तिलका माँझी भागलपुर विश्वविद्यालय का 66वाँ स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया गया

भागलपुर, 13 जुलाई 2025।तिलका माँझी भागलपुर विश्वविद्यालय (TMBU) ने शनिवार को अपना 66वाँ स्थापना दिवस पूरे हर्षोल्लास और गरिमामय वातावरण में मनाया। विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित इस समारोह में पूर्व कुलपति प्रो. (डॉ.) रामश्री पुर्वे, छात्र-कल्याण अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) विजय कुमार, विभिन्न विभागों के शिक्षकगण, कर्मचारी, छात्र-छात्राएँ तथा गणमान्य अतिथि शामिल हुए।

तिलकामांझी की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि से आरंभ हुआ कार्यक्रम

कार्यक्रम की शुरुआत विश्वविद्यालय के प्रेरणास्रोत स्वतंत्रता सेनानी तिलका माँझी की प्रतिमा पर माल्यार्पण से की गई। कुलपति ने श्रद्धा-सुमन अर्पित करते हुए विश्वविद्यालय के आदर्श मूल्यों को स्मरण किया। इसके पश्चात विश्वविद्यालय का कुलगीत प्रस्तुत किया गया, जिसमें इसकी गौरवशाली परंपरा और शैक्षणिक मूल्यों को दर्शाया गया।

दीप प्रज्वलन और ध्वजारोहण के साथ शिक्षा यात्रा को नमन

समारोह में दीप प्रज्वलन एवं ध्वजारोहण द्वारा विश्वविद्यालय के 66 वर्षों की उपलब्धियों को नमन किया गया। स्वागत-गान ने उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया।

मुख्य अतिथि का उद्बोधन और भावी योजनाएँ

मुख्य अतिथि प्रो. (डॉ.) विजय कुमार ने अपने उद्बोधन में कहा,

“तिलका माँझी भागलपुर विश्वविद्यालय केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि विचार, सामाजिक चेतना और क्रांतिकारी परंपरा का वाहक है। यह विश्वविद्यालय बिहार के शैक्षिक नक्शे पर अपनी विशेष पहचान रखता है।”

कुलपति प्रो. रामश्री पुर्वे ने अपने वक्तव्य में विश्वविद्यालय की शैक्षणिक प्रगति, शोध कार्यों, और भावी योजनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।

संस्कृति की झलकियों ने बढ़ाया समारोह का आकर्षण

कार्यक्रम में विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत लोकगीत, नृत्य और नाटकों ने बिहार की सांस्कृतिक विरासत को मंच पर जीवंत कर दिया। आयोजन का संचालन अत्यंत सुव्यवस्थित एवं अनुशासित रूप में किया गया।

पूर्व छात्रों व शिक्षकों को शुभकामनाएँ

समापन सत्र में कुलपति ने विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों को शुभकामनाएँ दीं और संस्थान की गरिमा को बनाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने इस दिन को “गर्व, आत्मबल और प्रेरणा का दिवस” बताया।

66 वर्षों की विरासत

1960 में स्थापित यह विश्वविद्यालय आज बिहार के प्रमुख उच्च शिक्षण संस्थानों में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुका है। शिक्षा, शोध और सामाजिक सरोकारों के क्षेत्र में इसका योगदान अनुकरणीय रहा है।


 

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