जम्मू-कश्मीर में शहीद हुए बिहार के सपूत संतोष यादव: पैतृक गाँव में उमड़ा जनसैलाब

भागलपुर, बिहार: जम्मू-कश्मीर के नौशेरा सेक्टर में देश की रक्षा करते हुए बिहार के वीर सपूत हवलदार संतोष यादव ने अपने प्राणों की आहुति दे दी. उनके बलिदान की खबर ने पूरे बिहार को शोक में डुबो दिया है, लेकिन उनके पैतृक गाँव डिमाहा में गर्व और आँसुओं का एक अद्भुत संगम देखने को मिला.
अंतिम विदाई के लिए उमड़ा जनसैलाब
बुधवार देर शाम पटना एयरपोर्ट पर शहीद संतोष यादव का पार्थिव शरीर लाया गया, जहाँ से गुरुवार को उन्हें राजकीय सम्मान के साथ उनके पैतृक गाँव, भागलपुर के नवगछिया अंतर्गत इस्माइलपुर प्रखंड के पछियारी टोला डिमाहा लाया गया. सुबह से ही गाँव में हजारों की संख्या में लोग अपने वीर बेटे की एक झलक पाने के लिए जमा हो गए थे. वातावरण ‘शहीद संतोष अमर रहे!’ और ‘हिंदुस्तान जिंदाबाद!’ के नारों से गूँज उठा. हर आँख नम थी, पर हर चेहरे पर संतोष के बलिदान का गर्व साफ झलक रहा था.
पूरे गाँव में निकली अंतिम यात्रा
जब फूलों से सजे वाहन में शहीद का पार्थिव शरीर गाँव पहुँचा, तो भीड़ बेकाबू हो गई. लोगों ने अपने हाथों में तिरंगा लिए हुए, शहीद संतोष यादव जिंदाबाद के नारे लगाते हुए उनकी अंतिम यात्रा को पूरे गाँव में घुमाया. यह दृश्य अत्यंत भावुक कर देने वाला था, जहाँ हर व्यक्ति अपने नायक को श्रद्धांजलि देने के लिए आतुर था.
परिजनों का अदम्य साहस और दर्द
शहीद संतोष यादव के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है. उनकी पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है, और गाँव की महिलाएँ उन्हें ढाँढस बँधाने में जुटी हैं. इस अकल्पनीय पीड़ा के बावजूद, परिवार के सदस्यों के चेहरों पर अपने बेटे के देश के लिए दिए गए बलिदान का गर्व भी स्पष्ट दिखाई दे रहा है.
विधायक गोपाल मंडल ने दी श्रद्धांजलि
गोपालपुर के विधायक गोपाल मंडल भी शहीद संतोष यादव के घर पहुँचे और परिवार को सांत्वना दी. उन्होंने कहा कि संतोष यादव का बलिदान देश कभी नहीं भूलेगा और उनके परिवार के साथ पूरा बिहार खड़ा है.
आज राजकीय सम्मान के साथ शहीद संतोष यादव का अंतिम संस्कार किया जाएगा. उनका बलिदान बिहार और पूरे देश को हमेशा प्रेरित करता रहेगा.

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