बिहार में सियासी हलचल तेज: RJD विधायक फैसल रहमान की सीएम नीतीश कुमार से मुलाकात, बदलते समीकरणों के संकेत

बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के विधायक फैसल रहमान की मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात ने सियासी गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब राज्यसभा चुनाव के दौरान रहमान की अनुपस्थिति पहले ही विपक्षी खेमे में असहजता पैदा कर चुकी है।

राज्यसभा चुनाव से शुरू हुई कहानी

गौरतलब है कि 16 मार्च को हुए राज्यसभा चुनाव के दौरान फैसल रहमान मतदान में शामिल नहीं हुए थे। उनके इस कदम का सीधा असर चुनाव परिणाम पर पड़ा और RJD उम्मीदवार एडी सिंह को हार का सामना करना पड़ा। इस घटना के बाद से ही रहमान की भूमिका और राजनीतिक रुख पर सवाल उठने लगे थे।

हालांकि, उस समय फैसल रहमान ने सफाई देते हुए कहा था कि उनकी मां की अचानक तबीयत बिगड़ जाने के कारण वे वोटिंग में शामिल नहीं हो सके। लेकिन अब उनकी मुख्यमंत्री से मुलाकात ने इन अटकलों को फिर हवा दे दी है।

सीएम से मुलाकात, विकास की बात या सियासी संकेत?

फैसल रहमान ने खुद सोशल मीडिया के जरिए जानकारी दी कि उन्होंने ढाका क्षेत्र के विकास को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से शिष्टाचार मुलाकात की। इस दौरान सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, सिंचाई और अन्य बुनियादी सुविधाओं पर विस्तार से चर्चा हुई।

रहमान के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने उनकी मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाया और क्षेत्र के विकास के लिए सहयोग का भरोसा दिया। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषक इस मुलाकात को केवल विकास से जोड़कर नहीं देख रहे, बल्कि इसे बड़े सियासी संकेत के तौर पर भी आंक रहे हैं।

समितियों में जिम्मेदारी, बढ़ी सियासी गर्मी

इस बीच बिहार विधानसभा की 19 समितियों के गठन में भी फैसल रहमान का नाम सामने आया है। उन्हें एक समिति का अध्यक्ष बनाया गया है, जो 2026-27 वित्तीय वर्ष के लिए गठित की गई है। यह फैसला भी कई मायनों में चौंकाने वाला माना जा रहा है, क्योंकि राज्यसभा चुनाव में वोटिंग से दूर रहने के बावजूद उन्हें यह जिम्मेदारी दी गई है।

इसी तरह कांग्रेस के विधायक मनोहर प्रसाद सिंह, जो वोटिंग के दौरान अनुपस्थित थे, उन्हें भी समिति अध्यक्ष बनाया गया है। विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार की मंजूरी के बाद इन समितियों का गठन किया गया है।

क्या बदल रहा है बिहार का सियासी समीकरण?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राज्यसभा चुनाव के बाद से बिहार में नए समीकरण बनते दिख रहे हैं। इससे पहले कांग्रेस के तीन विधायक, जो वोटिंग के दौरान गायब थे, उन्होंने भी सरकार के मंत्री अशोक चौधरी से मुलाकात की थी। अब फैसल रहमान की सीएम से मुलाकात को उसी कड़ी में जोड़कर देखा जा रहा है।

RJD के सामने बढ़ सकती है चुनौती

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा असर RJD पर पड़ सकता है। वर्तमान में बिहार विधानसभा में RJD के पास 25 विधायक हैं, जिसके आधार पर उसे मुख्य विपक्षी दल का दर्जा मिला हुआ है। 243 सदस्यीय विधानसभा में 10% यानी कम से कम 25 विधायकों का होना जरूरी है।

अगर किसी कारणवश फैसल रहमान पार्टी से अलग होते हैं या उन पर कार्रवाई होती है, तो RJD के विधायकों की संख्या घटकर 24 हो जाएगी। ऐसी स्थिति में पार्टी मुख्य विपक्षी दल का दर्जा खो सकती है और तेजस्वी यादव की नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी भी खतरे में पड़ सकती है।

फिलहाल बढ़ी सियासी सरगर्मी

फिलहाल फैसल रहमान की इस मुलाकात ने बिहार की राजनीति में हलचल जरूर बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह मुलाकात सिर्फ विकास तक सीमित रहती है या राज्य की सियासत में कोई बड़ा बदलाव लेकर आती है।

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