
मुंबई/नई दिल्ली: दिल्ली में छात्रों के संसद मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई के बाद अब महाराष्ट्र में भी इस मुद्दे पर सियासत तेज हो गई है। शिवसेना (UBT) ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की आलोचना करते हुए इसे शांतिपूर्ण आंदोलन को दबाने की कोशिश बताया है। पार्टी के विधायक आदित्य ठाकरे ने प्रदर्शनकारियों को कानूनी सहायता देने का ऐलान किया है।
‘शांतिपूर्ण आंदोलन को कुचलने की कोशिश’
आदित्य ठाकरे ने कहा कि देशभर में शुरू हुआ यह आंदोलन शांतिपूर्ण था, लेकिन जिस तरह से पुलिस ने कार्रवाई की, उसने लोकतांत्रिक अधिकारों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विरोध की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में नागरिकों को शांतिपूर्ण विरोध करने का संवैधानिक अधिकार है और ऐसे आंदोलनों पर बल प्रयोग उचित नहीं है।
कानूनी मदद का ऐलान
आदित्य ठाकरे ने कहा कि यदि इस आंदोलन में शामिल किसी छात्र, सामाजिक कार्यकर्ता या आम नागरिक के खिलाफ मामला दर्ज किया जाता है या पुलिस नोटिस भेजती है, तो वे शिवसेना (UBT) से संपर्क कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि पार्टी प्रभावित लोगों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराएगी और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए हरसंभव सहयोग करेगी।
‘BJP ने भारतीय और जनता दोनों खो दिए’
बीजेपी पर निशाना साधते हुए आदित्य ठाकरे ने कहा कि सरकार का रवैया लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है।
उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि “भारतीय जनता पार्टी ने ‘भारतीय’ और ‘जनता’ दोनों को खो दिया है और अब केवल ‘पार्टी’ बची है।” उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनता की आवाज सुनने के बजाय विरोध प्रदर्शनों को दबाने में लगी है।
मुंबई में भी प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई
मुंबई में CJP के विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों और सिविल सोसायटी के सदस्यों को हिरासत में लिया। बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया, हालांकि कुछ लोगों को एफआईआर के संबंध में दोबारा पुलिस स्टेशन बुलाया गया।
900 से अधिक लोगों पर 8 एफआईआर
मुंबई पुलिस के अनुसार, शहर में बिना अनुमति प्रदर्शन और निषेधाज्ञा के कथित उल्लंघन के मामलों में 8 एफआईआर दर्ज की गई हैं।
पुलिस का कहना है कि 900 से अधिक लोगों के खिलाफ सार्वजनिक व्यवस्था भंग करने और अवैध जमावड़े से संबंधित धाराओं के तहत मामले दर्ज किए गए हैं।
सबसे बड़ी एफआईआर शिवाजी पार्क पुलिस स्टेशन में दर्ज हुई है, जिसमें 600 से अधिक लोगों के नाम शामिल हैं। इसके अलावा माहिम, दादर, सायन, वडाला टीटी, वर्ली, कालाचौकी और भोईवाड़ा पुलिस थानों में भी मामले दर्ज किए गए हैं।
मामले पर बढ़ी राजनीतिक बहस
दिल्ली और मुंबई में प्रदर्शनों के बाद विपक्ष लगातार सरकार पर विरोध की आवाज दबाने का आरोप लगा रहा है, जबकि पुलिस का कहना है कि कार्रवाई कानून-व्यवस्था बनाए रखने और निषेधाज्ञा के उल्लंघन की स्थिति में की गई। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक बयानबाज़ी लगातार तेज होती जा रही है।


