
पटना: बिहार की राजधानी पटना में निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगाने के लिए शिक्षा विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। जिला शिक्षा कार्यालय ने सभी निजी विद्यालयों को निर्देश दिया है कि वे 30 जून 2026 तक अपनी वेबसाइट और शिक्षा विभाग के पोर्टल पर स्कूल से जुड़ी सभी अनिवार्य जानकारियां सार्वजनिक करें। ऐसा नहीं करने वाले स्कूलों के खिलाफ सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
अब छिपानी नहीं चलेगी स्कूल की जानकारी
शिक्षा विभाग को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कई निजी स्कूल अपनी वेबसाइट पर शिक्षकों, फीस, छात्रों और आधारभूत सुविधाओं से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी साझा नहीं कर रहे हैं। इससे अभिभावकों को स्कूल की वास्तविक स्थिति जानने में परेशानी हो रही थी।
अब सभी स्कूलों को निम्नलिखित जानकारियां सार्वजनिक करनी होंगी:
- विद्यालय में कार्यरत शिक्षकों की कुल संख्या
- शिक्षकों की शैक्षणिक एवं व्यावसायिक योग्यता
- छात्रों की कुल संख्या
- प्रत्येक कक्षा में छात्र-शिक्षक अनुपात
- स्कूल की फीस संरचना और अन्य शुल्क
- परिवहन व्यवस्था का पूरा विवरण
- स्कूल की मान्यता और उसकी वैधता
बस, वैन और परिवहन व्यवस्था का भी देना होगा हिसाब
निजी स्कूलों को यह भी बताना होगा कि उनके पास कितनी स्कूल बसें, मिनी बसें और वैन संचालित हैं। साथ ही वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था और संचालन संबंधी जानकारी भी वेबसाइट पर अपलोड करनी होगी।
जुलाई में चलेगा विशेष जांच अभियान
जिला प्रशासन ने निजी स्कूलों की निगरानी के लिए 1 जुलाई से 31 जुलाई तक विशेष जांच अभियान चलाने का फैसला किया है। इस दौरान शिक्षा के अधिकार अधिनियम (RTE) और बिहार राज्य के बच्चों की मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा नियमावली के तहत स्कूलों की जांच की जाएगी।
आधार और APAAR रिकॉर्ड की होगी जांच
जांच अभियान के दौरान छात्रों के आधार और APAAR (Automated Permanent Academic Account Registry) रिकॉर्ड की भी गहन जांच की जाएगी। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि सभी छात्रों का डेटा अद्यतन और सत्यापित हो।
नियम तोड़ने वाले स्कूलों पर गिरेगी गाज
जिला शिक्षा कार्यालय ने साफ कर दिया है कि निर्धारित समय सीमा तक जानकारी अपलोड नहीं करने वाले स्कूलों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
अभिभावकों को मिलेगा बड़ा फायदा
शिक्षा विभाग का मानना है कि इस पहल से निजी विद्यालयों में पारदर्शिता बढ़ेगी, फीस और सुविधाओं को लेकर अभिभावकों को स्पष्ट जानकारी मिलेगी तथा शिक्षा व्यवस्था अधिक जवाबदेह और व्यवस्थित बन सकेगी। अब सभी की नजर 30 जून की समय सीमा और जुलाई में होने वाली जांच पर टिकी है।


