
राजधानी दिल्ली में सोमवार को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान हुई पुलिस-प्रदर्शनकारी झड़प के बाद हालात अब भी चर्चा के केंद्र में हैं। इस दौरान गंभीर रूप से घायल हुई 23 वर्षीय छात्रा की हालत चिंताजनक बनी हुई है। सूत्रों के मुताबिक, छात्रा का इलाज डॉ. राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल के आईसीयू में वेंटिलेटर सपोर्ट पर किया जा रहा है।
परिवार के एक सदस्य के अनुसार, छात्रा के सिर, चेहरे, गर्दन और सीने पर गंभीर चोटें आई हैं। डॉक्टर लगातार उसकी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
संसद मार्च के दौरान भड़की थी झड़प
सोमवार को बड़ी संख्या में छात्र और CJP समर्थक जंतर-मंतर से संसद की ओर मार्च कर रहे थे। प्रदर्शनकारी NEET-UG पेपर लीक और अन्य परीक्षा अनियमितताओं के विरोध में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। इसी दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कई स्थानों पर धक्का-मुक्की और झड़प हुई, जिसके बाद हालात तनावपूर्ण हो गए।
पुलिस का दावा- 118 जवान घायल, 20 से अधिक वाहन क्षतिग्रस्त
दिल्ली पुलिस के अनुसार, झड़प के दौरान 118 पुलिसकर्मी और लगभग 60 प्रदर्शनकारी घायल हुए। पुलिस ने यह भी दावा किया कि हिंसा के दौरान उसके 20 से अधिक सरकारी वाहन क्षतिग्रस्त हुए। पूरे मामले की जांच जारी है और विभिन्न धाराओं में मामले दर्ज किए गए हैं।
जेपी नड्डा ने अस्पताल पहुंचकर लिया घायलों का हाल
मंगलवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने RML अस्पताल और लेडी हार्डिंग अस्पताल पहुंचकर घायल प्रदर्शनकारियों और पुलिसकर्मियों का हालचाल जाना। उन्होंने डॉक्टरों से इलाज की जानकारी ली और घायलों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
जंतर-मंतर पर CJP का धरना जारी
उधर, जंतर-मंतर पर CJP का धरना दूसरे दिन भी जारी रहा। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि सरकार बातचीत के नाम पर केवल समय बर्बाद कर रही है। उनका कहना है कि अब संगठन सरकार के पास बातचीत के लिए नहीं जाएगा, बल्कि यदि सरकार बातचीत चाहती है तो उसे जंतर-मंतर आकर प्रदर्शनकारियों से संवाद करना होगा।
मेदांता अस्पताल पहुंचे सोनम वांगचुक
इस बीच, सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद सफदरजंग अस्पताल से गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया है। हाईकोर्ट ने उनकी पत्नी गीतांजलि अंग्मो की याचिका पर सुनवाई करते हुए वांगचुक को अपनी पसंद के अस्पताल में इलाज कराने की अनुमति दी थी।
दिल्ली में छात्रों के आंदोलन, पुलिस कार्रवाई और उसके बाद की राजनीतिक हलचल के बीच अब सभी की नजर सरकार और प्रदर्शनकारियों के अगले कदम पर टिकी हुई है।


