पटना। राज्य में गन्ना खेती को बढ़ावा देने और जल-जमाव की समस्या से किसानों को राहत दिलाने के उद्देश्य से जल संसाधन विभाग और गन्ना उद्योग विभाग की संयुक्त पहल तेज हो गई है। इसी क्रम में शुक्रवार को जल संसाधन विभाग के सभाकक्ष में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता विभाग के प्रधान सचिव संतोष कुमार मल्ल ने की।
बैठक में बताया गया कि गन्ना उत्पादन वाले इलाकों में जल-जमाव की समस्या को दूर करने के लिए नहरों, स्लूईस गेट, पुलिया, नाला उड़ाही और अतिक्रमण हटाने जैसे कार्यों का पंचायतवार सर्वेक्षण कराया जा रहा है। प्रधान सचिव ने निर्देश दिया कि जिन जिलों में यह सर्वे अभी अधूरा है, वहां इसे एक सप्ताह के भीतर पूरा कर रिपोर्ट सौंपें।
मनरेगा से जोड़ी जाएंगी योजनाएं
बैठक में यह भी बताया गया कि गन्ना क्षेत्रों में जल निकासी से जुड़ी योजनाओं को मनरेगा की वार्षिक कार्य योजना में शामिल कराने की प्रक्रिया चल रही है। इसके लिए मनरेगा विभाग से 15 दिन का अतिरिक्त समय मांगा गया है, ताकि सभी आवश्यक संरचनाओं की सूची पूरी की जा सके।
हजारों एकड़ में मिलेगा फायदा
अब तक किए गए सर्वे में—
- पश्चिम चंपारण: 11 प्रखंडों में 41 योजनाएं, 31,361 एकड़ क्षेत्र को लाभ
- पूर्वी चंपारण: 12 प्रखंडों में 28 योजनाएं, 13,729 एकड़ क्षेत्र लाभान्वित
- समस्तीपुर: 3 योजनाएं, 16,500 एकड़ क्षेत्र
इसके अलावा गोपालगंज, सिवान और बेगूसराय में भी योजनाएं चिन्हित की गई हैं।
मसान नदी तटबंध से भी मिलेगी राहत
मसान नदी के बायां और दायां तटबंध 46.056 किलोमीटर में बनाए जा रहे हैं। इसके पूरा होने के बाद आसपास के प्रखंडों में जल-जमाव की समस्या काफी हद तक समाप्त हो जाएगी।
प्रधान सचिव ने कहा कि 15 दिनों के बाद फिर से समीक्षा बैठक होगी, जिसमें सभी निर्देशों की प्रगति की जांच की जाएगी। विभाग का लक्ष्य है कि गन्ना किसानों को जल-जमाव से राहत देकर उत्पादन और आय दोनों में बढ़ोतरी की जाए।


