लालू के जन्मदिन में छोटू छलिया को मिला कंगन पर सियासत गरम, JDU ने दिखाई ED-IT नोटिस की धमकी

पटना: राष्ट्रीय जनता दल (RJD) सुप्रीमो Lalu Prasad Yadav के 79वें जन्मदिन समारोह में भोजपुरी लोकगायक छोटू छलिया को दिए गए कथित “हीरे के कंगन” को लेकर बिहार की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। इस मामले को लेकर जेडीयू और राजद आमने-सामने आ गए हैं।

जन्मदिन समारोह में मिला था उपहार

11 जून को पटना स्थित राबड़ी आवास में लालू प्रसाद यादव के जन्मदिन पर सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। कार्यक्रम में भोजपुरी लोकगायक छोटू छलिया ने पारंपरिक सोहर और लोकगीत प्रस्तुत किए।

बताया जाता है कि प्रस्तुति से प्रभावित होकर बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री Rabri Devi ने मंच पर ही अपने हाथों से कंगन उतारकर छोटू छलिया को भेंट कर दिया। इस दौरान वहां मौजूद नेताओं और कार्यकर्ताओं ने तालियां बजाकर कलाकार का सम्मान किया।

छोटू छलिया के बयान से शुरू हुआ विवाद

विवाद तब शुरू हुआ जब छोटू छलिया ने मीडिया से बातचीत में दावा किया कि उन्हें राबड़ी देवी द्वारा “हीरे का कंगन” उपहार में दिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि इससे पहले भी उन्हें सोने की चेन और अंगूठी जैसे उपहार मिल चुके हैं।

यह बयान सामने आते ही राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया।

JDU ने उठाए सवाल

जेडीयू के मुख्य प्रवक्ता और विधान पार्षद Neeraj Kumar ने इस मामले पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि यदि उपहार वास्तव में हीरे का कंगन है तो उसकी खरीद की रसीद और वैध दस्तावेज सार्वजनिक किए जाने चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि गायक का दावा सही है, तो संबंधित एजेंसियां इसकी जानकारी मांग सकती हैं। नीरज कुमार ने यह भी कहा कि वित्तीय लेन-देन और मूल्यवान उपहारों के मामलों में पारदर्शिता जरूरी है।

RJD ने किया पलटवार

विवाद बढ़ता देख राजद की ओर से सफाई भी सामने आई। पार्टी के वरिष्ठ नेता और विधान पार्षद Sunil Kumar Singh ने कहा कि छोटू छलिया ने भावनाओं में आकर कंगन को हीरे का बता दिया।

उन्होंने दावा किया कि उपहार को लेकर अनावश्यक राजनीतिक विवाद खड़ा किया जा रहा है और यह कहना सही नहीं होगा कि किसी कलाकार को हीरे का कंगन उपहार में दिया गया था।

राजनीतिक बयानबाजी तेज

इस पूरे घटनाक्रम के बाद बिहार की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। जेडीयू जहां इस मामले में पारदर्शिता की मांग कर रही है, वहीं राजद इसे अनावश्यक राजनीतिक मुद्दा बताकर खारिज कर रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में दिए गए उपहार को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक रंग ले चुका है और आने वाले दिनों में इस पर बयानबाजी और तेज हो सकती है।

क्या हो सकती है आगे की स्थिति?

फिलहाल इस मामले में किसी जांच एजेंसी की ओर से कोई आधिकारिक कार्रवाई या नोटिस जारी होने की जानकारी सामने नहीं आई है। हालांकि राजनीतिक बयानबाजी के कारण यह मुद्दा चर्चा में बना हुआ है।

अब सबकी नजर इस बात पर है कि यह विवाद केवल राजनीतिक आरोपों तक सीमित रहता है या फिर आगे किसी औपचारिक शिकायत अथवा जांच की दिशा में बढ़ता है।

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