
- नालंदा जिले में बढ़ते अपराध और प्रशासनिक विफलता के खिलाफ ‘जन सुराज’ ने मोर्चा खोल दिया है; पार्टी के प्रदेश स्तरीय नेताओं ने गुरुवार को नूरसराय और मघड़ा का दौरा कर सरकार की संवेदनहीनता पर तीखे प्रहार किए।
- नूरसराय में छेड़खानी और दुष्कर्म के प्रयास की शिकार महिला के परिजनों से मिलकर पूर्व विधायक किशोर कुमार मुन्ना ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा— “अगर उनकी अपनी बेटी होती, तो शायद उन्हें बिहार की बेटियों का दर्द समझ में आता।”
- उपमुख्यमंत्री और गृहमंत्री सम्राट चौधरी के कार्यकाल के पिछले तीन महीनों को ‘अपराध का स्वर्ण काल’ बताते हुए जन सुराज ने आरोप लगाया कि एनडीए के नेता केवल अगला मुख्यमंत्री तय करने में व्यस्त हैं, जबकि राज्य की कानून-व्यवस्था भगवान भरोसे है।
- नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की चुप्पी पर भी सवाल उठाए गए; जन सुराज ने पूछा कि आखिर विपक्ष की आवाज सड़कों पर क्यों नहीं गूँज रही और वे पीड़ितों के आंसू पोंछने घटनास्थल पर क्यों नहीं पहुँच रहे?
- मघड़ा स्थित शीतला माता मंदिर हादसे को ‘प्रशासनिक हत्या’ करार देते हुए जन सुराज ने मांग की है कि केवल पुजारियों पर कार्रवाई काफी नहीं, बल्कि उन अधिकारियों पर भी गाज गिरे जिन्होंने भीड़ प्रबंधन में घोर लापरवाही बरती।
पटना/नालंदा (द वॉयस ऑफ बिहार)।
सियासत के गढ़ में संवेदना की तलाश: जन सुराज का नालंदा दौरा
बिहार की राजनीति में ‘तीसरे विकल्प’ के रूप में उभर रहे जन सुराज ने गुरुवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह जिले नालंदा में सरकार की घेराबंदी की। नालंदा, जिसे ज्ञान और शांति की धरती कहा जाता है, वहां हाल के दिनों में घटी दो बड़ी घटनाओं—नूरसराय में महिला के साथ हुई दरिंदगी और मघड़ा मंदिर में मची भगदड़—ने प्रशासनिक तंत्र की कलई खोल दी है। इन घटनाओं के बाद पीड़ितों के जख्मों पर मरहम लगाने और व्यवस्था को आईना दिखाने के लिए जन सुराज के वरिष्ठ नेता व पूर्व विधायक किशोर कुमार मुन्ना के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल नालंदा पहुंचा। इस दौरे ने न केवल पीड़ित परिवारों को ढांढस बंधाया, बल्कि पटना की सत्ता के गलियारों में भी खलबली मचा दी है।
नूरसराय कांड: “बेटियों की फिक्र नहीं, केवल राज सिंहासन की चिंता”
नूरसराय थाना क्षेत्र के एक गांव में एक विवाहिता के साथ सरेआम हुई अभद्रता और दुष्कर्म के प्रयास की घटना ने पूरे बिहार को झकझोर दिया है। पीड़ित परिवार से मुलाकात के बाद किशोर कुमार मुन्ना के तेवर काफी तल्ख नजर आए। उन्होंने कहा कि यह घटना केवल एक अपराध नहीं, बल्कि वहशीपन और दरिंदगी की पराकाष्ठा है। मुन्ना ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को सीधे निशाने पर लेते हुए कहा कि मुख्यमंत्री को शायद बेटियों के महत्व की जानकारी नहीं है। उन्होंने एक बेहद भावुक और तीखा बयान देते हुए कहा, “नीतीश कुमार जी का एक बेटा है, जिसे वे किसी भी तरह राज सिंहासन पर बैठाना चाहते हैं। लेकिन अगर उनकी अपनी कोई बेटी होती, तो शायद वे आज इस पीड़ित परिवार की सिसकियां सुन पाते। अपराधी खुलेआम घूम रहे हैं और पुलिस केवल ‘आईवॉश’ (खानापूर्ति) कर रही है।”
विपक्ष की चुप्पी पर सवाल: “कहाँ छिपे हैं तेजस्वी यादव?”
जन सुराज ने केवल सत्ता पक्ष पर ही नहीं, बल्कि मुख्य विपक्षी दल आरजेडी और उसके नेता तेजस्वी यादव पर भी कड़ा प्रहार किया। किशोर कुमार मुन्ना ने सवाल उठाया कि आखिर नेता प्रतिपक्ष इस जघन्य मामले पर चुप्पी क्यों साधे हुए हैं? उन्होंने कहा कि बिहार की मां-बहनें आज तेजस्वी यादव से पूछ रही हैं कि वे कब प्रतिपक्ष की असली आवाज बनेंगे। मणिपुर जैसी घटनाओं की तुलना बिहार से करते हुए उन्होंने पूछा कि तेजस्वी यादव सड़कों पर उतरकर प्रतिरोध क्यों नहीं जाहिर कर रहे? जन सुराज का आरोप है कि विपक्ष भी केवल सत्ता के समीकरणों को साधने में लगा है और जनता के असल मुद्दों से उसका कोई सरोकार नहीं रह गया है।
सम्राट चौधरी के गृह मंत्रालय पर हमला: “3 महीने और बेखौफ अपराधी”
बिहार में हुए हालिया सत्ता परिवर्तन के बाद जब से बीजेपी के सम्राट चौधरी ने गृह विभाग की कमान संभाली है, जन सुराज ने उसे अपराध के ग्राफ से जोड़कर देखा है। किशोर कुमार मुन्ना ने आंकड़ों और घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि पिछले तीन महीनों में बिहार का ऐसा कोई कोना नहीं बचा जहाँ महिलाओं की इज्जत के साथ खिलवाड़ न हो रहा हो। उन्होंने आरोप लगाया कि एनडीए सरकार में शामिल दल केवल इस बात की लड़ाई लड़ रहे हैं कि अगला मुख्यमंत्री कौन बनेगा। मुख्यमंत्री पद की इस बंदरबांट के बीच राज्य की अबलाएं और बेटियां असुरक्षित हो गई हैं। मुन्ना ने कहा कि जिन महिलाओं ने बीजेपी और एनडीए को वोट देकर सत्ता तक पहुंचाया, आज वे ही सबसे ज्यादा प्रताड़ित महसूस कर रही हैं।
मघड़ा मंदिर हादसा: “भीड़ इतनी नहीं थी कि लोग मरें, यह प्रशासनिक विफलता है”
मघड़ा के मां शीतला मंदिर में हुई भगदड़ को लेकर भी जन सुराज ने प्रशासन को आड़े हाथों लिया। मंदिर का निरीक्षण करने के बाद जन सुराज के नेताओं ने कहा कि यह एक पौराणिक और भव्य मंदिर है, जहाँ हर साल चैत के अंतिम मंगलवार को भारी भीड़ जुटती है। यह बात प्रशासन को पहले से पता थी, फिर भी सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं किए गए? किशोर कुमार मुन्ना ने कहा कि वहां भीड़ इतनी ज्यादा नहीं थी कि आठ लोगों की जान चली जाए। यह सीधे तौर पर जिला प्रशासन की विफलता है। उन्होंने कहा कि केवल कुछ पुजारियों को गिरफ्तार कर लेने से सिस्टम की खामियां नहीं छिपेंगी। इसके लिए उन अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए जो ड्यूटी से नदारद थे या जिन्होंने इस संवेदनशील दिन को हल्के में लिया।
बिहार की छवि पर गहरा दाग: “ज्ञान की धरती अब अपराध की मंडी”
नालंदा की धरती जो कभी नालंदा विश्वविद्यालय और भगवान बुद्ध के उपदेशों के लिए जानी जाती थी, आज वह अपराध और प्रशासनिक अराजकता की खबरों के कारण राष्ट्रीय स्तर पर शर्मसार हो रही है। जन सुराज के नेताओं ने कहा कि ऐसी घटनाओं से बिहार की छवि देश और दुनिया में खराब हो रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की है कि वे नालंदा के बेटे होने का धर्म निभाएं और केवल फाइलों में सुशासन का दावा न करें, बल्कि जमीन पर अपराधियों के भीतर कानून का खौफ पैदा करें।
जन सुराज की सक्रियता: जमीनी स्तर पर विकल्प की तलाश
नालंदा के इस दौरे में किशोर कुमार मुन्ना के साथ जन सुराज के कई प्रमुख चेहरे मौजूद थे, जिनमें बिहार मीडिया प्रभारी ओबैदुर हमान, पद्मा ओझा, इंदु सिन्हा, सोनाली आनंद और अनूप मैथिल शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने स्पष्ट किया कि जन सुराज केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पीड़ित परिवारों को कानूनी और सामाजिक सहायता भी उपलब्ध कराएगा। नालंदा के विभिन्न गांवों में जन सुराज के नेताओं की मौजूदगी यह संकेत दे रही है कि आने वाले समय में वे राज्य के ज्वलंत मुद्दों पर सरकार को चैन से बैठने नहीं देंगे।
निष्कर्ष: सत्ता और विपक्ष के बीच पिसती जनता
नालंदा की ये दो घटनाएं बिहार की वर्तमान राजनीतिक और सामाजिक स्थिति का आइना हैं। जहाँ एक ओर सत्ता पक्ष अपनी कुर्सियां बचाने और उत्तराधिकारी तय करने में लगा है, वहीं विपक्ष भी अपनी भूमिका निभाने में विफल नजर आ रहा है। ऐसे में जन सुराज का यह आक्रामक रुख उन लोगों के लिए एक उम्मीद की किरण है जो खुद को इस ‘पॉलिटिकल सिंडिकेट’ से अलग महसूस करते हैं। किशोर कुमार मुन्ना की यह ललकार क्या नीतीश सरकार की कार्यशैली में कोई बदलाव लाएगी या विपक्ष को उसकी नींद से जगाएगी, यह तो वक्त बताएगा। लेकिन इतना साफ है कि नालंदा की धरती अब न्याय मांग रही है।


