
मोकामा, बिहार: गंगा नदी पर बन रहा नया रेल पुल अब अपने अंतिम चरण में है। रेलवे के मुताबिक, जून महीने से इस पुल पर ट्रेनों की आवाजाही शुरू हो जाएगी, जिससे उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच कनेक्टिविटी को नया बल मिलेगा।
पटना के पाटलिपुत्र रेल परिसर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूर्व मध्य रेल के जीएम छत्रसाल सिंह ने इसे “गेम चेंजर” करार दिया। उन्होंने कहा कि यह पुल न सिर्फ ट्रेनों की आवाजाही को आसान बनाएगा, बल्कि सालों से चली आ रही लेट-लतीफी और भीड़भाड़ की समस्या से भी राहत देगा।
पुराने पुलों पर दबाव कम होगा
राजेंद्र पुल पर ट्रेनों का बोझ इतना ज्यादा था कि रोजाना देरी आम बात बन चुकी थी। नया पुल इस दबाव को कम करेगा और दानापुर-सोनपुर रेल मंडलों के बीच आवागमन को सुगम बनाएगा।
रेल ओवर रेल सिस्टम से मिलेगी सुविधा
इस परियोजना में रेल ओवर रेल (ROR) सिस्टम भी शामिल है। इसका मतलब है कि मेन लाइन की ट्रेनों को रोके बिना अन्य गाड़ियां आसानी से गुजर सकेंगी। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इससे रेल ट्रैफिक जाम अब इतिहास बन जाएगा।
बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्लान की तैयारी
रेलवे ने पंडित दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन से झाझा तक तीसरी और चौथी रेल लाइन बिछाने की योजना भी पेश की है। इसके अलावा, कोइलवर में सोन नदी पर एक और नया रेल पुल बनाने का प्रस्ताव भेजा गया है।
काम तेज़ी से पूरा करने के लिए
रेलखंड को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटा गया है ताकि हर सेगमेंट में तेजी से प्रगति हो सके। आने वाले दिनों में यात्रियों को तेज सफर के साथ जाम और वेटिंग की समस्या से भी राहत मिलने की उम्मीद है।
सियासी पेंच
हालांकि काम रेलवे कर रहा है, लेकिन इस मेगा प्रोजेक्ट के श्रेय की सियासत पहले ही तेज़ी से शुरू हो गई है। अब सवाल यह है कि इस विकास के सेतु का सेहरा किसके सिर बंधेगा?


