
मिर्जापुर। उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले का ड्रमंडगंज घाटी क्षेत्र बुधवार की देर शाम एक ऐसी भयावह त्रासदी का गवाह बना, जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। एक अनियंत्रित ट्रक, जिसका ब्रेक फेल हो गया था, पहाड़ी ढलान पर ‘साक्षात काल’ बनकर उतरा और कई वाहनों को रौंदता चला गया। इस भीषण टक्कर के बाद वाहनों में लगी आग ने मंजर को इतना वीभत्स बना दिया कि राहत कर्मियों के पहुँचने से पहले ही कई जिंदगियां लपटों में खाक हो गईं। ताजा मीडिया रिपोर्ट्स और घटनास्थल से मिल रही जानकारी के अनुसार, इस हृदयविदारक दुर्घटना में मरने वालों की संख्या 10 से अधिक हो गई है। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो यह मंजर इतना डरावना था कि चीखने-चिल्लाने वाले लोगों को बचाने का मौका तक नहीं मिला और देखते ही देखते कार और बोलेरो आग का गोला बन गईं। वॉयस ऑफ बिहार (VOB) की इस विशेष रिपोर्ट में हम इस हादसे की हर उस कड़ी का विश्लेषण करेंगे जो सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
हादसे का क्रम: मौत का तांडव और ब्रेक फेल की कहानी
घटनाक्रम की शुरुआत बुधवार शाम करीब 7:30 से 8:00 बजे के बीच हुई, जब मध्य प्रदेश की ओर से चना लादकर एक ट्रक मिर्जापुर की ओर आ रहा था। ड्रमंडगंज घाटी, जो अपने तीखे मोड़ों और ढलानों के लिए जानी जाती है, वहां ट्रक जैसे ही ‘बड़का मुड़ान’ के पास पहुँचा, उसके ब्रेक ने काम करना बंद कर दिया। ढलान पर होने के कारण ट्रक की गति बेकाबू हो गई और वह नीचे की ओर दौड़ पड़ा।
रास्ते में सबसे पहले ट्रक ने एक बोलेरो को अपनी चपेट में लिया, जिसमें कई लोग सवार थे। टक्कर इतनी भीषण थी कि बोलेरो के परखच्चे उड़ गए। लेकिन तबाही यहीं नहीं रुकी। बेकाबू ट्रक ने आगे चल रही एक स्विफ्ट डिजायर कार को जोरदार टक्कर मारी। यह टक्कर इतनी घातक थी कि स्विफ्ट डिजायर अपने आगे चल रहे गिट्टी लदे एक भारी ट्रेलर में पीछे से जा घुसी। दो भारी वाहनों (पीछे से आ रहा ट्रक और आगे चल रहा ट्रेलर) के बीच में कार किसी माचिस की डिबिया की तरह पिचक गई और उसी क्षण घर्षण व फ्यूल टैंक फटने के कारण भीषण आग लग गई।
लपटों में घिरी जिंदगियां: आधा दर्जन से बढ़कर 10 हुई मौतों की संख्या
शुरुआती सूचनाओं में कार में सवार लगभग आधा दर्जन लोगों के जलने की खबर आई थी, लेकिन जैसे-जैसे राहत कार्य आगे बढ़ा और आग पर काबू पाया गया, मृतकों का आंकड़ा बढ़ता चला गया। ताजा अपडेट के मुताबिक, अब तक 10 से ज्यादा लोगों के इस हादसे में जान गंवाने की पुष्टि हो रही है।
कार में सवार लोगों की स्थिति सबसे अधिक दयनीय थी। स्विफ्ट डिजायर कार गिट्टी वाले ट्रेलर के नीचे इस कदर फंस गई थी कि उसके दरवाजे तक नहीं खुल सके। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि स्थानीय लोग चाहकर भी पास नहीं जा सके। कार के भीतर से आती चीखें धीरे-धीरे शांत हो गईं और वहां केवल धुआं और लपटें बची थीं। बोलेरो में सवार यात्रियों में से भी कई लोग इस अग्निकांड की चपेट में आए हैं, जिनमें से कइयों की स्थिति अत्यंत नाजुक बनी हुई है। मृतकों की शिनाख्त करना फिलहाल पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती है क्योंकि शव पूरी तरह से जलकर कोयला हो चुके हैं।
राहत और बचाव: अँधेरे और आग के बीच संघर्ष
हादसे की सूचना मिलते ही मिर्जापुर पुलिस और फायर ब्रिगेड की कई गाड़ियाँ मौके पर पहुँचीं। ड्रमंडगंज थाना प्रभारी के नेतृत्व में पुलिस बल ने सबसे पहले यातायात को रोका ताकि अन्य वाहन इस तबाही का हिस्सा न बनें। फायर ब्रिगेड के कर्मचारियों ने घंटों की मशक्कत के बाद कारों में लगी आग पर काबू पाया।
अँधेरा होने के कारण बचाव कार्य में काफी बाधाएं आईं। गिट्टी लदे ट्रेलर और ट्रक के बीच फंसी स्विफ्ट डिजायर को निकालने के लिए क्रेन और गैस कटर की मदद लेनी पड़ी। पुलिस अधीक्षक मिर्जापुर ने स्वयं मामले की निगरानी की और घायलों को तत्काल नजदीकी अस्पताल पहुँचाने के निर्देश दिए। जिला अस्पताल में भी अलर्ट जारी कर दिया गया है ताकि गंभीर रूप से झुलसे लोगों को तत्काल उपचार मिल सके।
ड्रमंडगंज घाटी: क्यों बार-बार यहाँ होते हैं हादसे?
यह कोई पहली बार नहीं है जब ड्रमंडगंज घाटी में ऐसा भीषण हादसा हुआ है। यह क्षेत्र उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश को जोड़ने वाला एक प्रमुख मार्ग है, जहाँ से हर दिन हजारों भारी मालवाहक वाहन गुजरते हैं।
- ढलान और मोड़: बड़का मुड़ान और आसपास के मोड़ इतने खतरनाक हैं कि भारी वाहनों के ब्रेक अक्सर गर्म होकर फेल हो जाते हैं।
- ओवरलोडिंग: मध्य प्रदेश से आने वाले कई ट्रक क्षमता से अधिक माल लादते हैं, जिससे ढलान पर नियंत्रण पाना असंभव हो जाता है।
- लाइटिंग और संकेत: स्थानीय लोगों का कहना है कि घाटी में प्रकाश की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है और सुरक्षा संकेतों का भी अभाव है।
- मैकेनिकल जांच का अभाव: अंतर्राज्यीय सीमाओं पर वाहनों की मैकेनिकल फिटनेस की जांच के लिए कोई पुख्ता तंत्र नहीं है, जिसका खामियाजा निर्दोष यात्रियों को भुगतना पड़ता है।


