बिहार में रोजगार का बड़ा रोडमैप तैयार, 2026-27 में 18.73 लाख लोगों को नौकरी और रोजगार देने का लक्ष्य

पटना। बिहार में नौकरी और रोजगार की तलाश कर रहे युवाओं के लिए सरकार ने बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान राज्य में 18 लाख 73 हजार 408 लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई है। सरकार ने अगले पांच वर्षों में एक करोड़ लोगों को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने का लक्ष्य तय किया है। इसी दिशा में सभी विभागों के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई है, जिसमें सरकारी नौकरियों के साथ-साथ कौशल विकास, स्वरोजगार और निजी क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया है।

सरकार का कहना है कि रोजगार सृजन को केवल सरकारी नियुक्तियों तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि उद्योग, शिक्षा, कौशल विकास, सेवा क्षेत्र और उद्यमिता को बढ़ावा देकर युवाओं के लिए नए अवसर तैयार किए जाएंगे। इसके लिए विभिन्न विभागों को लक्ष्य निर्धारित कर दिए गए हैं और समयबद्ध तरीके से योजनाओं के क्रियान्वयन के निर्देश भी जारी किए गए हैं।

सरकारी अधिकारियों के अनुसार राज्य में रोजगार बढ़ाने के लिए दीर्घकालिक रणनीति तैयार की गई है। इस रणनीति के तहत हर वित्तीय वर्ष में रोजगार का लक्ष्य पहले से अधिक रखा जाएगा ताकि अगले पांच वर्षों में एक करोड़ लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने का संकल्प पूरा किया जा सके। इसके लिए विभागों को नियमित रूप से प्रगति रिपोर्ट देने और योजनाओं की समीक्षा करने की व्यवस्था भी बनाई गई है।

सरकार की योजना के अनुसार वित्तीय वर्ष 2026-27 में कुल 18 लाख 73 हजार 408 लोगों को रोजगार से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इनमें से अधिकांश लोगों को पहले से संचालित योजनाओं के माध्यम से रोजगार मिलेगा, जबकि नई योजनाओं के जरिए भी बड़ी संख्या में युवाओं के लिए नए अवसर तैयार किए जाएंगे। सरकार का मानना है कि पुरानी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और नई परियोजनाओं की शुरुआत से रोजगार सृजन की गति और तेज होगी।

आंकड़ों के अनुसार इस वित्तीय वर्ष में पहले से चल रही योजनाओं के माध्यम से लगभग 16 लाख 94 हजार 323 लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं नई योजनाओं के जरिए 1 लाख 79 हजार 85 अतिरिक्त रोजगार अवसर तैयार किए जाएंगे। इन योजनाओं में कौशल प्रशिक्षण, स्वरोजगार, औद्योगिक निवेश और विभिन्न विकास परियोजनाओं को भी शामिल किया गया है।

रोजगार सृजन की इस योजना में कई प्रमुख विभागों की महत्वपूर्ण भूमिका तय की गई है। इनमें युवा रोजगार एवं कौशल विकास विभाग, उच्च शिक्षा विभाग, उद्योग विभाग, नागर विमानन विभाग, श्रम संसाधन विभाग तथा शिक्षा विभाग प्रमुख रूप से शामिल हैं। इन सभी विभागों को अपने-अपने क्षेत्र में रोजगार बढ़ाने के लिए अलग-अलग लक्ष्य दिए गए हैं। विभागों से अपेक्षा की गई है कि वे नई योजनाओं के साथ पहले से संचालित कार्यक्रमों को भी प्रभावी ढंग से लागू करें।

युवा रोजगार एवं कौशल विकास विभाग को इस पूरी योजना का प्रमुख समन्वयक बनाया गया है। विभाग का फोकस युवाओं को आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण देकर रोजगार योग्य बनाना है। विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को उद्योगों की आवश्यकता के अनुरूप कौशल प्रदान किया जाएगा ताकि उन्हें निजी क्षेत्र में भी रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकें।

उद्योग विभाग भी रोजगार सृजन की इस योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। सरकार का प्रयास है कि राज्य में नए उद्योगों को निवेश के लिए प्रोत्साहित किया जाए। औद्योगिक इकाइयों की स्थापना से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों प्रकार के रोजगार बढ़ने की उम्मीद है। इसके अलावा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों को भी बढ़ावा देने की रणनीति बनाई गई है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर विकसित किए जा सकें।

उच्च शिक्षा और शिक्षा विभाग भी युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए नई पहल करेंगे। तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा को मजबूत बनाने, रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रम शुरू करने और कौशल आधारित प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इससे पढ़ाई पूरी करने के बाद युवाओं को रोजगार प्राप्त करने में आसानी होगी।

श्रम संसाधन विभाग का उद्देश्य संगठित और असंगठित दोनों क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाना है। विभाग रोजगार मेलों, प्लेसमेंट कार्यक्रमों और कौशल प्रशिक्षण के माध्यम से युवाओं को विभिन्न कंपनियों और संस्थानों से जोड़ने की दिशा में काम करेगा। वहीं नागर विमानन विभाग भी अपने क्षेत्र में विस्तार के साथ नए रोजगार अवसर उपलब्ध कराने की तैयारी कर रहा है।

सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार नवंबर 2025 से मई 2026 के बीच राज्य में कुल 4 लाख 82 हजार 914 लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया गया। इस अवधि में विभिन्न योजनाओं और विभागीय कार्यक्रमों के माध्यम से रोजगार सृजन की प्रक्रिया लगातार जारी रही। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार नवंबर 2025 में 52 हजार 81 लोगों को रोजगार मिला, दिसंबर 2025 में 68 हजार 257, जनवरी 2026 में 55 हजार 150, फरवरी में 60 हजार 512, मार्च में 65 हजार 988, अप्रैल में 1 लाख 52 हजार 481 तथा मई 2026 में 28 हजार 445 लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया गया।

सरकार ने आने वाले वर्षों के लिए भी चरणबद्ध लक्ष्य निर्धारित किए हैं। वित्तीय वर्ष 2027-28 में 19 लाख 42 हजार 935 लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने की योजना है। इसके बाद 2028-29 में यह लक्ष्य बढ़ाकर 22 लाख 7 हजार 793 किया जाएगा। वहीं वित्तीय वर्ष 2029-30 में 24 लाख 18 हजार 336 लोगों को रोजगार देने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार का मानना है कि हर वर्ष रोजगार के अवसरों में बढ़ोतरी से पांच वर्षों में एक करोड़ रोजगार का लक्ष्य हासिल किया जा सकेगा।

सरकार का कहना है कि रोजगार नीति में सरकारी नौकरियों के साथ-साथ स्वरोजगार को भी समान महत्व दिया गया है। युवाओं को उद्यमिता के लिए प्रोत्साहित करने, आसान ऋण उपलब्ध कराने, स्टार्टअप को बढ़ावा देने और कौशल प्रशिक्षण के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। इससे युवाओं को केवल नौकरी तलाशने के बजाय स्वयं रोजगार सृजित करने का अवसर भी मिलेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निर्धारित योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन होता है और विभाग तय समयसीमा के भीतर अपने लक्ष्य पूरे करते हैं, तो राज्य में रोजगार की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हो सकता है। हालांकि इस लक्ष्य की सफलता इस बात पर भी निर्भर करेगी कि निवेश, औद्योगिक विकास, कौशल प्रशिक्षण और सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक लाभार्थियों तक कितनी प्रभावी ढंग से पहुंचता है।

फिलहाल सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि आने वाले वर्षों में रोजगार सृजन उसकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा। विभागवार तैयार की गई इस व्यापक कार्ययोजना के माध्यम से युवाओं को सरकारी नौकरी, निजी क्षेत्र, स्वरोजगार और कौशल आधारित रोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। यदि योजनाएं तय समय पर लागू होती हैं, तो बिहार के लाखों युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलने की उम्मीद मजबूत हो सकती है।

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