पटना में हिट एंड रन मामलों में अब तक 427 पीड़ितों को मिला मुआवजा, मृतकों के आश्रितों को ₹8.28 करोड़ का भुगतान

पटना, 13 जुलाई।सड़क दुर्घटना के शिकार लोगों को राहत पहुंचाने की दिशा में हिट एंड रन योजना कारगर साबित हो रही है। पटना जिला इस योजना के क्रियान्वयन में राज्य स्तर पर अग्रणी है। जिले में वर्ष 2022 से 2025 के बीच 427 पीड़ितों को मुआवजा दिया जा चुका है।

पटना जिला परिवहन कार्यालय (डीटीओ) से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, 1 जनवरी 2022 से 4 जून 2025 के बीच जिले में कुल 4,102 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। इनमें से 2,223 मामले हिट एंड रन के थे, जबकि 1,879 मामले नॉन हिट एंड रन श्रेणी में आए।

₹8.28 करोड़ मृतकों के आश्रितों को, ₹7.5 लाख घायलों को

परिवहन विभाग के अनुसार, हिट एंड रन मामलों के अंतर्गत:

  • 414 मृतकों के आश्रितों को ₹2 लाख की दर से कुल ₹8.28 करोड़ मुआवजा दिया गया।
  • 15 गंभीर रूप से घायल लोगों को ₹50 हजार प्रति व्यक्ति के हिसाब से ₹7.5 लाख का भुगतान हुआ है।

यह योजना वर्ष 2022 में केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई थी, जिसका उद्देश्य उन पीड़ितों और उनके परिजनों को सहायता प्रदान करना है, जिनकी सड़क दुर्घटनाओं में जान गई हो या गंभीर चोट आई हो, लेकिन दोषी वाहन और चालक की पहचान नहीं हो पाई हो।


क्या है हिट एंड रन योजना?

यह एक सरकारी योजना है, जिसके अंतर्गत यदि किसी सड़क दुर्घटना में गाड़ी की पहचान नहीं हो पाती, तो मृतक के आश्रितों को ₹2 लाख और घायलों को ₹50 हजार तक की सहायता राशि दी जाती है।


आवेदन की प्रक्रिया

डीटीओ कार्यालय के अनुसार, 1 अप्रैल 2022 के बाद की दुर्घटनाओं के लिए पीड़ित परिवार परिवहन विभाग में आवेदन कर सकते हैं। प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया गया है।

जरूरी दस्तावेज़:

  • परिवहन विभाग के पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन
  • डीटीओ कार्यालय में आवेदन जमा
  • मृतक की एफआईआर और पोस्टमार्टम रिपोर्ट
  • मृत्यु प्रमाण पत्र
  • मृतक और आश्रित का आधार कार्ड
  • बैंक पासबुक की छायाप्रति
  • पारिवारिक सूची (वैवाहिक दंपत्ति के मामले में अनिवार्य नहीं)

जागरूकता और अपील: डीटीओ उपेंद्र कुमार पाल

पटना डीटीओ उपेंद्र कुमार पाल ने लोगों से अपील की है कि वे इस योजना के बारे में जानकारी रखें और पात्र होने पर आवेदन जरूर करें। उन्होंने कहा,

“अक्सर सड़क दुर्घटना में वाहन की पहचान नहीं हो पाती। ऐसे में यह योजना पीड़ितों के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है। मुआवजा समय पर मिल सके, इसके लिए हमने पूरी प्रक्रिया को डिजिटल और सहज बनाया है।”


मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) भी है विकल्प

परिवहन विभाग ने बताया कि यदि किसी दुर्घटना में गाड़ी या चालक की पहचान हो जाती है, तो पीड़ित परिवार मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) में मुआवजे के लिए अलग से दावा कर सकते हैं।


पटना जिले की यह पहल राज्य भर में एक मॉडल के रूप में देखी जा रही है। हिट एंड रन मामलों में पीड़ितों को राहत देने वाली यह योजना न केवल सामाजिक सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं के प्रति जन-जागरूकता का वाहक भी बन रही है।


 

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