बिहार में पेट्रोल-डीज़ल की मांग में अचानक उछाल, सरकारी तेल कंपनियों ने संभाला मोर्चा; 24 घंटे जारी है सप्लाई ऑपरेशन

पटना। बिहार समेत देश के कई हिस्सों में पेट्रोल, डीज़ल और एलपीजी की मांग में अचानक आई तेज़ बढ़ोतरी के बीच सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों ने मोर्चा संभाल लिया है। IndianOil, Bharat Petroleum (BPCL) और Hindustan Petroleum (HPCL) ने स्पष्ट किया है कि राज्य में ईंधन की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है और किसी तरह की कमी की स्थिति नहीं बनने दी जाएगी। कंपनियों ने अपने लॉजिस्टिक्स नेटवर्क, डिपो संचालन और ट्रांसपोर्ट सिस्टम को हाई अलर्ट मोड में डाल दिया है, ताकि हर जिले तक समय पर ईंधन पहुंचाया जा सके।

हाल के दिनों में बिहार में पेट्रोल और डीज़ल की बिक्री में अचानक उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विशेषज्ञों के अनुसार इसकी सबसे बड़ी वजह राज्य में तेज़ी से चल रही कृषि गतिविधियां और फसल कटाई का सीजन है। खेतों में ट्रैक्टर, पंपसेट और परिवहन वाहनों के अधिक इस्तेमाल के कारण डीज़ल की मांग सामान्य दिनों की तुलना में काफी बढ़ गई है। वहीं दूसरी ओर निजी ईंधन कंपनियों की तुलना में सरकारी तेल कंपनियों के पेट्रोल पंपों पर कीमतें अपेक्षाकृत कम होने से बड़ी संख्या में ग्राहक सार्वजनिक क्षेत्र के आउटलेट्स की ओर रुख कर रहे हैं।

तेल कंपनियों के मुताबिक केवल आम उपभोक्ता ही नहीं बल्कि कई संस्थागत और व्यावसायिक उपभोक्ता भी अब सीधे सरकारी पेट्रोल पंपों से ईंधन खरीद रहे हैं। इसका असर बिक्री के आंकड़ों में साफ दिखाई दे रहा है। बढ़ती मांग के बावजूद कंपनियों ने दावा किया है कि उनके पास पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाए रखने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है।

बिहार में वर्तमान समय में कुल 3697 रिटेल फ्यूल आउटलेट सक्रिय हैं। इनमें 3590 पेट्रोल पंप सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के हैं जबकि 107 निजी क्षेत्र के आउटलेट्स शामिल हैं। राज्य में 8 बड़े ऑयल डिपो और टर्मिनल केंद्रों के जरिए प्रतिदिन हजारों किलोलीटर ईंधन की सप्लाई की जा रही है। आंकड़ों के अनुसार बिहार में हर दिन लगभग 5700 किलोलीटर पेट्रोल और करीब 9000 किलोलीटर डीज़ल उपलब्ध कराया जा रहा है।

तेल कंपनियों ने बताया कि मांग बढ़ने के बाद भी किसी जिले में सप्लाई बाधित न हो, इसके लिए विशेष निगरानी व्यवस्था लागू की गई है। टर्मिनल ऑपरेशन, ट्रांसपोर्ट यूनिट्स और कई महत्वपूर्ण रिटेल आउटलेट्स को 24 घंटे संचालन मोड में रखा गया है। इसके अलावा टैंकरों की आवाजाही बढ़ाई गई है ताकि डिपो से पेट्रोल पंपों तक ईंधन की रीफिलिंग समय पर हो सके।

राज्य प्रशासन और तेल कंपनियों के बीच भी लगातार समन्वय जारी है। जिला स्तर पर अधिकारियों के संपर्क में रहकर उन इलाकों की पहचान की जा रही है जहां मांग अपेक्षाकृत अधिक है। जरूरत के अनुसार वहां अतिरिक्त सप्लाई भेजी जा रही है। कई जगहों पर बैकअप स्टॉक भी तैयार रखा गया है ताकि अचानक मांग बढ़ने पर तुरंत प्रतिक्रिया दी जा सके।

एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई को लेकर भी कंपनियों ने राहतभरी जानकारी दी है। राज्यभर में लगभग 2000 एलपीजी वितरकों के माध्यम से घरेलू गैस की डिलीवरी जारी है। हालांकि वर्तमान समय में करीब 4.5 दिनों की पेंडेंसी बताई गई है, लेकिन कंपनियों का कहना है कि इसे जल्द सामान्य कर लिया जाएगा। गैस एजेंसियों को अतिरिक्त रिफिल उपलब्ध कराए जा रहे हैं और डिलीवरी सिस्टम को तेज किया गया है।

तेल कंपनियों ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना और PAHAL योजना से जुड़े उपभोक्ताओं को एक अहम सलाह भी जारी की है। कंपनियों ने कहा है कि सभी उपभोक्ता 30 जून 2026 तक अपना eKYC पूरा कर लें, ताकि गैस सब्सिडी मिलने में किसी प्रकार की परेशानी न हो। eKYC पूरा नहीं होने पर कई उपभोक्ताओं की सब्सिडी अटक सकती है। इसके लिए एजेंसियों और ऑनलाइन माध्यमों से प्रक्रिया पूरी की जा सकती है।

इस बीच सोशल मीडिया पर कई तरह की अफवाहें भी फैल रही हैं कि कुछ जिलों में ईंधन की कमी हो सकती है। इस पर तेल कंपनियों ने स्पष्ट कहा है कि देश और बिहार दोनों स्तर पर पेट्रोल, डीज़ल और एलपीजी का पर्याप्त भंडार मौजूद है। आम लोगों को घबराकर अतिरिक्त खरीदारी करने की जरूरत नहीं है। कंपनियों ने कहा कि अनावश्यक पैनिक बाइंग से सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ सकता है।

ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि यदि उपभोक्ता सामान्य तरीके से खरीदारी जारी रखें तो किसी तरह की संकट जैसी स्थिति नहीं बनेगी। सरकारी तेल कंपनियों का नेटवर्क देश के सबसे बड़े वितरण तंत्रों में शामिल है, जिसमें पाइपलाइन, टर्मिनल, डिपो, बॉटलिंग प्लांट और लाखों किलोमीटर की ट्रांसपोर्ट व्यवस्था शामिल है। यही कारण है कि अचानक मांग बढ़ने के बावजूद सप्लाई सिस्टम सक्रिय बना हुआ है।

तेल कंपनियों ने यह भी बताया कि वे लगातार अपने स्टॉक स्तर की समीक्षा कर रही हैं। हर दिन मांग और सप्लाई के आंकड़ों का विश्लेषण किया जा रहा है और उसी के अनुसार लॉजिस्टिक्स प्लान तैयार हो रहा है। कंपनियां आपस में भी समन्वय बनाकर काम कर रही हैं ताकि किसी एक क्षेत्र पर अत्यधिक दबाव न पड़े और पूरे राज्य में संतुलित वितरण सुनिश्चित किया जा सके।

विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले कुछ सप्ताह तक कृषि गतिविधियों और परिवहन क्षेत्र की सक्रियता के कारण ईंधन की मांग ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती है। इसके अलावा शादी-विवाह और यात्रा सीजन भी डीज़ल और पेट्रोल की खपत को प्रभावित कर सकता है। हालांकि सरकारी कंपनियों ने भरोसा दिलाया है कि वे हर परिस्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

उपभोक्ताओं से अपील की गई है कि वे ईंधन की उपलब्धता या सप्लाई से जुड़ी जानकारी केवल अधिकृत एजेंसियों और तेल कंपनियों की आधिकारिक सूचनाओं से ही प्राप्त करें। अफवाहों पर ध्यान न दें और सामान्य जरूरत के अनुसार ही खरीदारी करें। कंपनियों का कहना है कि राज्य में ईंधन संकट जैसी कोई स्थिति नहीं है और आपूर्ति पूरी तरह नियंत्रण में है।

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