
पटना/बक्सर: मुख्यमंत्री की सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर लापरवाही के मामले में बिहार सरकार ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की है। बक्सर नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी कुमार ऋत्विक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। नगर विकास एवं आवास विभाग ने जांच रिपोर्ट के आधार पर यह कार्रवाई करते हुए उनके खिलाफ विभागीय कार्यवाही शुरू करने का भी निर्णय लिया है।
हेलीकॉप्टर लैंडिंग नहीं होने पर मचा था हड़कंप
दरअसल, 23 मई 2026 को मुख्यमंत्री का बक्सर के किला मैदान में कार्यक्रम प्रस्तावित था। लेकिन निर्धारित स्थल पर मुख्यमंत्री के हेलीकॉप्टर की लैंडिंग नहीं हो सकी। इस घटना को सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर चूक माना गया और पूरे मामले की जांच के आदेश दिए गए।
जांच रिपोर्ट में मिली लापरवाही
मामले की जांच के लिए अपर समाहर्ता (ADM) बक्सर की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की गई थी। जांच पूरी होने के बाद जिला पदाधिकारी ने 1 जून को अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को भेजी।
रिपोर्ट में कार्यपालक पदाधिकारी कुमार ऋत्विक की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए गए। जांच में पाया गया कि उन्होंने अपने कर्तव्यों का समुचित निर्वहन नहीं किया और वरीय अधिकारियों के निर्देशों का पालन करने में भी लापरवाही बरती।
आचार नियमावली के उल्लंघन का आरोप
सरकार ने माना कि मुख्यमंत्री की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े मामले में हुई यह चूक बेहद गंभीर है। विभागीय जांच में कुमार ऋत्विक का आचरण बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के नियम-3 के प्रतिकूल पाया गया।
इसके आधार पर बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के तहत उन्हें निलंबित कर दिया गया है।
मुजफ्फरपुर रहेगा मुख्यालय
निलंबन अवधि के दौरान कुमार ऋत्विक का मुख्यालय नगर आयुक्त, नगर निगम मुजफ्फरपुर कार्यालय निर्धारित किया गया है। इस दौरान उन्हें केवल नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता (Subsistence Allowance) मिलेगा।
विभागीय कार्रवाई भी होगी
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह केवल प्रारंभिक कार्रवाई है। जल्द ही उनके खिलाफ विस्तृत आरोप पत्र (चार्जशीट) जारी किया जाएगा और नियमित विभागीय कार्यवाही भी शुरू की जाएगी।
प्रशासनिक हलकों में चर्चा
मुख्यमंत्री की सुरक्षा से जुड़े मामले में हुई इस कार्रवाई के बाद प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज हो गई है। अधिकारियों को सुरक्षा और वीआईपी कार्यक्रमों से जुड़े प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करने का संदेश दिया गया है।
सरकार का मानना है कि इस तरह की लापरवाही किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जा सकती, खासकर तब जब मामला मुख्यमंत्री की सुरक्षा से जुड़ा हो।


