खबर के मुख्य बिंदु (Highlights):
- भूख हड़ताल: मुख्यमंत्री आवास के बाहर अमरेंद्र दास त्रिलोकी ने शुरू किया अनिश्चितकालीन अनशन।
- भावुक अपील: “नीतीश कुमार हमारे परिवार का हिस्सा, उन्हें दिल्ली नहीं जाने देंगे।”
- सुशासन का हवाला: 2005 से पहले की बदहाली और अब की 23 घंटे बिजली का किया जिक्र।
- सियासी हलचल: राज्यसभा नामांकन के बाद समर्थकों के बीच बढ़ रहा है ‘इमोशनल’ आक्रोश।
पटना: बिहार की सियासत में ‘नीतीश युग’ के दिल्ली प्रस्थान की खबरों ने उनके समर्थकों के दिल को झकझोर दिया है। शुक्रवार की सुबह राजधानी पटना के 1, अणे मार्ग (मुख्यमंत्री आवास) के बाहर एक अलग ही नजारा देखने को मिला। जेडीयू के एक कट्टर समर्थक अमरेंद्र दास त्रिलोकी ने हाथ में तख्ती लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी है। उनका संकल्प सीधा है— “नीतीश कुमार राज्यसभा नहीं जाएंगे, वे बिहार के मुख्यमंत्री बने रहकर ही सूबे की सेवा करेंगे।”
“2005 की यादें डराती हैं, नीतीश की नीतियां सुकून देती हैं”
अनशन पर बैठे अमरेंद्र दास त्रिलोकी ने समाचार एजेंसी से बातचीत में अपना दर्द साझा किया:
- पुराना दौर: त्रिलोकी ने कहा कि 2005 से पहले बिहार में कानून-व्यवस्था नाम की कोई चीज नहीं थी, हर तरफ अन्याय था।
- बदलाव की बयार: नीतीश कुमार के आने के बाद शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और महिला सशक्तिकरण में क्रांतिकारी बदलाव आए।
- बिजली का चमत्कार: उन्होंने विशेष रूप से जिक्र किया कि आज बिहार में 23 घंटे बिजली रहती है, जो नीतीश कुमार के विजन के बिना मुमकिन नहीं था।
इमोशनल कार्ड: “वह हमारा हिस्सा हैं”
त्रिलोकी ने भावुक होते हुए कहा कि बिहार के लोग नीतीश कुमार को केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि अपने परिवार का बड़ा सदस्य मानते हैं।
”जैसे वह पूरे बिहार को अपना परिवार मानते हैं, वैसे ही हम उन्हें अपना हिस्सा मानते हैं। जब तक वे स्वस्थ हैं, उन्हें बिहार को सजाना चाहिए। हम उन्हें दिल्ली नहीं जाने देंगे।”


