नवगछिया के विजय घाट पर आधी रात को ‘प्रशासनिक सर्जिकल स्ट्राइक’: बालू माफियाओं में भगदड़, पोकलेन और ट्रैक्टर जब्त

नवगछिया (भागलपुर)। 08 अप्रैल 2026: भागलपुर जिले के नवगछिया अनुमंडल में ‘सफेद सोने’ यानी बालू के अवैध कारोबार के खिलाफ प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी और प्रभावी कार्रवाई को अंजाम दिया है। मंगलवार की देर रात जब पूरी दुनिया सो रही थी, तब नवगछिया के विजय घाट पर मशीनों की गड़गड़ाहट और पुलिस के सायरन ने अवैध खनन माफियाओं के साम्राज्य को हिला कर रख दिया। एसडीएम रोहित कर्दम के नेतृत्व में खनन विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने विजय घाट पर अचानक धावा बोल दिया। इस छापामारी ने न केवल अवैध खनन की कमर तोड़ दी है, बल्कि गंगा के तटीय इलाकों में सक्रिय रसूखदार माफियाओं को कड़ा संदेश भी दिया है। इस कार्रवाई में भारी मात्रा में मशीनें और वाहन जब्त किए गए हैं, जबकि एक ट्रैक्टर चालक को पुलिस ने घेराबंदी कर गिरफ्तार करने में सफलता पाई है।

​गुप्त सूचना और ऑपरेशन का ब्लूप्रिंट: कैसे बिछाया गया जाल

​विजय घाट और उसके आसपास के इलाकों में पिछले कई दिनों से बड़े पैमाने पर अवैध बालू खनन की शिकायतें प्रशासन को मिल रही थीं। माफियाओं ने रात के अंधेरे का फायदा उठाते हुए गंगा की गोद से बालू निकालने के लिए आधुनिक मशीनों का बेखौफ इस्तेमाल करना शुरू कर दिया था। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा आम थी कि सूर्यास्त के बाद विजय घाट पर एक ‘समानांतर सत्ता’ चलती है, जहाँ भारी वाहनों का आना-जाना लगा रहता था।

​इन सूचनाओं की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम रोहित कर्दम ने एक गुप्त योजना तैयार की। प्रशासन को पता था कि माफियाओं का तंत्र काफी मजबूत है और छापेमारी की भनक लगते ही वे मौके से फरार हो जाते हैं। इसलिए, इस बार पुलिस और खनन विभाग के चुनिंदा अधिकारियों को लेकर एक संयुक्त टास्क फोर्स बनाई गई। टीम को निर्देश दिए गए कि वे अपने निजी वाहनों या बिना सायरन वाली गाड़ियों का इस्तेमाल करें ताकि मौके तक पहुँचने से पहले किसी को भनक न लगे।

​आधी रात का सस्पेंस: विजय घाट पर प्रशासनिक धमक

​जब प्रशासनिक टीम देर रात विजय घाट की रेतीली जमीन पर पहुँची, तो वहां का नजारा चौंकाने वाला था। गंगा के किनारे पोकलेन मशीनें बालू खोद रही थीं और ट्रैक्टरों की कतारें लगी हुई थीं। दर्जनों मजदूर और माफियाओं के गुर्गे वहां मुस्तैद थे। जैसे ही प्रशासनिक अधिकारियों की गाड़ियाँ घाट की ओर मुड़ीं और टॉर्च की रोशनी माफियाओं पर पड़ी, वहां अफरा-तफरी मच गई।

  • भगदड़ का मंजर: टीम को देखते ही खनन माफियाओं में हड़कंप मच गया। जो जहाँ था, वहीं से भागने लगा। कोई ट्रैक्टर लेकर पानी की ओर भागा, तो कोई ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर अपनी मोटरसाइकिलें छोड़कर पैदल ही अंधेरे का फायदा उठाकर झाड़ियों में छिप गया।
  • पकड़ा गया ड्राइवर: भागने की कोशिश कर रहे एक ट्रैक्टर चालक को पुलिस के जवानों ने तत्परता दिखाते हुए दबोच लिया। उससे शुरुआती पूछताछ की जा रही है ताकि गिरोह के मुख्य सरगनाओं तक पहुँचा जा सके।
  • माफियाओं की लापरवाही: पकड़े जाने के डर से कई माफिया अपनी महंगी मोटरसाइकिलें और मोबाइल फोन तक मौके पर ही छोड़ गए, जिन्हें पुलिस ने जब्त कर लिया है।

​भारी बरामदगी: करोड़ों की मशीनों पर प्रशासन का कब्जा

​एसडीएम रोहित कर्दम ने बताया कि इस छापेमारी का मुख्य उद्देश्य बालू माफियाओं के रसद और संसाधनों को चोट पहुँचाना था। विजय घाट से जो बरामदगी हुई है, वह माफियाओं के दुस्साहस और उनके नेटवर्क की व्यापकता को दर्शाती है।

  1. पोकलेन मशीन: मौके से एक विशाल पोकलेन मशीन जब्त की गई है। इस मशीन का इस्तेमाल बालू के गहरे गड्ढे खोदने के लिए किया जा रहा था। इसकी जब्ती माफियाओं के लिए सबसे बड़ा आर्थिक झटका है।
  2. चार ट्रैक्टर: बालू की ढुलाई में लगे चार ट्रैक्टरों को पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया है। इनमें से कुछ ट्रैक्टरों पर अवैध बालू पहले से ही लदा हुआ था।
  3. मोटरसाइकिलें: घाट पर निगरानी और रेकी के लिए इस्तेमाल की जाने वाली लगभग आधा दर्जन (6) मोटरसाइकिलें भी बरामद की गई हैं। इनके नंबर प्लेट्स के जरिए मालिकों की पहचान की जा रही है।

​एसडीएम रोहित कर्दम का कड़ा रुख: “बख्शे नहीं जाएंगे बालू चोर”

​छापेमारी के बाद मौके पर मीडिया से बात करते हुए नवगछिया एसडीएम रोहित कर्दम ने स्पष्ट कर दिया कि प्रशासन अब ‘वेट एंड वॉच’ (ठहरो और देखो) की मुद्रा में नहीं है। उन्होंने कहा कि विजय घाट पर अवैध खनन की लगातार शिकायतें मिल रही थीं, जो न केवल राजस्व की चोरी है, बल्कि पर्यावरण और गंगा के अस्तित्व के लिए भी खतरा है।

​एसडीएम ने कहा:

​”हमारी टीम ने एक सुनियोजित तरीके से इस कार्रवाई को अंजाम दिया है। माफियाओं ने भागने की कोशिश की, लेकिन हमने उनके मुख्य संसाधनों को जब्त कर लिया है। गिरफ्तार चालक से पूछताछ के बाद इस धंधे में शामिल बड़े नामों का खुलासा होगा। यह अभियान केवल विजय घाट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अनुमंडल के हर उस क्षेत्र में चलेगा जहाँ अवैध खनन की सुगबुगाहट है।”

 

​राजस्व और पर्यावरण का संकट: माफियाओं की ‘अंधेरगर्दी’

​नवगछिया और आसपास के क्षेत्रों में अवैध बालू खनन एक गंभीर समस्या बन चुका है। माफिया न केवल सरकारी खजाने को करोड़ों का चूना लगा रहे हैं, बल्कि अंधाधुंध खनन से गंगा की धाराओं का मार्ग भी प्रभावित हो रहा है। विजय घाट जैसे क्षेत्रों में गहराई तक खुदाई करने से तटबंधों के कमजोर होने का खतरा बढ़ गया है, जो मानसून के समय बाढ़ की विभीषिका को और अधिक खतरनाक बना सकता है।

​प्रशासन की इस कार्रवाई से उन स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली है जो रात भर ट्रकों और ट्रैक्टरों के शोर से परेशान रहते थे। हालांकि, जानकारों का कहना है कि जब तक इन माफियाओं के राजनीतिक और प्रशासनिक ‘संरक्षण’ को नहीं तोड़ा जाता, तब तक इस तरह की छापेमारी केवल कुछ दिनों की राहत ही देगी।

​निष्कर्ष: कार्रवाई के बाद अब कानूनी शिकंजा

​जब्त किए गए ट्रैक्टरों और पोकलेन मशीन को पुलिस थाने ले जाया गया है। खनन विभाग के अधिकारी अब इन वाहनों के मालिकों पर भारी जुर्माना लगाने और प्राथमिकी दर्ज करने की तैयारी में हैं। पुलिस गिरफ्तार चालक के मोबाइल कॉल रिकॉर्ड्स को भी खंगाल रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस अवैध कारोबार के तार किन-किन सफेदपोशों से जुड़े हैं।

​विजय घाट पर हुई इस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि नवगछिया प्रशासन अब अवैध बालू खनन के खिलाफ आर-पार की लड़ाई के मूड में है। रोहित कर्दम की अगुवाई में हुई इस ‘मिडनाइट छापेमारी’ की चर्चा अब पूरे जिले में हो रही है। अब देखना यह है कि क्या प्रशासन इस दबिश को बरकरार रख पाता है या माफिया दोबारा सिर उठाने की कोशिश करेंगे।

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