
अब केवल बिहार की ऐतिहासिक धरोहरों को संजोने वाला संस्थान नहीं रह गया है, बल्कि यह राष्ट्रीय स्तर पर संग्रहालय विकास का एक प्रभावशाली मॉडल बनकर उभरा है। बिहार संग्रहालय समिति की बढ़ती भूमिका ने राज्य को देशभर में नई पहचान दिलाई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार संग्रहालय समिति आज देश के विभिन्न राज्यों में संग्रहालयों की स्थापना और विकास में महत्वपूर्ण योगदान देकर एक रोल मॉडल के रूप में सामने आ रही है। यह बिहार के लिए गर्व की बात है कि राज्य की विशेषज्ञता अब राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त कर रही है।
पटना में बिहार संग्रहालय परिसर में आयोजित बिहार संग्रहालय समिति की शासी निकाय की बैठक में मुख्यमंत्री ने संग्रहालय की गतिविधियों, उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं की समीक्षा की। बैठक के दौरान अधिकारियों ने संग्रहालय की वर्तमान स्थिति और आगामी परियोजनाओं पर विस्तृत प्रस्तुति दी। इस दौरान यह जानकारी सामने आई कि बिहार संग्रहालय समिति वर्तमान में देश के कई राज्यों में संग्रहालयों के विकास, डिजाइन, तकनीकी सहयोग और परामर्श में सक्रिय भूमिका निभा रही है।
बैठक में बताया गया कि नई दिल्ली, , और सहित देशभर में कुल 9 संग्रहालयों की स्थापना और विकास में बिहार संग्रहालय समिति ने अहम योगदान दिया है। मुख्यमंत्री ने इस उपलब्धि को बिहार संग्रहालय की विशेषज्ञता, क्षमता और राष्ट्रीय प्रतिष्ठा का मजबूत प्रमाण बताया। उन्होंने कहा कि संग्रहालय प्रबंधन, विरासत संरक्षण और आधुनिक प्रस्तुतीकरण के क्षेत्र में बिहार ने जो मानक स्थापित किए हैं, वे अन्य राज्यों के लिए प्रेरणादायक बन रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार संग्रहालय राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और सभ्यतागत विरासत का जीवंत प्रतीक है। यह केवल पुरातात्विक वस्तुओं का प्रदर्शन स्थल नहीं, बल्कि ज्ञान, इतिहास, संस्कृति और विरासत को जीवंत रूप में प्रस्तुत करने वाला एक आधुनिक संस्थान है। उन्होंने कहा कि संग्रहालय बिहार की पहचान और गौरव का केंद्र बन चुका है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि संग्रहालय को विश्वस्तरीय मानकों के अनुरूप लगातार विकसित किया जाए। आधुनिक तकनीक, डिजिटल डिस्प्ले, इंटरैक्टिव गैलरी और बेहतर विज़िटर अनुभव के माध्यम से इसे संस्कृति, शिक्षा और पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनाया जाए। सरकार का लक्ष्य है कि बिहार संग्रहालय राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी एक प्रतिष्ठित सांस्कृतिक केंद्र के रूप में स्थापित हो।
बैठक के दौरान आगंतुकों से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़े भी साझा किए गए। बताया गया कि पिछले वर्ष बिहार संग्रहालय ने 5 लाख से अधिक टिकटधारी आगंतुकों का रिकॉर्ड दर्ज किया। यह उपलब्धि इस बात का संकेत है कि संग्रहालय के प्रति लोगों की रुचि तेजी से बढ़ रही है। बड़ी संख्या में विद्यार्थी, शोधकर्ता, पर्यटक और आम नागरिक यहां पहुंच रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बढ़ती आगंतुक संख्या दर्शाती है कि संग्रहालय अब केवल पर्यटन स्थल नहीं रहा, बल्कि शैक्षणिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का भी प्रमुख केंद्र बन गया है। उन्होंने निर्देश दिया कि आने वाले वर्षों में इस संख्या को और बढ़ाने के लिए विशेष रणनीति बनाई जाए। स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के साथ समन्वय बढ़ाकर छात्रों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
बैठक में आगामी स्थापना दिवस समारोह की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। 7 अगस्त 2026 से 10 अगस्त 2026 तक आयोजित होने वाले स्थापना दिवस समारोह को भव्य और प्रभावशाली बनाने के लिए अधिकारियों को विशेष निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह समारोह बिहार की सांस्कृतिक शक्ति और ऐतिहासिक विरासत को बड़े स्तर पर प्रदर्शित करने का महत्वपूर्ण अवसर होगा।
उन्होंने कहा कि स्थापना दिवस कार्यक्रम के दौरान बिहार की विकास यात्रा, ऐतिहासिक उपलब्धियों और सांस्कृतिक विरासत को आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया जाए। इसके लिए विशेष प्रदर्शनी, सांस्कृतिक आयोजन, विरासत व्याख्यान और इंटरैक्टिव कार्यक्रम आयोजित करने पर बल दिया गया।
बैठक में संग्रहालय की द्विवार्षिक गतिविधियों और कार्यक्रमों में बिहार की लोककला, लोकसंस्कृति और लोक परंपराओं को प्रमुख स्थान देने पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार की सांस्कृतिक पहचान उसकी लोक परंपराओं में गहराई से जुड़ी हुई है। इन परंपराओं का संरक्षण और प्रचार-प्रसार आने वाली पीढ़ियों के लिए अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने विशेष रूप से बिहार की पारंपरिक कलाओं जैसे मधुबनी कला, मंजूषा कला, लोक संगीत, लोक नृत्य और शिल्प पर आधारित कार्यक्रमों को संग्रहालय गतिविधियों से जोड़ने की बात कही। इससे स्थानीय कलाकारों को मंच मिलेगा और सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान भी मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने संग्रहालय को पर्यटन, कौशल विकास और रोजगार सृजन से जोड़ने पर भी जोर दिया। बैठक में टूर गाइड, डिजाइन और लोक कलाओं से जुड़े डिप्लोमा पाठ्यक्रम शुरू करने की योजना पर सकारात्मक चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे पाठ्यक्रम युवाओं के लिए रोजगारोन्मुख अवसर तैयार करेंगे और साथ ही सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण में भी योगदान देंगे।
उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित टूर गाइड बिहार आने वाले पर्यटकों को बेहतर अनुभव प्रदान कर सकते हैं। इसी तरह डिजाइन और लोक कला आधारित पाठ्यक्रम स्थानीय प्रतिभाओं को व्यावसायिक अवसर देंगे। इससे संस्कृति और रोजगार दोनों क्षेत्रों को लाभ मिलेगा।
बैठक में विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और पर्यटकों के लिए संग्रहालय को अधिक उपयोगी बनाने की रणनीति पर भी विचार किया गया। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि शोध सुविधाओं, संदर्भ सामग्री और डिजिटल अभिलेखों को मजबूत किया जाए, ताकि संग्रहालय शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में भी बड़ी भूमिका निभा सके।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि बिहार की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक पहचान दिलाने के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार की जाए। इसके तहत डिजिटल विस्तार, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रमों को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई गई।
कुल मिलाकर, बिहार संग्रहालय समिति की यह प्रगति बिहार की सांस्कृतिक शक्ति का मजबूत उदाहरण बनकर सामने आई है। देशभर में 9 संग्रहालयों के विकास में योगदान, 5 लाख से अधिक आगंतुकों का रिकॉर्ड, स्थापना दिवस की भव्य तैयारी और रोजगारोन्मुख योजनाएं यह दर्शाती हैं कि बिहार संग्रहालय आने वाले समय में भारत के सबसे प्रभावशाली सांस्कृतिक संस्थानों में अपनी जगह और मजबूत कर सकता है। यह पहल न केवल बिहार की विरासत को सुरक्षित रखेगी, बल्कि शिक्षा, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगी।


