सुल्तानगंज के महेशी चौक पर ‘रफ्तार का कहर’: अनियंत्रित कार ने तीन स्कूली बच्चों को रौंदा, मायागंज अस्पताल रेफर, परिजनों में मची चीख-पुकार

सुल्तानगंज (भागलपुर)। 08 अप्रैल 2026: भागलपुर जिले के सुल्तानगंज विधानसभा अंतर्गत महेशी चौक बाजार के पास बुधवार की सुबह उस वक्त मातम छा गया, जब एक तेज रफ्तार लग्जरी कार ने स्कूल जा रहे तीन मासूम बच्चों को अपनी चपेट में ले लिया। मारुति कंपनी की सफेद रंग की ‘एक्सएल सिक्स’ (XL6) गाड़ी इतनी तेज गति में थी कि चालक का उस पर से नियंत्रण पूरी तरह खत्म हो गया और उसने सड़क किनारे चल रहे विद्यार्थियों को बुरी तरह रौंद दिया। इस हृदयविदारक हादसे के बाद स्थानीय बाजार में भगदड़ मच गई। घटना में घायल तीनों स्कूली बच्चों की स्थिति बेहद नाजुक बताई जा रही है, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए भागलपुर के मायागंज अस्पताल (JLNMCH) रेफर किया गया है।

​प्रत्यक्षदर्शियों की आपबीती: ‘हवा से बातें कर रही थी गाड़ी’

​घटनास्थल पर मौजूद स्थानीय ग्रामीणों और दुकानदारों के अनुसार, हादसा सुबह उस वक्त हुआ जब बच्चे अपनी पढ़ाई के लिए स्कूल की ओर निकले थे। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि महेशी चौक की ओर से आ रही एक्सएल सिक्स गाड़ी की रफ्तार सामान्य से कहीं अधिक थी। बाजार क्षेत्र होने के बावजूद चालक ने गति कम नहीं की। अचानक गाड़ी लहराई और सीधे बच्चों से जा टकराई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बच्चे कई फीट हवा में उछलकर सड़क के दूसरी ओर जा गिरे।

​टक्कर मारने के बाद चालक ने गाड़ी रोकने के बजाय उसे भगाने की कोशिश की, लेकिन चौक पर मौजूद जागरूक लोगों ने दौड़कर गाड़ी को घेर लिया। भीड़ को अपनी ओर आता देख और पुलिस की कार्रवाई के डर से चालक गाड़ी छोड़कर मौके से फरार होने में सफल रहा। स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर काफी आक्रोश है कि बाजार जैसे भीड़भाड़ वाले इलाके में इतनी लापरवाही से गाड़ी कैसे चलाई जा रही थी।

​घायलों की पहचान और स्वास्थ्य की स्थिति

​अस्पताल प्रभारी कुंदन पटेल से मिली जानकारी के अनुसार, इस दर्दनाक हादसे में घायल तीनों बच्चे महेशी गांव के ही रहने वाले हैं। उनके नाम और विवरण इस प्रकार हैं:

  1. अंश कुमार (12 वर्ष): पिता मदन पासवान।
  2. करुणा कुमारी (16 वर्ष): पिता मिथलेश साह।
  3. दिव्यांशु कुमार (15 वर्ष): पिता रंजित कुमार।

​हादसे के तुरंत बाद ग्रामीण और पुलिसकर्मियों ने मिलकर बच्चों को सुल्तानगंज रेफरल अस्पताल पहुँचाया। अस्पताल प्रभारी कुंदन पटेल ने बताया कि बच्चों को सिर, पैर और आंतरिक हिस्सों में गंभीर चोटें आई हैं। प्रचुर मात्रा में रक्तस्राव होने और स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों ने उन्हें प्राथमिक उपचार (First Aid) देने के बाद तुरंत एम्बुलेंस के जरिए मायागंज अस्पताल भेजने का निर्णय लिया। मायागंज में बच्चों का इलाज विशेषज्ञों की निगरानी में शुरू कर दिया गया है, लेकिन वे अभी भी खतरे से बाहर नहीं बताए जा रहे हैं।

​प्रशासनिक सक्रियता: प्रशिक्षु एएसपी और इंस्पेक्टर ने संभाली कमान

​घटना की सूचना मिलते ही पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशिक्षु एएसपी (ASP) सायम रजा और इंस्पेक्टर मृत्युंजय कुमार भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँचे। पुलिस अधिकारियों ने सबसे पहले उग्र भीड़ को शांत कराया और यातायात व्यवस्था को सुचारू किया। एएसपी सायम रजा ने स्वयं रेफरल अस्पताल पहुँचकर बच्चों के इलाज की जानकारी ली और उनके परिजनों को ढांढस बंधाया।

​पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त एक्सएल सिक्स कार को अपने कब्जे में ले लिया है। गाड़ी के रजिस्ट्रेशन नंबर के आधार पर मालिक का पता लगाया जा रहा है। इंस्पेक्टर मृत्युंजय कुमार ने बताया कि चालक की पहचान करने के लिए आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं और छापेमारी दल को फरार ड्राइवर की गिरफ्तारी के लिए लगाया गया है। पुलिस ने परिजनों को आश्वासन दिया है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और हिट-एंड-रन (Hit and Run) के नए कड़े कानूनों के तहत मामला दर्ज किया जाएगा।

​परिजनों का करुण क्रंदन और गांव में सन्नाटा

​महेशी गांव में जैसे ही इस हादसे की खबर पहुँची, वहां मातम पसर गया। मदन पासवान, मिथलेश साह और रंजित कुमार के घरों में चीख-पुकार मची हुई है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव की महिलाओं और पड़ोसियों ने बताया कि ये बच्चे काफी होनहार थे और हर रोज इसी रास्ते से स्कूल जाते थे। किसी ने सोचा भी नहीं था कि एक तेज रफ्तार गाड़ी उनके बच्चों के भविष्य पर इस तरह ‘ब्रेक’ लगा देगी।

​अस्पताल परिसर में मौजूद बच्चों की माताएं बार-बार बेहोश हो रही थीं। वहां मौजूद ग्रामीण भी नम आंखों से बच्चों के जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना कर रहे हैं। परिजनों का कहना है कि उन्हें मुआवजे से ज्यादा अपने बच्चों की सलामती और उस लापरवाह ड्राइवर की गिरफ्तारी चाहिए जिसने उनके मासूमों की जान जोखिम में डाली है।

​सड़क सुरक्षा पर उठे सवाल: बाजार क्षेत्रों में गति सीमा की अनदेखी

​सुल्तानगंज का महेशी चौक एक व्यस्त बाजार क्षेत्र है, जहाँ हमेशा लोगों की आवाजाही बनी रहती है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस मार्ग पर भारी वाहनों और निजी कारों की रफ्तार अक्सर बेलगाम रहती है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि स्कूल के पास और प्रमुख चौकों पर स्पीड ब्रेकर (Speed Breakers) बनाए जाएं और गति सीमा निर्धारित करने के लिए ‘साइन बोर्ड’ लगाए जाएं।

​अक्सर यह देखा जाता है कि ग्रामीण क्षेत्रों से गुजरने वाले राजमार्गों पर चालक अपनी रफ्तार पर नियंत्रण नहीं रखते, जिससे मासूम स्कूली बच्चे और पैदल यात्री हादसों का शिकार होते हैं। महेशी की यह घटना एक बार फिर सड़क सुरक्षा मानकों की जमीनी हकीकत को बयां कर रही है।

​निष्कर्ष: जवाबदेही तय करने का वक्त

​यह हादसा केवल एक सड़क दुर्घटना नहीं है, बल्कि यह उस मानसिकता का परिणाम है जो दूसरों की जान की परवाह किए बिना सड़क पर गाड़ी को खिलौना समझती है। प्रशिक्षु एएसपी सायम रजा ने कहा है कि मामले की गहनता से जांच की जा रही है। क्या ड्राइवर नशे में था? या फिर वह किसी अन्य कारण से इतनी तेज गाड़ी चला रहा था? इन सभी पहलुओं पर फॉरेंसिक जांच की जाएगी।

​फिलहाल पूरा सुल्तानगंज और महेशी गांव इन तीनों बच्चों के स्वस्थ होने की राह देख रहा है। द वॉइस ऑफ बिहार की टीम भी पाठकों से अपील करती है कि सड़क पर चलते समय सावधानी बरतें और बच्चों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक करें।

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