
पटना। बिहार की राजधानी पटना के 1 अणे मार्ग स्थित ‘संकल्प सभागार’ में शनिवार, 4 अप्रैल 2026 को एक महत्वपूर्ण रणनीतिक और कूटनीतिक संवाद का आयोजन हुआ। यह मौका था वर्ष 2024 बैच के बिहार कैडर के भारतीय वन सेवा (IFS) के चार नवनियुक्त प्रशिक्षु अधिकारियों की मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से औपचारिक मुलाकात का। यह केवल एक शिष्टाचार भेंट नहीं थी, बल्कि बिहार के पारिस्थितिकीय भविष्य (Ecological Future) को लेकर एक व्यापक विमर्श था। हिमांशु द्विवेदी, प्रिंस कुमार सिंह, रविन्दर कुमार वर्मा और योगेश बोरकर—इन चार युवा कंधों पर अब बिहार के जंगलों को बचाने, हरित आवरण को विस्तार देने और गिरते भू-जल स्तर को थामने की बड़ी जिम्मेदारी है। नीतीश कुमार ने इन अधिकारियों को न केवल उनके भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं, बल्कि बिहार के पर्यावरण की उन जमीनी हकीकतों से भी रूबरू कराया जो आने वाले दशकों में राज्य की नियति तय करेंगी।
हरित आवरण का ‘बिहार मॉडल’: 9 प्रतिशत से 17 प्रतिशत तक की छलांग
संवाद के दौरान नीतीश कुमार ने बिहार के पर्यावरण इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय खोला। उन्होंने बताया कि जब बिहार और झारखंड का बंटवारा हुआ था, तब शेष बिहार के पास वन क्षेत्र और हरित आवरण के नाम पर बहुत कम हिस्सा बचा था। एक समय ऐसा था जब राज्य का हरित आवरण मात्र 9 प्रतिशत तक सिमट गया था। यह किसी भी मैदानी राज्य के लिए एक बड़ी चुनौती थी।
नीतीश कुमार ने प्रशिक्षु अधिकारियों को बताया कि राज्य सरकार ने पिछले दो दशकों में विभिन्न योजनाओं, विशेषकर ‘जल-जीवन-हरियाली’ अभियान के माध्यम से सघन पौधारोपण और वन संरक्षण की दिशा में काम किया। इसका परिणाम यह हुआ कि आज बिहार का हरित आवरण बढ़कर 17 प्रतिशत तक पहुँच चुका है। यह 8 प्रतिशत की वृद्धि केवल सरकारी आंकड़ा नहीं है, बल्कि बिहार के बदलते भूगोल की गवाही है। उन्होंने हिमांशु द्विवेदी, प्रिंस कुमार सिंह, रविन्दर कुमार वर्मा और योगेश बोरकर से आह्वान किया कि वे इस 17 प्रतिशत के आंकड़े को आगे ले जाने में अपनी तकनीकी विशेषज्ञता और ऊर्जा का उपयोग करें।
कम वर्षा और गिरता भू-जल स्तर: एक अलार्मिंग सिग्नल
बैठक में नीतीश कुमार ने एक बेहद गंभीर मुद्दे की ओर इशारा किया, जो बिहार के कृषि और जीवन दोनों को प्रभावित कर रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले कई वर्षों से बिहार में वर्षापात (Rainfall) के पैटर्न में बड़ा बदलाव आया है। औसत वर्षा में कमी दर्ज की गई है, जिसका सीधा असर राज्य के भू-जल स्तर (Groundwater Level) पर पड़ रहा है।
उन्होंने प्रशिक्षु अधिकारियों को निर्देशित किया कि भारतीय वन सेवा के अधिकारी होने के नाते उनकी जिम्मेदारी केवल पेड़ों की गिनती करना नहीं है, बल्कि वन क्षेत्रों में जल संचयन (Water Harvesting) के मॉडल तैयार करना भी है। यदि जंगलों और पहाड़ी क्षेत्रों में पानी को रोकने के इंतजाम पुख्ता होंगे, तभी मैदानी इलाकों में ग्राउंड वाटर लेवल संतुलित रह सकेगा। नीतीश कुमार ने स्पष्ट किया कि ‘हरियाली’ और ‘जल’ एक-दूसरे के पूरक हैं; बिना जल के वन नहीं बचेंगे और बिना वनों के वर्षा नहीं होगी।
शहरी प्रदूषण और जन-जागरूकता: आधुनिक वन सेवा की भूमिका (विशेष विश्लेषण)
द वॉयस ऑफ बिहार के विशेष विश्लेषण के अनुसार, नीतीश कुमार ने इस मुलाकात में ‘शहरी वानिकी’ (Urban Forestry) पर भी विशेष जोर दिया है। पटना समेत बिहार के बड़े शहरों में बढ़ता वायु प्रदूषण एक बड़ी समस्या बन चुका है।
- प्रदूषण पर प्रहार: शहरों के भीतर और उनके आसपास ‘ग्रीन बेल्ट’ विकसित करना अब वन अधिकारियों की प्राथमिकता होनी चाहिए। शहरी प्रदूषण को कम करने के लिए केवल पेड़ों का होना काफी नहीं है, बल्कि लोगों में पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता पैदा करना भी जरूरी है।
- संवेदनशीलता और अनुशासन: नीतीश कुमार ने प्रशिक्षु अधिकारियों को ‘पूर्ण मनोयोग’ से काम करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि एक वन अधिकारी का काम संवेदनशील होना चाहिए क्योंकि वह बेजुबान पेड़ों और वन्यजीवों का रक्षक होता है। ईमानदारी और अनुशासन ही इस सेवा की असली पहचान है।
- युवा जोश और अनुभव का संगम: हिमांशु द्विवेदी, प्रिंस कुमार सिंह, रविन्दर कुमार वर्मा और योगेश बोरकर जैसे युवा अधिकारियों के पास आधुनिक तकनीक और नए विचार हैं, जिन्हें बिहार के पारंपरिक वन प्रबंधन के साथ जोड़कर बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।
प्रशासनिक जमावड़ा: वन और पर्यावरण विभाग की मुस्तैदी
इस उच्चस्तरीय मुलाकात के दौरान बिहार सरकार के कई दिग्गज अधिकारी और मंत्री भी मौजूद रहे। जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी की उपस्थिति यह दर्शाती है कि सरकार पर्यावरण और जल प्रबंधन को एक ही चश्मे से देख रही है। मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव आनंद किशोर और मुख्यमंत्री के सचिव अनुपम कुमार ने भी प्रशिक्षु अधिकारियों के प्रशिक्षण और उनकी आगामी पोस्टिंग के संदर्भ में चर्चा की।
अपर मुख्य सचिव आनंद किशोर ने बताया कि इन अधिकारियों को बिहार के विविध भौगोलिक क्षेत्रों—जैसे कैमूर के जंगल, वाल्मीकि नगर टाइगर रिजर्व और गया के पहाड़ी इलाकों की बारीकियों से अवगत कराया जा रहा है। मुख्यमंत्री के सचिव कुमार रवि, विशेष कार्य पदाधिकारी गोपाल सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव चन्द्रशेखर सिंह और प्रधान मुख्य वन संरक्षक प्रभात कुमार गुप्ता की मौजूदगी ने इस बैठक को एक पूर्ण प्रशासनिक विमर्श का रूप दे दिया।
बिहार के हरित भविष्य की नई खेप
नीतीश कुमार और 2024 बैच के इन चार अधिकारियों की मुलाकात ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बिहार सरकार अब पर्यावरण को केवल एक ‘सजावटी’ विभाग नहीं, बल्कि राज्य के विकास की मुख्यधारा मानती है। हरित आवरण को 17 प्रतिशत से ऊपर ले जाना एक बड़ी चुनौती है, विशेषकर बढ़ती आबादी और शहरीकरण के दबाव के बीच।
4 अप्रैल 2026 की यह दोपहर हिमांशु द्विवेदी, प्रिंस कुमार सिंह, रविन्दर कुमार वर्मा और योगेश बोरकर के लिए उनके करियर की सबसे महत्वपूर्ण सीख लेकर आई है। नीतीश कुमार ने उन्हें याद दिलाया कि राज्य और देश की तरक्की में वन सेवा का योगदान अब पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। आने वाले समय में जब ये अधिकारी विभिन्न जिलों में तैनात होंगे, तब उनकी ‘संवेदनशीलता और ईमानदारी’ की असली परीक्षा होगी। बिहार की जनता अब इन युवा चेहरों से एक ऐसी ‘हरित क्रांति’ की उम्मीद कर रही है जो न केवल तापमान को कम करे, बल्कि राज्य को जल संकट से भी उबारे।


