​भागलपुर हादसा: छत से गिरकर युवक की मौत; परिवार का इकलौता सहारा छिना

भागलपुर। इंसान की जिंदगी कितनी अनिश्चित है, इसकी एक हृदयविदारक मिसाल भागलपुर जिले के नाथनगर थाना क्षेत्र में देखने को मिली है। यहाँ के नरगा लालूचक इलाके में घटी एक मामूली सी लगने वाली घटना ने एक हंसते-खेलते परिवार की खुशियों को ताउम्र के मातम में बदल दिया। एक 25 वर्षीय युवक, जो दिनभर की कड़ी मशक्कत के बाद चैन की नींद सोने के लिए अपने घर की छत पर गया था, उसे क्या पता था कि यह नींद उसकी जिंदगी की आखिरी नींद साबित होगी। बुधवार, 22 अप्रैल 2026 की सुबह जब इस हादसे की खबर फैली, तो पूरे मोहल्ले में सन्नाटा पसर गया। मृतक की पहचान प्रवीण कुमार के रूप में हुई है, जो पेशे से एक वाहन चालक थे और अपने परिवार के एकमात्र आर्थिक स्तंभ थे। इस त्रासदपूर्ण घटना ने न केवल एक माँ से उसका बेटा और भाई से उसका संबल छीन लिया, बल्कि उस घर के चूल्हे के सामने भी सवालिया निशान खड़ा कर दिया है, जिसकी आजीविका प्रवीण की ड्राइविंग सीट पर टिकी थी।

घटना का विवरण: नींद में करवट बनी काल

​हादसे की शुरुआत मंगलवार और बुधवार की दरमियानी रात को हुई। नाथनगर के नरगा लालूचक निवासी स्वर्गीय जयप्रकाश मंडल के पुत्र प्रवीण कुमार (25 वर्ष) रात के समय खाना खाकर अपने घर की छत पर सोने चले गए थे। गर्मी के मौसम में अक्सर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में लोग ताजी हवा के लिए छत पर सोना पसंद करते हैं। प्रवीण भी थकान मिटाने के लिए वहीं सोए थे।

​परिजनों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, देर रात जब वे गहरी नींद में थे, तभी करवट लेने के दौरान उनका शारीरिक संतुलन बिगड़ गया। छत की बाउंड्री या रेलिंग के अभाव में या शायद नींद के अंधेरे में उन्हें अंदाजा नहीं मिल पाया और वे सीधे छत से नीचे जमीन पर गिर पड़े। जमीन पर गिरते ही उन्हें सिर और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर आंतरिक चोटें आईं। गिरने की आवाज सुनकर घर के अन्य सदस्य तुरंत बाहर भागे और लहूलुहान हालत में प्रवीण को जमीन पर पड़ा पाया।

इलाज की जद्दोजहद और अंतिम सांसें

​प्रवीण को जमीन पर अचेत पड़ा देख घर में चीख-पुकार मच गई। परिजनों ने बिना समय गंवाए तत्काल पास के ही एक स्थानीय डॉक्टर से संपर्क किया। शुरुआती जांच के बाद डॉक्टर ने बताया कि प्रवीण की सांसें अभी चल रही हैं, जिससे परिवार के भीतर उम्मीद की एक हल्की किरण जागी। हालांकि, चोटों की गंभीरता को देखते हुए डॉक्टर ने उन्हें बिना देरी किए बड़े अस्पताल ले जाने की सलाह दी।

​डॉक्टर के परामर्श पर परिजन आनन-फानन में उन्हें एम्बुलेंस या निजी वाहन से भागलपुर के मायागंज अस्पताल (JLNMCH) लेकर निकले। रास्ते भर परिजन ईश्वर से प्रार्थना करते रहे और प्रवीण को होश में लाने की कोशिश करते रहे। लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था। अस्पताल पहुँचने से पहले ही प्रवीण की स्थिति अत्यंत नाजुक हो गई और रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया। जब वे मायागंज अस्पताल पहुँचे, तो वहां मौजूद डॉक्टरों ने उन्हें देखते ही मृत घोषित कर दिया। एक पल की करवट ने 25 साल के एक नौजवान की जीवनलीला समाप्त कर दी।

परिवार का इकलौता कमाऊ सदस्य: उजड़ गया संसार

​प्रवीण कुमार की मौत केवल एक व्यक्ति की मृत्यु नहीं है, बल्कि एक पूरे परिवार के भविष्य का अंत है। बताया जाता है कि प्रवीण अपने परिवार में इकलौते कमाने वाले सदस्य थे। उनके पिता जयप्रकाश मंडल का पहले ही देहांत हो चुका था, जिसके बाद घर की पूरी जिम्मेदारी प्रवीण के युवा कंधों पर आ गई थी।

​पेशे से ड्राइवर होने के कारण वे दिन-रात सड़कों पर वाहन चलाकर जो भी कमाते थे, उसी से उनकी वृद्ध माँ और भाई-बहनों का भरण-पोषण होता था। उनकी असमय मौत से अब परिवार के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। घटना की जानकारी देते हुए मृतक के भाई रवि कुमार ने बताया कि उनके भाई बहुत ही मिलनसार और मेहनती थे और कभी किसी ने सोचा भी नहीं था कि छत पर सोना उनके लिए मौत का फंदा बन जाएगा।

ड्राइवर की जिंदगी और असुरक्षित रिहायश

​प्रवीण कुमार जैसे हजारों युवा बिहार के विभिन्न जिलों में ड्राइविंग कर अपना घर चलाते हैं। एक ड्राइवर की नौकरी शारीरिक रूप से काफी थकान भरी होती है, जिसमें नींद और आराम के घंटे निश्चित नहीं होते। शायद यही थकान रही होगी कि नींद में गिरने के दौरान वे खुद को संभाल नहीं पाए।

​इसके साथ ही, यह घटना शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में मकानों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाती है। अक्सर लोग छतों पर बिना रेलिंग या सुरक्षा दीवार के सोते हैं, जो विशेषकर नींद में चलने या अधिक करवट लेने वाले लोगों के लिए घातक साबित होता है। प्रवीण की मौत ने एक बार फिर याद दिलाया है कि छोटी सी लापरवाही या बुनियादी सुरक्षा की कमी कैसे बड़ी त्रासदी को जन्म दे सकती है।

नाथनगर में शोक की लहर और प्रशासनिक प्रक्रिया

​हादसे के बाद नाथनगर पुलिस को मामले की जानकारी दी गई है। सामान्य तौर पर ऐसे मामलों में पुलिस शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजती है ताकि मौत के सटीक कारणों का पता चल सके। नरगा लालूचक के स्थानीय निवासियों ने पीड़ित परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की है। पड़ोसियों का कहना है कि प्रवीण एक बहुत ही व्यवहारकुशल युवक था और अपने काम के प्रति समर्पित था।

​सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से मांग की है कि चूंकि प्रवीण अपने परिवार का एकमात्र सहारा था, इसलिए सरकार और जिला प्रशासन को ‘पारिवारिक लाभ योजना’ या अन्य सरकारी प्रावधानों के तहत पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान करनी चाहिए। पिता के निधन के बाद माँ का एकमात्र सहारा भी अब छिन चुका है, ऐसे में समाज और सरकार की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है।

  • ये भी पढ़े..

    भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में प्रशांत किशोर का बड़ा हमला: “सिर्फ पुलिस नहीं, आदेश देने वालों की भी हो जांच”

    Share Add as a preferred…

    खान सर-रोशन आनंद विवाद में अवध ओझा की एंट्री! बोले- “मैंने पहले ही खान सर को मैसेज कर कहा था, मामला बढ़ाओ मत”

    Share Add as a preferred…