NEP-2020 के तहत CBSE का बड़ा निर्णय, फरवरी और मई में होंगी दो परीक्षाएं
नई दिल्ली, 25 जून | राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने वर्ष 2026 से कक्षा दसवीं में दो बोर्ड परीक्षाएं आयोजित करने की घोषणा की है। यह फैसला बोर्ड परीक्षाओं के दबाव को कम करने और छात्रों को प्रदर्शन सुधारने के लिए दूसरा अवसर देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
क्या है नई व्यवस्था?
- पहली परीक्षा अनिवार्य होगी और हर छात्र को इसमें सम्मिलित होना अनिवार्य है।
- छात्र चाहें तो तीन विषयों तक मई में आयोजित दूसरी परीक्षा में शामिल होकर अपने अंक सुधार सकते हैं।
- दोनों परीक्षाएं वर्ष के लिए निर्धारित पूर्ण पाठ्यक्रम पर आधारित होंगी।
- पहली परीक्षा का परिणाम अप्रैल में और दूसरी का जून में घोषित किया जाएगा।
- दोनों परीक्षाओं के बाद केवल एक बार पुनर्मूल्यांकन या सत्यापन की सुविधा मिलेगी – दूसरी परीक्षा के बाद।
मुख्य विशेषताएं
- फरवरी: पहली (मुख्य) परीक्षा
- मई: दूसरी (सुधार/कम्पार्टमेंट) परीक्षा
- डिजीलॉकर में मुख्य परीक्षा का परिणाम उपलब्ध, ताकि छात्र XI में अनंतिम प्रवेश ले सकें
- योग्यता प्रमाणपत्र केवल द्वितीय परीक्षा के बाद ही जारी होगा
- आंतरिक मूल्यांकन केवल एक बार – मुख्य परीक्षा से पहले
- सभी विषयों में पाठ्यक्रम समान रहेगा, कोई विषय परिवर्तन द्वितीय परीक्षा में नहीं होगा
विशेष प्रावधान
- खिलाड़ी छात्रों को खेल कार्यक्रम से टकराते विषयों में दूसरी परीक्षा का अवसर मिलेगा
- हिमालयी राज्यों के विंटर-बाउंड स्कूलों को पहली या दूसरी परीक्षा में बैठने का विकल्प
- CWSN (दिव्यांग) छात्रों को विशेष सुविधाएं दोनों परीक्षाओं में उपलब्ध रहेंगी
प्रवेश और पात्रता के नियम
- पहली परीक्षा में केवल पात्र छात्र ही बैठ सकेंगे: नए नाम नहीं जुड़ेंगे
- यदि कोई छात्र पहली परीक्षा में तीन या अधिक विषयों में अनुपस्थित रहा, तो वह दूसरी परीक्षा में नहीं बैठ सकेगा और उसे “अनिवार्य पुनरावृत्ति” की श्रेणी में रखा जाएगा
- द्वितीय परीक्षा में केवल वही छात्र बैठ सकेंगे जो:
- सुधार के इच्छुक हों (3 विषयों तक)
- कम्पार्टमेंट में हों
- पिछले वर्ष की अनिवार्य पुनरावृत्ति श्रेणी से हों
शिक्षा नीति से जुड़ाव
यह निर्णय NEP-2020 की अनुशंसा के अनुसार लिया गया है, जिसमें परीक्षाओं को कम तनावपूर्ण, अधिक लचीला और छात्र-केंद्रित बनाने की बात कही गई थी। बोर्ड परीक्षाओं के “हाई स्टेक्स” स्वरूप को आसान बनाकर कोचिंग संस्कृति पर भी अंकुश लगाने का प्रयास किया जा रहा है।


