
सिवान: बिहार के सिवान में 25 जुलाई को NEET परीक्षा लीक मामले को लेकर छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के बाद प्रशासन ने बड़ा एक्शन लिया है। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई हिंसक झड़प में गोली चलने के मामले में फायरिंग करने वाले पुलिस जवान अभिषेक पटेल को निलंबित कर दिया गया है। इस घटना में दो प्रदर्शनकारियों को गोली लगी थी, जबकि सिवान के पुलिस अधीक्षक (SP) समेत कई पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। सभी घायलों का इलाज सदर अस्पताल में चल रहा है।
फायरिंग के बाद प्रशासन सख्त, 200 से अधिक गिरफ्तार
हिंसा के बाद जिला प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में है। पुलिस ने अब तक 200 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है। वहीं, हिंसा, पथराव, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और बिहार बंद के दौरान हुई घटनाओं को लेकर 2,500 से अधिक अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। जिले में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है और संवेदनशील इलाकों में लगातार फ्लैग मार्च निकाला जा रहा है।
24 घंटे इंटरनेट सेवा बंद, अफवाहों पर रोक लगाने की कोशिश
स्थिति को नियंत्रित करने और सोशल मीडिया के जरिए अफवाहों के प्रसार को रोकने के लिए प्रशासन ने जिले में 24 घंटे तक इंटरनेट सेवा बंद रखने का फैसला किया। अधिकारियों का कहना है कि कानून-व्यवस्था पूरी तरह बहाल करने तक हर गतिविधि पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी।
पूर्व माले विधायक के घर देर रात छापेमारी
हिंसा के बाद पुलिस ने मैरवा थाना क्षेत्र के खलवा गांव स्थित पूर्व माले विधायक अमरजीत कुशवाहा के आवास पर भी देर रात छापेमारी की। इस दौरान उनके सरकारी सुरक्षा गार्ड और एक भांजे को पुलिस अपने साथ ले गई। हालांकि, इस कार्रवाई को लेकर पुलिस की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
पूर्व विधायक की पत्नी ने लगाए गंभीर आरोप
छापेमारी के बाद पूर्व विधायक की पत्नी ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि रात करीब एक बजे भारी संख्या में पुलिसकर्मी उनके घर पहुंचे, पूरे घर की तलाशी ली और सामान बिखेर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि तलाशी के दौरान घर में रखी कुछ नकदी और गहने भी गायब हो गए। साथ ही उनके भांजे और सरकारी गार्ड को भी हिरासत में ले लिया गया। इन आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद भी जारी है कार्रवाई
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद आंदोलन की तीव्रता कुछ कम हुई है, लेकिन प्रशासन ने हिंसा में शामिल लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। पुलिस का कहना है कि वीडियो फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर उपद्रवियों की पहचान की जा रही है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
पुलिस की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल
पूरे घटनाक्रम के बाद पुलिस की कार्रवाई और छापेमारी को लेकर विपक्षी दलों और स्थानीय लोगों की ओर से सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि पुलिस ने कहा है कि मामले की जांच जारी है और सभी कार्रवाई कानून के दायरे में की जा रही है। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान न देने की अपील की है।


