
भागलपुर। 08 अप्रैल 2026 : बिहार के सिल्क सिटी भागलपुर के लिए आज का दिन प्रशासनिक दृष्टिकोण से काफी अहम रहा। लंबे समय से शहर की सबसे बड़ी समस्या बन चुके ‘ट्रैफिक जाम’ के समाधान की उम्मीद अब जगी है। नवनियुक्त यातायात डीआईजी सुशांत कुमार सरोज अपनी नई जिम्मेदारी संभालने के बाद पहली बार भागलपुर पहुंचे। शहर में कदम रखते ही उनका स्वागत औपचारिक पुलिसिया गरिमा के साथ ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ देकर किया गया। इसके तुरंत बाद, वे सीधे एक्शन मोड में नजर आए और कंट्रोल एंड कमांड सेंटर के सभागार में एक उच्च स्तरीय मैराथन बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक का एकमात्र एजेंडा भागलपुर, नवगछिया और बांका के त्रिकोणीय क्षेत्र में सुचारू यातायात व्यवस्था सुनिश्चित करना और विक्रमशिला सेतु पर लगने वाले अंतहीन जाम की जंजीरों को तोड़ना था।
पहली आमद और रणनीतिक संवाद
सुशांत कुमार सरोज, जो पहले भी भागलपुर में विभिन्न पदों पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं, शहर की भौगोलिक और प्रशासनिक चुनौतियों से भली-भांति परिचित हैं। यातायात डीआईजी के रूप में उनकी पहली प्राथमिकता भागलपुर के उस ‘ट्रैफिक ड्रेनेज’ को दुरुस्त करना है जो वर्षों से शहर के विकास की गति को थामे हुए है। कंट्रोल एंड कमांड सेंटर में आयोजित इस बैठक में भागलपुर के एसएसपी, सिटी एसपी, विभिन्न क्षेत्रों के डीएसपी के साथ-साथ नवगछिया के एसपी और बांका के डीएसपी ने शिरकत की।
अधिकारियों के इस जमावड़े ने यह साफ कर दिया कि अब यातायात प्रबंधन को केवल एक स्थानीय समस्या के रूप में नहीं, बल्कि एक अंतर-जिला समन्वय (Inter-district coordination) के रूप में देखा जा रहा है। बैठक के दौरान डीआईजी ने स्पष्ट किया कि अब पुराने ढर्रे पर काम नहीं चलेगा; आधुनिक तकनीक और सख्त प्रशासनिक नियंत्रण का मेल ही सड़कों पर बदलाव ला सकता है।
विक्रमशिला सेतु: भारी वाहनों का दबाव और ‘वन-वे’ का मंथन
भागलपुर की यातायात व्यवस्था की सबसे कमजोर कड़ी ‘विक्रमशिला सेतु’ है। गंगा पर बने इस पुल पर हर दिन हजारों भारी वाहनों का दबाव रहता है, जो न केवल भागलपुर बल्कि सीमांचल और कोसी क्षेत्र की लाइफलाइन है। डीआईजी ने बैठक में भारी वाहनों के परिचालन समय (Timing) पर विस्तार से चर्चा की। अक्सर देखा जाता है कि ‘नो एंट्री’ खुलने के बाद एक साथ सैकड़ों ट्रक शहर में प्रवेश करते हैं, जिससे पूरा शहर बंधक बन जाता है।
बैठक में इस बात पर मंथन हुआ कि क्या विक्रमशिला सेतु पर पीक ऑवर्स के दौरान भारी वाहनों के लिए कोई वैकल्पिक रूट या विशेष ‘स्लॉट’ तय किया जा सकता है। इसके अलावा, नवगछिया की ओर से आने वाले ट्रैफिक और जीरो माइल पर लगने वाले दबाव को कम करने के लिए बांका और नवगछिया पुलिस के साथ ‘रियल टाइम’ तालमेल बिठाने पर जोर दिया गया। डीआईजी ने निर्देश दिया कि पुल पर खराब होने वाले वाहनों को हटाने के लिए क्रेन की व्यवस्था चौबीसों घंटे चुस्त रहनी चाहिए ताकि छोटी सी खराबी महाजाम का कारण न बने।
शहर की गलियां और अतिक्रमण पर कड़ा रुख
डीआईजी सुशांत कुमार सरोज ने केवल मुख्य सड़कों ही नहीं, बल्कि शहर के आंतरिक हिस्सों जैसे खलीफाबाग चौक, स्टेशन रोड, वेराइटी चौक और कचहरी चौक की स्थिति का भी जायजा लिया। बैठक में इस बात पर चिंता जताई गई कि सड़कों के किनारे अवैध अतिक्रमण और ई-रिक्शा की बेलगाम संख्या ने पैदल चलने वालों के लिए भी रास्ता नहीं छोड़ा है।
अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि ‘स्मार्ट सिटी’ प्रोजेक्ट के तहत लगाए गए सीसीटीवी कैमरों का उपयोग केवल चालान काटने के लिए नहीं, बल्कि जाम के हॉटस्पॉट की पहचान करने और वहां तुरंत पुलिस बल भेजने के लिए किया जाए। कंट्रोल एंड कमांड सेंटर को अब और अधिक सक्रिय किया जाएगा ताकि ट्रैफिक सिग्नल का प्रबंधन डेटा और वास्तविक स्थिति के आधार पर हो सके, न कि केवल टाइमर के भरोसे।
आधुनिक तकनीक और ‘इंटर-डिस्ट्रिक्ट’ तालमेल
यह पहली बार है जब भागलपुर की ट्रैफिक समस्या को सुलझाने के लिए पड़ोसी जिलों जैसे बांका और नवगछिया के पुलिस अधिकारियों को एक साथ बिठाकर जवाबदेही तय की गई है। भागलपुर का जाम अक्सर तब बढ़ता है जब झारखंड की ओर से आने वाले ट्रकों या पूर्णिया की ओर से आने वाली बसों का प्रवाह अनियंत्रित हो जाता है।
डीआईजी ने सुझाव दिया कि एक ‘ट्रैफिक वायरलेस ग्रिड’ तैयार किया जाए जिससे बांका और नवगछिया पुलिस भागलपुर पुलिस को पहले ही सूचित कर सके कि कितना ट्रैफिक लोड उनकी ओर बढ़ रहा है। इससे भागलपुर के प्रवेश द्वारों (जैसे जीरो माइल और हबीबपुर) पर पुलिस को पहले से तैयारी करने का मौका मिलेगा। अधिकारियों को यह भी कहा गया कि वे नियमित रूप से सड़कों पर उतरें और केवल ऑफिस से ही नहीं, बल्कि ग्राउंड जीरो से रिपोर्ट तैयार करें।
निष्कर्ष: बदलाव की सुगबुगाहट
यातायात डीआईजी के इस दौरे ने भागलपुर पुलिस महकमे में एक नई हलचल पैदा कर दी है। सुशांत कुमार सरोज का सख्त लहजा और समस्याओं की गहरी समझ यह उम्मीद जगाती है कि आने वाले दिनों में सिल्क सिटी के लोगों को सड़कों पर कम से कम पसीना बहाना पड़ेगा। हालांकि, चुनौती बड़ी है—बढ़ती गाड़ियां, संकरी सड़कें और प्रशासनिक सुस्ती। लेकिन अगर आज की बैठक में लिए गए निर्णयों का 50 प्रतिशत भी धरातल पर उतरता है, तो भागलपुर की सड़कों के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं होगा।
शहर की जनता अब उस दिन का इंतजार कर रही है जब ‘विक्रमशिला सेतु’ पर बिताए जाने वाले घंटों के बजाय सफर मिनटों में पूरा होगा। प्रशासन के इस नए ‘स्मार्ट’ दृष्टिकोण की असली परीक्षा आने वाले दिनों में सड़कों पर दिखाई देगी।


