पटना की हाईटेक लैब में हो रही ‘शक्ति’ की परीक्षा! 100 प्रोजेक्ट्स पास, अब धांधली पर लगेगी लगाम; जानें कैसे बन रहे बिहार के सरकारी भवन

खबर के मुख्य बिंदु:

  • हाईटेक जांच: पटना की केंद्रीय प्रयोगशाला में 55 से अधिक आधुनिक मशीनों से हो रही निर्माण सामग्रियों की टेस्टिंग।
  • बड़ी उपलब्धि: अब तक 100 से अधिक सरकारी परियोजनाओं (पंचायत भवन, हॉस्टल, स्कूल) की क्वालिटी चेक पूरी।
  • आत्मनिर्भर विभाग: थर्ड पार्टी जांच पर निर्भरता खत्म; समय और सरकारी धन की हो रही बड़ी बचत।
  • सख्ती: घटिया सामग्री इस्तेमाल करने वाले संवेदकों की अब खैर नहीं; उड़नदस्ते की टीम कर रही साप्ताहिक निरीक्षण।

पटना: बिहार में अब सरकारी इमारतें ‘जुगाड़’ से नहीं, बल्कि कड़े वैज्ञानिक पैमानों पर बनेंगी। भवन निर्माण विभाग ने पटना में अपनी केंद्रीय प्रयोगशाला के जरिए निर्माण कार्यों में पारदर्शिता और मजबूती का नया अध्याय शुरू किया है। विभागीय सचिव कुमार रवि के नेतृत्व में यह लैब अब राज्य के इंफ्रास्ट्रक्चर की ‘रीढ़’ बन गई है, जहाँ ईंट से लेकर सरिया तक की ‘कुंडली’ खंगाली जा रही है।

55 मशीनों का पहरा: हर ईंट और कंक्रीट का होगा ‘कन्फर्मेशन’

​पटना भवन अंचल कार्यालय में स्थापित यह लैब किसी भी निजी लैब से कम नहीं है। यहाँ पुराने ढर्रे को छोड़कर अत्याधुनिक तकनीक का सहारा लिया जा रहा है।

  • क्या-क्या हो रहा चेक: निर्माण में लगने वाली ईंट, बालू, गिट्टी, सरिया और कंक्रीट के ‘क्यूब मोल्ड’ की सघन जांच की जा रही है।
  • पारदर्शिता: अब संवेदक (Contractor) अपनी मनमर्जी की रिपोर्ट नहीं थोप पाएंगे। विभागीय जांच रिपोर्ट और संवेदक की रिपोर्ट का मिलान कर दूध का दूध और पानी का पानी किया जा रहा है।

100 से ज्यादा प्रोजेक्ट्स पर लगी ‘क्वालिटी’ की मुहर

​21 मार्च 2025 को शुरू हुई इस लैब ने महज एक साल के भीतर रिकॉर्ड तोड़ काम किया है। विभाग की 100 से अधिक महत्वपूर्ण परियोजनाओं की सामग्रियों की जांच यहाँ पूरी हो चुकी है।

  1. पंचायत सरकार भवन: गाँव-गाँव में बन रहे डिजिटल केंद्रों की मजबूती सुनिश्चित की गई।
  2. आवासीय विद्यालय और हॉस्टल: छात्रों के सुरक्षित भविष्य के लिए इमारतों की नींव को परखा गया।
  3. हाजत और ऑडिटोरियम: सार्वजनिक संपत्तियों के सदुपयोग के लिए गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया गया।

कुमार रवि का मास्टरप्लान: पैसा भी बचेगा और समय भी

​विभागीय सचिव कुमार रवि ने स्पष्ट किया कि इस लैब के आने से विभाग की थर्ड पार्टी लैब पर निर्भरता कम हुई है। इससे न केवल निजी लैब को दी जाने वाली भारी-भरकम फीस बच रही है, बल्कि जांच रिपोर्ट आने में लगने वाला समय भी आधा हो गया है।

उड़नदस्ते का खौफ: केवल लैब ही नहीं, विभाग ने ‘फ्लाइंग स्क्वाड’ (उड़नदस्ते) की टीमें भी गठित की हैं। ये टीमें हर हफ्ते निर्माण स्थलों पर औचक निरीक्षण करती हैं और मौके से सैंपल उठाकर लैब भेजती हैं।

VOB का नजरिया: बिहार के भवनों की ‘हड्डियाँ’ अब होंगी मजबूत!

​अक्सर सरकारी भवनों के निर्माण में घटिया सामग्री की शिकायतें आती रहती थीं, लेकिन ‘सेंट्रल लैब’ का यह मॉडल भ्रष्टाचार पर सीधा प्रहार है। जब विभाग खुद जज और जूरी बनेगा, तो ठेकेदारों के लिए क्वालिटी से समझौता करना नामुमकिन हो जाएगा। बिहार को अब ऐसी ही टिकाऊ और सुरक्षित इमारतों की जरूरत है जो दशकों तक मजबूती से खड़ी रहें।

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