क्लीवलैंड मेमोरियल हटाने की मांग पर अश्विनी चौबे ने दी चेतावनी, कहा- 10 दिन में नहीं हटा तो होगा जनआंदोलन

भागलपुर, 18 जुलाई। पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने भागलपुर के सैंडिस कंपाउंड में स्थापित क्लीवलैंड मेमोरियल को गुलामी का प्रतीक और विदेशी दास्तां बताते हुए इसे तुरंत हटाने की मांग की है। गुरुवार को आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में चौबे ने जिला प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि 10 दिनों के भीतर इस स्मारक को नहीं हटाया गया, तो वे इसके खिलाफ जनआंदोलन शुरू करेंगे।

चौबे ने यह भी बताया कि इस मुद्दे को उन्होंने मेयर डॉ. बसुंधरा लाल की उपस्थिति में राज्य के कला एवं संस्कृति मंत्री के समक्ष भी स्पष्ट रूप से उठाया है। उन्होंने सवाल किया कि “जिस अंग्रेज अधिकारी ने स्वतंत्रता सेनानी तिलकामांझी को फांसी दी, उसका स्मारक क्यों बना हुआ है?” उन्होंने मांग की कि क्लीवलैंड मेमोरियल की जांच हो और उसका जीर्णोद्धार कराने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई हो। उन्होंने साथ ही सुझाव दिया कि वहां स्वामी विवेकानंद की मूर्ति स्थापित और संरक्षित की जाए।


“सनातन संग भारत” जन चेतना अभियान की घोषणा

अश्विनी चौबे ने घोषणा की कि अगस्त महीने से वे “सनातन संग भारत” जन चेतना अभियान की शुरुआत करेंगे, जिसकी शुरुआत सीतामढ़ी के जानकी मंदिर से होगी। इस दौरान उनकी लिखी पुस्तक “सनातन संग भारत” का भी विमोचन किया जाएगा।

उन्होंने यह भी मांग रखी कि सनातन धर्म की शिक्षा को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए, और इतिहास की पुस्तकों से मुगलकाल की विषयवस्तु हटाई जाए। उन्होंने कहा, “अब बच्चों को अकबर महान नहीं, सनातन महान और भारत महान पढ़ाया जाना चाहिए।


राजनीति से अलग, लेकिन भागलपुर से उम्मीदवारी पर बोले – पार्टी तय करेगी

पूर्व मंत्री ने स्पष्ट किया कि वे अब चुनावी राजनीति में सक्रिय नहीं रहेंगे। हालांकि, भागलपुर सीट से उम्मीदवारी को लेकर उन्होंने कहा कि पार्टी निर्णय लेगी। उनके अनुसार, “सैकड़ों समर्पित कार्यकर्ता हैं जो इस जिम्मेदारी को निभाने में सक्षम हैं।”

सीएम फेस को लेकर उन्होंने कहा कि इस विषय पर निर्णय चुनाव बाद एनडीए विधायक दल द्वारा लिया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल नीतीश कुमार एनडीए गठबंधन के नेता हैं।


2023 से 2030 तक पांच सनातन महाकुंभ

चौबे ने बताया कि वे पटना में आयोजित सनातन महाकुंभ के संकल्प के तहत 2030 तक पांच महाकुंभ आयोजित करेंगे। इसका अंतिम आयोजन मंदार महाकुंभ होगा, जहां उनके अनुसार मंदारेश्वर काशी विश्वनाथ ने 80 हजार वर्षों तक गुप्त तपस्या की थी। जल्द ही मंदार पर मंदिर जीर्णोद्धार कार्य शुरू किया जाएगा।


 

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