हैदराबाद में मार्बल हादसे का शिकार हुआ मीनापुर का मजदूर, शव गांव पहुंचते ही पसरा मातम

मुजफ्फरपुर। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के मीनापुर प्रखंड से एक बेहद दुखद घटना सामने आई है। रोजगार की तलाश में हैदराबाद गए एक मजदूर की काम के दौरान हुए दर्दनाक हादसे में मौत हो गई। मृतक की पहचान रामपुरहरि थाना क्षेत्र की धर्मपुर पंचायत के वार्ड संख्या-1 नूरछपड़ा निवासी 35 वर्षीय उमेश पासवान के रूप में हुई है। हादसे के बाद स्थानीय पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा, जिसके बाद बुधवार को पार्थिव शरीर गांव पहुंचा। शव के घर पहुंचते ही पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।

जानकारी के अनुसार उमेश पासवान पिछले कई वर्षों से अपने परिवार के बेहतर भविष्य के लिए हैदराबाद में मजदूरी कर रहे थे। वह वहां एक निजी स्टोन फैक्ट्री में मार्बल लोडिंग और अनलोडिंग का कार्य करते थे। परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए उन्होंने अपना गांव छोड़कर दूसरे राज्य में काम करना शुरू किया था। उनकी कमाई से ही पूरे परिवार का खर्च चलता था और बच्चों की पढ़ाई से लेकर घर की अन्य जरूरतें पूरी होती थीं।

बताया जा रहा है कि रविवार की शाम उमेश अपने साथियों के साथ मार्बल से भरे वाहन को लेकर निर्धारित स्थान की ओर जा रहे थे। इसी दौरान रास्ते में वाहन का पिछला चक्का अचानक पंचर हो गया। वाहन के असंतुलित होते ही उस पर लदा भारी मार्बल तेजी से नीचे गिरने लगा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार उमेश उसी समय मार्बल के ऊपर बैठे हुए थे। अचानक भारी पत्थरों के गिरने से वह उसके नीचे दब गए और उन्हें संभलने का मौका तक नहीं मिला। आसपास मौजूद लोगों और अन्य मजदूरों ने तत्काल उन्हें निकालने की कोशिश की, लेकिन तब तक उनकी स्थिति गंभीर हो चुकी थी।

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और घायल मजदूरों को अस्पताल पहुंचाया गया। चिकित्सकों ने जांच के बाद उमेश को मृत घोषित कर दिया। हादसे में उनके साथ मौजूद तीन अन्य मजदूर भी घायल हुए हैं। सभी का इलाज स्थानीय अस्पताल में कराया गया। घायलों में उमेश के गांव का रहने वाला राजीव रंजन भी शामिल बताया गया है। उसकी हालत अब पहले से बेहतर बताई जा रही है।

हादसे की जानकारी सबसे पहले फैक्ट्री प्रबंधन और साथ काम करने वाले मजदूरों ने उमेश के परिजनों को दी। अचानक आई इस दुखद खबर से परिवार पर मानो दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। परिजन लगातार हैदराबाद से शव लाने की व्यवस्था में जुटे रहे। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया और पोस्टमार्टम पूरा होने के बाद बुधवार को उनका पार्थिव शरीर गांव लाया गया।

जैसे ही शव गांव पहुंचा, बड़ी संख्या में ग्रामीण और आसपास के लोग उमेश के घर पहुंच गए। पूरे गांव का माहौल गमगीन हो गया। परिवार की महिलाओं की चीख-पुकार से हर किसी की आंखें नम हो गईं। पत्नी पूजा देवी का रो-रोकर बुरा हाल था। वह बार-बार अपने पति को याद कर बेसुध हो रही थीं। बच्चों को अभी पूरी तरह यह समझ भी नहीं है कि उनके पिता अब कभी वापस नहीं आएंगे। गांव में मौजूद लोगों ने परिवार को ढांढस बंधाने का प्रयास किया, लेकिन किसी के पास इस दर्द का कोई जवाब नहीं था।

उमेश अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे। उनके परिवार में पत्नी के अलावा दो बेटियां और दो बेटे हैं। बड़ी बेटी सोनाली कुमारी की उम्र लगभग 10 वर्ष, दूसरी बेटी सोनम कुमारी 8 वर्ष की है। वहीं बेटों में यश कुमार 5 वर्ष और सबसे छोटा सुमित कुमार लगभग 2 वर्ष का है। चार छोटे बच्चों के सिर से पिता का साया उठ जाने के बाद परिवार के सामने आर्थिक और सामाजिक दोनों तरह की बड़ी चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि उमेश मेहनती और मिलनसार स्वभाव के व्यक्ति थे। परिवार की जिम्मेदारियों को निभाने के लिए उन्होंने वर्षों तक घर से दूर रहकर कठिन परिस्थितियों में काम किया। गांव आने पर वह सभी लोगों से आत्मीयता के साथ मिलते थे। उनकी असामयिक मौत से पूरे इलाके में शोक का माहौल है। स्थानीय लोगों ने इस घटना को बेहद दुखद बताते हुए परिवार को हर संभव सहयोग देने की बात कही है।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने भी घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उनका कहना है कि रोजी-रोटी की तलाश में हजारों मजदूर बिहार से दूसरे राज्यों में काम करने जाते हैं, जहां कई बार उन्हें जोखिम भरे कार्य करने पड़ते हैं। ऐसे हादसों के बाद परिवार पूरी तरह टूट जाता है। उन्होंने सरकार और संबंधित एजेंसियों से मांग की है कि मृतक के परिवार को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए ताकि बच्चों की शिक्षा और परिवार का भविष्य सुरक्षित रह सके।

मजदूर संगठनों का भी कहना है कि औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन होना चाहिए। भारी मशीनों और निर्माण सामग्री के साथ काम करने वाले श्रमिकों के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपकरण, नियमित प्रशिक्षण और सुरक्षित कार्य व्यवस्था आवश्यक है। यदि सुरक्षा नियमों का पूरी तरह पालन किया जाए तो इस तरह की कई दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है।

शव गांव पहुंचने के बाद अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग उमेश के घर पहुंचे। परिजनों और ग्रामीणों की मौजूदगी में उनका अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम यात्रा के दौरान माहौल बेहद भावुक रहा। हर किसी की जुबान पर यही बात थी कि मेहनत-मजदूरी कर अपने परिवार का भविष्य संवारने निकला एक युवा मजदूर अब हमेशा के लिए अपनों से दूर चला गया।

यह घटना एक बार फिर उन हजारों प्रवासी मजदूरों की कठिन जिंदगी की याद दिलाती है, जो अपने परिवार के बेहतर भविष्य के लिए घर से दूर रहकर जोखिम भरे कार्य करते हैं। कई बार सुरक्षा व्यवस्था में छोटी सी चूक भी बड़े हादसे का कारण बन जाती है। उमेश पासवान की मौत ने न केवल उनके परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है, बल्कि पूरे गांव को शोक में डुबो दिया है। अब गांव के लोगों की उम्मीद है कि परिवार को जल्द सरकारी सहायता मिले और बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं, ताकि इस दुख की घड़ी में उन्हें कुछ राहत मिल सके।

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