
भागलपुर।विक्रमशिला सेतु पर मंगलवार को एक ऐसा मंजर देखने को मिला, जिसने हर किसी का दिल दहला दिया। एक महिला, गोद में नवजात बच्चा, आंखों में खामोश चीख और मन में मौत का फैसला… वह गंगा में छलांग लगाने ही वाली थी।
लेकिन तभी वहां पहुंचे डायल 112 में तैनात दारोगा सिकंदर कुमार।
ड्यूटी पर जाते वक्त उनकी नजर पुल की रेलिंग पर खड़ी उस महिला पर पड़ी। महज 37 सेकंड में उन्होंने जो फैसला लिया, वही दो जिंदगियों के लिए जीवनदान बन गया।
एक पल की सतर्कता, दो जिंदगियां बचीं
दारोगा सिकंदर ने बिना देर किए गाड़ी रोकी, तेजी से महिला की ओर दौड़े और उससे बात करने लगे। उन्होंने उसे हिम्मत दी, समझाया और जैसे ही महिला का संतुलन डगमगाया, उन्होंने उसे मजबूती से रेलिंग से पीछे खींच लिया।
महिला की गोद में मौजूद मासूम भी पूरी तरह सुरक्षित रहा। पुल पर मौजूद लोग कुछ पल के लिए सन्न रह गए और फिर तालियों व दुआओं के साथ दारोगा को सलाम करने लगे।
कारण अब भी रहस्य
महिला यह खौफनाक कदम क्यों उठाने जा रही थी, इसकी वजह अब तक सामने नहीं आ सकी है। पुलिस उससे पूछताछ कर रही है और उसे सुरक्षित स्थान पर रखा गया है।
शहर कर रहा सलाम
इस साहसिक और संवेदनशील कार्य के बाद पूरे भागलपुर में दारोगा सिकंदर कुमार की सराहना हो रही है। लोग उन्हें “फरिश्ता” कह रहे हैं, जिन्होंने सही समय पर सही कदम उठाकर दो मासूम जिंदगियों को नया जीवन दिया।


