नवादा में पंचायत के फैसले के बाद महिला ने की आत्महत्या, प्रेम संबंध टूटने से सदमे में थी दो बच्चों की मां

नवादा, 20 मई 2026: बिहार के नवादा जिले से एक बेहद संवेदनशील और दर्दनाक मामला सामने आया है, जहां पारिवारिक और सामाजिक तनाव के बीच एक विवाहित महिला ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। बताया जा रहा है कि महिला अपने चचेरे देवर के साथ प्रेम संबंध में थी और पंचायत द्वारा दोनों को अलग रहने का फैसला सुनाए जाने के बाद वह मानसिक रूप से टूट गई थी। घटना के बाद पूरे गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है।

मृतका की पहचान सिरदला थाना क्षेत्र के केबाल गांव निवासी ललिता देवी के रूप में हुई है। वह लगभग 30 वर्ष की थीं और अपने पीछे दो बेटे और एक बेटी छोड़ गई हैं। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है।

दो साल से चल रहा था प्रेम संबंध

स्थानीय लोगों और परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार, ललिता देवी का पिछले करीब दो वर्षों से अपने चचेरे देवर के साथ प्रेम संबंध था। इस बात की जानकारी धीरे-धीरे परिवार के अन्य सदस्यों तक भी पहुंच गई थी, लेकिन मामला लंबे समय तक घर के अंदर ही दबा रहा।

बताया जाता है कि महिला का पति अजय कुमार काम के सिलसिले में चेन्नई में रहते थे। वह अक्सर बाहर ही रहते थे, जबकि परिवार गांव में रहता था। इसी दौरान महिला और उसके चचेरे देवर के बीच नजदीकियां बढ़ीं।

गांव के कुछ लोगों का कहना है कि दोनों के संबंधों की चर्चा पिछले कई महीनों से इलाके में हो रही थी। हालांकि परिवार इस मामले को सार्वजनिक नहीं करना चाहता था।

पति के गांव लौटने के बाद बढ़ा विवाद

रविवार को अजय Kumar चेन्नई से गांव लौटे थे। इसी दौरान उन्हें पत्नी और चचेरे भाई के संबंधों की जानकारी मिली। जानकारी सामने आने के बाद परिवार में तनाव बढ़ गया और रिश्तेदारों के बीच बातचीत शुरू हुई।

मामला इतना बढ़ गया कि गांव में पंचायत बुलानी पड़ी। पंचायत में महिला, उसका पति और चचेरा देवर तीनों मौजूद थे। गांव के बुजुर्गों और पंचों ने सभी पक्षों की बात सुनी।

सूत्रों के मुताबिक पंचायत में यह फैसला लिया गया कि महिला और उसके चचेरे देवर के बीच अब किसी प्रकार का संबंध नहीं रहेगा। दोनों को भविष्य में एक-दूसरे से दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई।

पंचायत के फैसले के बाद टूट गई महिला

परिवार के लोगों का कहना है कि पंचायत के दौरान महिला काफी चुप थी और फैसले के बाद मानसिक रूप से बेहद परेशान दिखाई दे रही थी। हालांकि उस समय किसी ने यह नहीं सोचा था कि वह इतना बड़ा कदम उठा सकती है।

बताया जा रहा है कि पंचायत खत्म होने के बाद रात में महिला अपने कमरे में चली गई। अगले दिन सुबह काफी देर तक जब कमरे का दरवाजा नहीं खुला तो परिवार वालों को शक हुआ।

इसके बाद परिजनों ने आवाज लगाई, लेकिन अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। आखिरकार दीवार तोड़कर कमरे में प्रवेश किया गया, जहां महिला फंदे से लटकी मिली।

यह दृश्य देखकर परिवार में चीख-पुकार मच गई और पूरे गांव में सनसनी फैल गई।

पुलिस ने शुरू की जांच

घटना की सूचना मिलते ही सिरदला थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए नवादा सदर अस्पताल भेज दिया।

प्राथमिक जांच में पुलिस इसे आत्महत्या का मामला मान रही है। हालांकि पुलिस हर पहलू से मामले की जांच कर रही है ताकि घटना के पीछे की वास्तविक परिस्थितियों को स्पष्ट किया जा सके।

एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि परिजनों और ग्रामीणों से पूछताछ की जा रही है। फिलहाल किसी तरह की आपराधिक साजिश के संकेत नहीं मिले हैं, लेकिन जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति साफ हो पाएगी।

तीन छोटे बच्चों पर टूटा दुखों का पहाड़

इस घटना के बाद सबसे अधिक चिंता महिला के तीन बच्चों को लेकर जताई जा रही है। ललिता देवी अपने पीछे दो बेटे और एक बेटी छोड़ गई हैं, जिनकी उम्र अभी काफी कम बताई जा रही है।

गांव के लोगों का कहना है कि बच्चों को अभी तक पूरी तरह समझ नहीं है कि आखिर उनकी मां के साथ क्या हुआ। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है और घर में मातम पसरा हुआ है।

स्थानीय महिलाओं ने बताया कि ललिता देवी सामान्य स्वभाव की थीं, लेकिन पिछले कुछ दिनों से वह काफी तनाव में दिखाई दे रही थीं।

गांव में चर्चा का विषय बना मामला

घटना के बाद पूरे इलाके में इस मामले की चर्चा हो रही है। ग्रामीणों के बीच पंचायत व्यवस्था, पारिवारिक रिश्तों और सामाजिक दबाव को लेकर भी बातचीत हो रही है।

कुछ लोगों का कहना है कि पंचायत के फैसले ने महिला को मानसिक रूप से झकझोर दिया, जबकि कुछ लोग इसे पारिवारिक तनाव और सामाजिक दबाव का परिणाम मान रहे हैं।

गांव के बुजुर्गों का कहना है कि ऐसे मामलों में संवेदनशीलता और समझदारी से काम लेने की जरूरत होती है, क्योंकि सामाजिक दबाव कई बार लोगों को मानसिक रूप से तोड़ देता है।

मानसिक तनाव और सामाजिक दबाव पर उठे सवाल

इस घटना ने एक बार फिर मानसिक तनाव और सामाजिक दबाव जैसे मुद्दों को सामने ला दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि पारिवारिक विवाद और सामाजिक शर्मिंदगी कई बार लोगों को गहरे अवसाद में धकेल देती है।

ग्रामीण इलाकों में आज भी कई मामलों में सामाजिक फैसलों का लोगों पर गहरा मानसिक असर पड़ता है। ऐसे में परिवार और समाज की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

  • फिलहाल नवादा पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद कई और तथ्य सामने आने की संभावना है। वहीं गांव में इस दर्दनाक घटना के बाद मातमी माहौल बना हुआ है।
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