बिहार के इन स्टेट हाईवे पर लग सकता है टोल टैक्स, सरकार ने शुरू की तैयारी, नवंबर-दिसंबर से हो सकती है शुरुआत

पटना। बिहार में राष्ट्रीय राजमार्गों के बाद अब राज्य राजमार्गों (स्टेट हाईवे) पर भी टोल टैक्स वसूली की तैयारी तेज हो गई है। पथ निर्माण विभाग राज्य के प्रमुख और व्यस्त स्टेट हाईवे पर टोल प्लाजा स्थापित करने की योजना पर तेजी से काम कर रहा है। विभाग की ओर से ऐसे राजमार्गों की सूची तैयार की गई है, जहां वाहनों की आवाजाही सबसे अधिक होती है और भविष्य में इन्हीं मार्गों पर टोल टैक्स लागू किया जा सकता है। यदि सभी प्रक्रियाएं तय समय पर पूरी हो जाती हैं, तो राज्य में नवंबर या दिसंबर 2026 से टोल टैक्स वसूली शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।

बिहार में सड़क अवसंरचना को आधुनिक बनाने और उसके रखरखाव के लिए वित्तीय संसाधन जुटाने के उद्देश्य से यह योजना तैयार की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि बेहतर सड़कों के निर्माण, मरम्मत और रखरखाव के लिए स्थायी राजस्व स्रोत की आवश्यकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए स्टेट हाईवे पर टोल टैक्स लागू करने की दिशा में विभाग विभिन्न तकनीकी और प्रशासनिक पहलुओं का अध्ययन कर रहा है।

पथ निर्माण विभाग के अनुसार, टोल प्लाजा स्थापित करने के लिए कुछ निर्धारित मानकों का पालन किया जाएगा। सामान्य परिस्थितियों में किसी नगर निकाय की सीमा से 10 किलोमीटर के भीतर टोल प्लाजा स्थापित नहीं किया जाएगा। इसके अलावा एक ही दिशा में 40 किलोमीटर की दूरी के अंदर दूसरा टोल प्लाजा बनाने की अनुमति भी सामान्य रूप से नहीं होगी। हालांकि, यदि किसी मार्ग पर बड़ा पुल, विशेष परियोजना या अन्य विशेष परिस्थिति होगी तो नियमानुसार अपवाद भी संभव हो सकता है।

विभाग की योजना के अनुसार टोल शुल्क का भुगतान पूरी तरह आधुनिक व्यवस्था के तहत किया जाएगा। वाहन चालक नकद भुगतान के अलावा प्रीपेड कार्ड, स्मार्ट कार्ड और ट्रांसपोंडर जैसे डिजिटल माध्यमों से भी टोल शुल्क जमा कर सकेंगे। इससे टोल प्लाजा पर वाहनों की लंबी कतारों को कम करने और भुगतान प्रक्रिया को तेज बनाने में मदद मिलेगी। आने वाले समय में फास्टैग जैसी डिजिटल तकनीकों के व्यापक उपयोग की संभावना भी जताई जा रही है।

अधिकारियों के अनुसार फिलहाल टोल प्लाजा के संभावित स्थानों का सर्वे, यातायात का आकलन, तकनीकी अध्ययन और वित्तीय व्यवहार्यता पर काम चल रहा है। इसके बाद निर्माण कार्य, संचालन व्यवस्था और टोल शुल्क निर्धारण की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। विभाग का लक्ष्य है कि सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद वर्ष 2026 के अंतिम महीनों में टोल संग्रह शुरू किया जा सके।

राज्य सरकार जिन स्टेट हाईवे पर टोल टैक्स लागू करने पर विचार कर रही है, उनमें बिहार के कई महत्वपूर्ण मार्ग शामिल हैं। ये सड़कें विभिन्न जिलों को जोड़ने के साथ-साथ व्यापार, कृषि, शिक्षा और औद्योगिक गतिविधियों के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।

संभावित सूची में एसएच-1 (पटना–दानापुर), एसएच-2 (पटना–बिहटा), एसएच-7 (गया–पंचानपुर–टेकारी), एसएच-12 (सासाराम–डेहरी–अकोढ़ीगोला) और एसएच-18 (भागलपुर–हंसडीहा सीमा) प्रमुख रूप से शामिल हैं। इनके अलावा एसएच-46 (मुजफ्फरपुर–मीनापुर–शिवहर), एसएच-49 (हाजीपुर–महुआ–ताजपुर), एसएच-52 (मधुबनी–झंझारपुर–सुपौल) और एसएच-54 (बेगूसराय–रोसड़ा–समस्तीपुर) भी प्रस्तावित सूची में शामिल बताए जा रहे हैं।

इसी प्रकार एसएच-68 (पूर्णिया–बनमनखी–बिहारीगंज), एसएच-73 (मुजफ्फरपुर–पारू–केसरिया), एसएच-74 (हाजीपुर–वैशाली–पारू–केसरिया–अरेराज), एसएच-75 (सीतामढ़ी–शिवहर–मोतिहारी), एसएच-77 (हाजीपुर–महनार–मोहिउद्दीननगर) और एसएच-78 (दरभंगा–जाले–नेपाल सीमा) जैसे व्यस्त मार्ग भी टोल वसूली के लिए संभावित दायरे में रखे गए हैं।

सूची में एसएच-81 (आरा–पीरो–बिक्रमगंज), एसएच-88 (नवादा–हिसुआ–बिहारशरीफ), एसएच-90 (छपरा–एकमा–सिवान), एसएच-95 (गंगा पथ से जुड़ा निर्माणाधीन नया कॉरिडोर) तथा एसएच-102 (बिहिया–जगदीशपुर–पीरो–बिहटा) भी शामिल हैं। इन मार्गों पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में छोटे-बड़े व्यावसायिक और निजी वाहन चलते हैं, जिसके कारण इन्हें टोल संग्रह के लिए उपयुक्त माना जा रहा है।

हालांकि, विभाग ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि इन सभी स्टेट हाईवे पर एक साथ टोल टैक्स लागू होगा या चरणबद्ध तरीके से व्यवस्था शुरू की जाएगी। अंतिम निर्णय यातायात घनत्व, आर्थिक व्यवहार्यता और तकनीकी सर्वे रिपोर्ट के आधार पर लिया जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि टोल टैक्स से प्राप्त राशि का उपयोग सड़क निर्माण, चौड़ीकरण, पुलों के रखरखाव और बेहतर यातायात सुविधाओं के विकास में किया जाता है तो इससे राज्य की सड़क व्यवस्था को बड़ा लाभ मिल सकता है। वहीं दूसरी ओर परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोगों का कहना है कि टोल शुल्क तय करते समय आम नागरिकों और व्यावसायिक वाहनों पर पड़ने वाले अतिरिक्त आर्थिक बोझ का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।

राज्य सरकार की इस योजना का असर उन लाखों लोगों पर पड़ेगा जो रोजाना इन स्टेट हाईवे का उपयोग करते हैं। खासकर मालवाहक वाहन, बसें, टैक्सी, निजी कार और अन्य व्यावसायिक वाहन नियमित रूप से इन मार्गों से गुजरते हैं। ऐसे में टोल व्यवस्था लागू होने के बाद यात्रा लागत में कुछ वृद्धि होने की संभावना भी जताई जा रही है।

फिलहाल पथ निर्माण विभाग योजना के विभिन्न पहलुओं पर काम कर रहा है। टोल प्लाजा की संख्या, उनके स्थान, शुल्क दर और संचालन व्यवस्था को लेकर अंतिम निर्णय विस्तृत अध्ययन के बाद लिया जाएगा। यदि सभी प्रशासनिक और तकनीकी प्रक्रियाएं समय पर पूरी होती हैं तो नवंबर-दिसंबर 2026 से बिहार के चुनिंदा स्टेट हाईवे पर टोल टैक्स वसूली की शुरुआत हो सकती है। इससे राज्य में सड़क अवसंरचना को और मजबूत बनाने तथा बेहतर रखरखाव के लिए अतिरिक्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध होने की उम्मीद जताई जा रही है।

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