पटना में आधी रात तक चली छात्रों की पेशी: 87 छात्र बेउर जेल भेजे गए, कोर्ट ने तत्काल जमानत से किया इनकार; दो वकीलों को हथकड़ी लगाने पर पुलिस से जवाब तलब

पटना: बिहार बंद के दौरान गिरफ्तार किए गए छात्रों की न्यायिक प्रक्रिया रविवार देर रात तक चली। छज्जूबाग स्थित न्यायिक पदाधिकारी के आवास पर करीब 200 छात्रों को पेश किया गया, जहां घंटों तक सुनवाई हुई। बड़ी संख्या में परिजन रातभर अपने बच्चों की रिहाई का इंतजार करते रहे, लेकिन अदालत के फैसले के बाद अधिकांश को निराश होकर लौटना पड़ा।

87 छात्र भेजे गए बेउर केंद्रीय कारा

सुनवाई के बाद अदालत ने 87 छात्रों को न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। इसके बाद सभी को बेउर केंद्रीय कारा भेज दिया गया। वहीं, कुछ छात्रों और महिलाओं को व्यक्तिगत मुचलके पर रिहा कर दिया गया।

90 छात्रों को बॉन्ड पर मिली रिहाई

पुलिस के अनुसार, बिहार बंद के दौरान विभिन्न स्थानों से हिरासत में लिए गए छात्रों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है। करीब 90 छात्रों को आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कराने के बाद बॉन्ड भरवाकर छोड़ दिया गया। इनमें लगभग 30 महिला प्रदर्शनकारी भी शामिल हैं।

कोर्ट ने तत्काल जमानत देने से किया इनकार

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने गिरफ्तार छात्रों की जमानत की मांग की। हालांकि अदालत ने तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया। बचाव पक्ष के अनुसार, आरोपियों पर बीएनएस की धारा 109 सहित अन्य धाराएं लगाए जाने के कारण अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने का फैसला लिया।

दो वकीलों को हथकड़ी लगाकर पेश करने पर कोर्ट नाराज

सुनवाई के दौरान एक और मामला चर्चा का केंद्र रहा। पुलिस दो अधिवक्ताओं को हिरासत में लेकर हथकड़ी के साथ अदालत में पेश हुई। इस पर न्यायिक पदाधिकारी ने कड़ी नाराजगी जताई और गांधी मैदान थाना प्रभारी समेत एक अन्य पुलिस अधिकारी को कारण बताओ (शो कॉज) नोटिस जारी कर जवाब मांगा। अदालत ने निर्धारित समय सीमा के भीतर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है।

रातभर जज आवास के बाहर डटे रहे परिजन

छज्जूबाग स्थित न्यायिक पदाधिकारी के आवास के बाहर देर रात तक भारी भीड़ जुटी रही। परिजनों को उम्मीद थी कि उनके बच्चों को उसी रात जमानत मिल जाएगी, लेकिन अदालत के फैसले के बाद उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ा। पूरे परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहा।

मामलों की समीक्षा की तैयारी, गाइडलाइन का इंतजार

सूत्रों के अनुसार, 22 जुलाई के छात्र प्रदर्शन और 25 जुलाई के बिहार बंद के दौरान दर्ज मामलों की समीक्षा की जा रही है। पुलिस मुख्यालय केंद्र सरकार से मिलने वाली गाइडलाइन का इंतजार कर रहा है। गाइडलाइन जारी होने के बाद यह तय किया जाएगा कि किन मामलों को वापस लिया जा सकता है और किन पर कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी। फिलहाल इस संबंध में कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।

रिहाई की मांग तेज, अगले फैसले पर टिकी निगाहें

गिरफ्तार छात्रों के परिजन जल्द रिहाई की मांग कर रहे हैं। दूसरी ओर, पुलिस और प्रशासन का कहना है कि सभी कार्रवाई कानून के अनुसार की जा रही है। अब छात्रों, उनके परिवारों और राजनीतिक दलों की नजर केंद्र सरकार की संभावित गाइडलाइन और पुलिस मुख्यालय के अगले निर्णय पर टिकी हुई है।

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