
बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच रोहतास जिले से एक बड़ा मामला सामने आया है। निगरानी विभाग की टीम ने सिविल सर्जन कार्यालय में तैनात प्रधान सहायक सतीश कुमार को 20 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। बताया जा रहा है कि वह ट्रांसफर और पोस्टिंग के नाम पर महिला कर्मी से घूस मांग रहा था। पटना से पहुंची निगरानी टीम ने योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाकर आरोपी को पकड़ लिया। इस कार्रवाई के बाद स्वास्थ्य विभाग और सिविल सर्जन कार्यालय में हड़कंप मच गया।
जानकारी के अनुसार यह कार्रवाई निगरानी विभाग की विशेष टीम ने की। टीम का नेतृत्व डीएसपी विकास श्रीवास्तव कर रहे थे। अधिकारियों को पहले से शिकायत मिली थी कि सिविल सर्जन कार्यालय में ट्रांसफर-पोस्टिंग के नाम पर रिश्वत ली जा रही है। शिकायत की जांच के बाद निगरानी विभाग ने कार्रवाई की योजना बनाई।
सूत्रों के मुताबिक संझौली प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत एक महिला लेखा प्रबंधक ने निगरानी थाना पटना में शिकायत दर्ज कराई थी। महिला कर्मी का आरोप था कि प्रधान सहायक सतीश कुमार उनसे ट्रांसफर और पोस्टिंग से जुड़े काम के लिए 20 हजार रुपये की मांग कर रहा था। शिकायत मिलने के बाद निगरानी विभाग ने पूरे मामले का सत्यापन कराया।
जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद निगरानी टीम ने ट्रैप की तैयारी शुरू कर दी। बताया जा रहा है कि शुक्रवार सुबह से ही टीम सिविल सर्जन कार्यालय और आसपास के इलाके में सक्रिय थी। अधिकारी लगातार गतिविधियों पर नजर बनाए हुए थे ताकि आरोपी को रंगे हाथ पकड़ा जा सके।
पूर्व योजना के अनुसार महिला कर्मी आरोपी के पास पैसे लेकर पहुंची। जैसे ही प्रधान सहायक ने रिश्वत की रकम ली, पहले से मौजूद निगरानी टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उसे पकड़ लिया। अधिकारियों ने मौके पर ही रकम बरामद कर ली और आरोपी को हिरासत में ले लिया।
इस अचानक हुई कार्रवाई से कार्यालय परिसर में अफरा-तफरी मच गई। कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच घटना को लेकर चर्चा शुरू हो गई। कई लोग यह जानने की कोशिश करते रहे कि आखिर निगरानी टीम कब से वहां मौजूद थी और किस तरह पूरी कार्रवाई को अंजाम दिया गया।
निगरानी विभाग के अधिकारियों ने बताया कि आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत मामला दर्ज किया जा रहा है। उससे पूछताछ की जा रही है और यह भी जांच की जाएगी कि कहीं वह पहले भी इसी तरह रिश्वत लेने के मामलों में शामिल तो नहीं रहा है।
इस घटना के बाद एक बार फिर रोहतास स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है। स्थानीय लोगों और विभागीय कर्मचारियों का कहना है कि ट्रांसफर-पोस्टिंग के नाम पर रिश्वतखोरी लंबे समय से चर्चा का विषय रही है। हालांकि खुलकर शिकायत करने से लोग अक्सर बचते रहे हैं।
जानकारों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग में प्रशासनिक कार्यों के लिए कई बार कर्मचारियों को अनावश्यक दबाव और भ्रष्टाचार का सामना करना पड़ता है। ट्रांसफर, पोस्टिंग, वेतन और अन्य फाइलों के नाम पर रिश्वत मांगने की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं।
बताया जा रहा है कि रोहतास जिले के स्वास्थ्य विभाग में यह पहली कार्रवाई नहीं है। इससे पहले भी कई अधिकारी और कर्मचारी निगरानी विभाग की गिरफ्त में आ चुके हैं। जानकारी के अनुसार पूर्व में दो सिविल सर्जन, एक प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, एक लेखपाल और चार क्लर्क भी भ्रष्टाचार के मामलों में गिरफ्तार किए जा चुके हैं।
इसके बावजूद रिश्वतखोरी की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। यही कारण है कि निगरानी विभाग अब स्वास्थ्य विभाग से जुड़े मामलों पर विशेष नजर बनाए हुए है। अधिकारियों का कहना है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा और शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी दफ्तरों में पारदर्शिता और डिजिटल प्रक्रिया बढ़ाने से भ्रष्टाचार पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है। लेकिन जमीनी स्तर पर अभी भी कई जगह पुरानी व्यवस्था और व्यक्तिगत हस्तक्षेप के कारण रिश्वतखोरी के मामले सामने आते रहते हैं।
उधर घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों में भी डर और बेचैनी का माहौल देखा गया। कई कर्मचारी इस बात को लेकर चर्चा करते रहे कि निगरानी विभाग अब अन्य मामलों की भी जांच कर सकता है। सूत्रों के अनुसार विभागीय रिकॉर्ड और कुछ अन्य फाइलों की भी जांच की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है।
निगरानी विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी सरकारी कर्मचारी या अधिकारी द्वारा रिश्वत मांगी जाती है, तो लोग बिना डर शिकायत करें। विभाग ऐसी शिकायतों पर गोपनीय तरीके से कार्रवाई करता है और दोषियों को रंगे हाथ पकड़ने की कोशिश की जाती है।
इस कार्रवाई के बाद आम लोगों के बीच भी चर्चा तेज हो गई है। कई लोगों का कहना है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई जरूरी है, ताकि सरकारी कार्यालयों में पारदर्शिता बनी रहे और आम लोगों को बिना रिश्वत दिए काम कराने का भरोसा मिल सके।
फिलहाल गिरफ्तार प्रधान सहायक सतीश कुमार से पूछताछ जारी है और निगरानी विभाग पूरे मामले की आगे की जांच में जुटा हुआ है। आने वाले दिनों में इस केस से जुड़े और खुलासे हो सकते हैं।


