी हो गई है।


