भागलपुर, 22 जून 2025: तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (TMBU) एक बार फिर विवादों के घेरे में है। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जवाहरलाल पर पेंशन भुगतान में धांधली और भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए सिंडिकेट के सदस्यों ने रविवार को कुलपति आवास के बाहर धरना दिया। इस दौरान जमकर नारेबाज़ी हुई और कुलपति के इस्तीफे की मांग उठी।
क्या हैं आरोप?
धरना दे रहे सदस्यों – निर्लेश कुमार, मोहम्मद मुश्फिक आलम, के.के. मंडल और मुकेश कुमार – का कहना है कि पेंशन का भुगतान बिना रिश्वत दिए नहीं हो रहा है। सदस्यों ने आरोप लगाया कि कुलपति का रवैया पूरी तरह मनमाना हो गया है। “पेंशन पाना अब अधिकार नहीं, सौदेबाज़ी बन गया है,” एक सदस्य ने कहा।
कुलपति आवास को कार्यालय में बदलने पर नाराज़गी
सदस्यों ने यह भी सवाल उठाया कि कुलपति विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन में बैठने के बजाय आवास को ही स्थायी कार्यालय बना चुके हैं। उनका कहना है कि इसी वजह से प्रशासनिक पारदर्शिता खत्म हो गई है और हालिया परीक्षा विभाग में हुई धांधली इसका उदाहरण है।
“दलाली की भूमिका अपना ली है कुलपति ने”
प्रदर्शनकारियों ने आरोपों को और कड़ा करते हुए कहा कि कुलपति अब शैक्षणिक नेतृत्वकर्ता नहीं, बल्कि “दलाल की भूमिका” में नज़र आ रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन ने समय रहते समाधान नहीं किया, तो आंदोलन और उग्र होगा।
प्रशासन की चुप्पी सवालों के घेरे में
मामले ने तब और तूल पकड़ा जब विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। प्रदर्शनकारी इसे ‘चुप्पी में सहमति’ मान रहे हैं।
क्या आगे होगा आंदोलन?
धरना स्थल पर मौजूद सदस्यों ने कहा कि यह किसी व्यक्ति विशेष की नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय के दर्जनों सेवानिवृत्त कर्मचारियों की लड़ाई है। यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह आंदोलन अगले कुछ दिनों में प्रशासनिक ठहराव की स्थिति तक पहुंच सकता है।


