मोहनिया चेकपोस्ट पर एसपी की आधी रात छापेमारी, अवैध वसूली के आरोप में चार सैप जवान समेत नौ लोग गिरफ्तार

कैमूर। बिहार के कैमूर जिले में मोहनिया जीटी रोड चेकपोस्ट पर अवैध वसूली के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक कथित संगठित नेटवर्क का खुलासा किया है। जिले के पुलिस अधीक्षक शिखर चौधरी के निर्देश पर आधी रात चलाए गए विशेष अभियान में चार सैप (SAP) जवानों और पांच कथित इंट्री माफियाओं को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने मौके से 57,760 रुपये नकद और नौ मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि मालवाहक ट्रकों से कथित रूप से अवैध वसूली कर उन्हें बिना निर्धारित प्रक्रिया के बिहार की सीमा में प्रवेश कराया जा रहा था।

पुलिस के अनुसार, पिछले कुछ समय से मोहनिया चेकपोस्ट पर ट्रकों से अवैध वसूली और परिवहन नियमों की अनदेखी किए जाने की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। शिकायतों में आरोप लगाया गया था कि कुछ लोग सरकारी व्यवस्था का दुरुपयोग कर ट्रक चालकों से नकद राशि वसूल रहे हैं। शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक ने पूरे मामले की गोपनीय जांच कराई। सूचना की पुष्टि होने के बाद विशेष छापेमारी की योजना बनाई गई।

मंगलवार देर रात मोहनिया एसडीपीओ गोपाल कृष्ण, ट्रैफिक एसडीपीओ और भारी संख्या में पुलिस बल ने संयुक्त रूप से चेकपोस्ट पर अचानक छापेमारी की। पुलिस टीम के पहुंचते ही वहां मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। हालांकि पुलिस ने चारों ओर से घेराबंदी कर मौके पर मौजूद नौ लोगों को गिरफ्तार कर लिया। कार्रवाई के दौरान किसी को भागने का मौका नहीं मिला।

जांच में सामने आया कि परिवहन विभाग के वाहन जांच केंद्र के आसपास दोनों लेनों के किनारे अस्थायी झोपड़ियां बनाई गई थीं। पुलिस का आरोप है कि इन्हीं झोपड़ियों का उपयोग अवैध वसूली के संचालन और नकदी रखने के लिए किया जाता था। उत्तर प्रदेश और गया की ओर से आने वाले मालवाहक वाहनों को सड़क पर ट्रॉली लगाकर रोका जाता था और उसके बाद कथित रूप से नकद राशि की मांग की जाती थी।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, ट्रक चालकों से पैसा मिलने के बाद ही सड़क से ट्रॉली हटाई जाती थी और उन्हें आगे जाने दिया जाता था। जांच में यह भी सामने आया कि वसूली गई राशि को तत्काल झोपड़ियों में सुरक्षित रखा जाता था, ताकि मौके पर कोई संदेह न हो। छापेमारी के दौरान पुलिस ने इन्हीं स्थानों से 57,760 रुपये नकद बरामद किए। इसके अलावा नौ मोबाइल फोन भी जब्त किए गए हैं, जिनकी कॉल डिटेल और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की जाएगी।

कार्रवाई के दौरान कई ट्रक चालकों ने भी पुलिस अधिकारियों को अपनी शिकायतें बताईं। चालकों का आरोप था कि उनसे कथित रूप से जबरन पैसे वसूले जाते थे। यदि कोई चालक विरोध करता था तो उसे काफी देर तक रोककर रखा जाता था या मानसिक रूप से परेशान किया जाता था। कई चालकों ने यह भी बताया कि राशि लेने के बावजूद उन्हें किसी प्रकार की सरकारी रसीद नहीं दी जाती थी और न ही वहां चालान काटने के लिए कोई अधिकृत मशीन उपलब्ध थी। इन बयानों को भी पुलिस ने जांच का हिस्सा बनाया है।

प्रारंभिक जांच में पुलिस को यह भी संदेह है कि यह गतिविधि केवल अवैध वसूली तक सीमित नहीं थी, बल्कि इससे सरकारी राजस्व को भी नुकसान पहुंच रहा था। अधिकारियों के अनुसार, कुछ वाहनों को निर्धारित सरकारी प्रक्रिया और टैक्स भुगतान से बचाकर आगे भेजा जा रहा था। यदि जांच में यह आरोप सही साबित होता है तो इससे राज्य सरकार को आर्थिक नुकसान पहुंचने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

पुलिस ने जिन लोगों को गिरफ्तार किया है, उनमें चार सैप जवान और पांच कथित इंट्री माफिया शामिल हैं। गिरफ्तार सैप जवानों की पहचान नवल किशोर प्रसाद, अनिल कुमार सिंह, चंद्रभूषण सिंह यादव और मनोज कुमार के रूप में हुई है। वहीं कथित इंट्री माफियाओं में दुर्गावती थाना क्षेत्र के धनेक्षा गांव निवासी अनिल कुमार, भलुआरी गांव निवासी मदन खरवार, मोहनिया के उसरी गांव निवासी वीर बहादुर पासवान, अकोढ़ी गांव निवासी संतोष कुमार और कुदरा निवासी नीरज कुमार सिंह शामिल हैं।

पुलिस ने सभी आरोपितों के खिलाफ मोहनिया थाने में प्राथमिकी दर्ज कर ली है। अब पूरे नेटवर्क की विस्तृत जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जब्त मोबाइल फोन, नकदी और अन्य साक्ष्यों के आधार पर यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि इस कथित नेटवर्क से और कौन-कौन लोग जुड़े हुए थे। जांच इस बात की भी की जा रही है कि क्या इस अवैध गतिविधि का संबंध किसी बड़े गिरोह या अन्य व्यक्तियों से था।

कैमूर पुलिस का कहना है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष तरीके से की जाएगी और यदि किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सरकारी व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने या भ्रष्टाचार में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

मोहनिया चेकपोस्ट पहले भी इस तरह के मामलों को लेकर चर्चा में रह चुका है। वर्ष 2016 में भी इसी चेकपोस्ट पर तत्कालीन पुलिस अधीक्षक हरप्रीत कौर के नेतृत्व में बड़ी कार्रवाई हुई थी। उस समय 32 सैप जवानों को गिरफ्तार किया गया था और उनके पास से लाखों रुपये नकद बरामद किए गए थे। बाद में विभागीय कार्रवाई के तहत संबंधित जवानों को सेवा से बर्खास्त भी किया गया था। इस पुराने मामले के कारण मोहनिया चेकपोस्ट पहले से ही संवेदनशील माना जाता रहा है।

हालिया कार्रवाई के बाद पुलिस प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि जिले में अवैध वसूली, भ्रष्टाचार और राजस्व को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा। अधिकारियों का कहना है कि चेकपोस्टों पर निगरानी और सख्त की जाएगी तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल सभी गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ जारी है। पुलिस पूरे मामले के वित्तीय लेनदेन, संभावित संपर्कों और कथित नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान करने में जुटी है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि यह कथित अवैध वसूली का नेटवर्क कितना बड़ा था और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही। वहीं पुलिस का कहना है कि कानून के दायरे में रहकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

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