
नई दिल्ली: संसद मार्ग पर सोमवार को CJP के ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान हुई हिंसा के बाद घायल हुए दिल्ली पुलिस के जवानों ने पूरे घटनाक्रम को लेकर अपनी आपबीती साझा की है। पुलिसकर्मियों का दावा है कि प्रदर्शनकारियों को कई बार शांतिपूर्वक रोकने और समझाने की कोशिश की गई, लेकिन भीड़ ने बैरिकेड तोड़ दिए और उसके बाद पथराव शुरू हो गया, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हो गए।
‘8 से 10 हजार की भीड़ थी, चेतावनी के बाद भी नहीं माने’
घायल सब-इंस्पेक्टर श्रीनिवास शर्मा और एएसआई दत्ता भरणे ने बताया कि उनकी ड्यूटी जंतर-मंतर के पास बैरिकेडिंग पर लगाई गई थी। सुबह से ही बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जुटने लगे और कुछ ही समय में करीब 8 से 10 हजार लोगों की भीड़ वहां पहुंच गई।
पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से आगे न बढ़ने की अपील की और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी, लेकिन उनके अनुसार भीड़ ने आदेशों की अनदेखी करते हुए पहला सुरक्षा घेरा तोड़ दिया।
‘दूसरी और तीसरी बैरिकेडिंग भी तोड़ी गई’
पुलिस के मुताबिक, वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर जवानों ने दूसरे सुरक्षा घेरे पर मोर्चा संभाला, लेकिन वहां भी बैरिकेडिंग तोड़ दी गई। इसके बाद संसद मार्ग थाने के सामने तीसरे सुरक्षा घेरे पर भी प्रदर्शनकारियों को रोकने का प्रयास किया गया।
पुलिस का कहना है कि इसी दौरान स्थिति अचानक बिगड़ गई और भीड़ की ओर से पथराव शुरू हो गया, जिसमें कई पुलिस अधिकारी और जवान घायल हुए।
सब-इंस्पेक्टर बोले- हाथ में गहरा घाव, पैर में फ्रैक्चर
घायल सब-इंस्पेक्टर श्रीनिवास शर्मा ने बताया कि उनके दाहिने हाथ में गंभीर चोट आई है, जबकि दाहिने पैर के घुटने में फ्रैक्चर हुआ है।
उन्होंने कहा कि डॉक्टरों ने उन्हें पूरी तरह ठीक होने में करीब सवा से डेढ़ महीने का समय लगने की बात कही है।
‘सिर पर पत्थर लगा, दो टांके आए’
एएसआई दत्ता भरणे ने बताया कि तीसरे बैरिकेड पर भीड़ को रोकने के दौरान उनके सिर पर पत्थर लगा, जिससे गंभीर चोट आई। उन्हें तुरंत पीसीआर वाहन से राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल ले जाया गया, जहां सिर पर दो टांके लगाए गए। उपचार के बाद उन्हें उसी शाम अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान कुछ असामाजिक तत्व भी भीड़ में शामिल थे, जिन्होंने पुलिस और आयोजकों दोनों की अपील को नजरअंदाज किया।
हेड कांस्टेबल नवीन ओला बोले- ‘महिलाओं और बच्चों को बचाते हुए लगी चोट’
घायल हेड कांस्टेबल नवीन ओला ने बताया कि पुलिस महिलाओं और बच्चों को सुरक्षित रखते हुए भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही थी। इसी दौरान अचानक पथराव शुरू हो गया और उनके सिर में गंभीर चोट लगी।
उन्होंने बताया कि उन्हें भी आरएमएल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उनके सिर पर तीन टांके लगाए। इलाज के दौरान दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी और पुलिस आयुक्त भी अस्पताल पहुंचे तथा घायल जवानों का हालचाल जाना।
जांच जारी, वीडियो फुटेज खंगाल रही पुलिस
दिल्ली पुलिस ने हिंसा के पूरे घटनाक्रम की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार, सीसीटीवी फुटेज, ड्रोन कैमरों और अन्य वीडियो रिकॉर्डिंग की मदद से घटना में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है। पुलिस का कहना है कि दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।


