
मालदा/भागलपुर रेलखंड: “कुछ सेकंड की जल्दबाज़ी, पूरी ज़िंदगी पर भारी पड़ सकती है”—इसी संदेश के साथ पूर्व रेलवे के मालदा मंडल ने रेलवे सुरक्षा को लेकर व्यापक जागरूकता अभियान तेज कर दिया है। लगातार सामने आ रहे हादसों को देखते हुए रेलवे प्रशासन यात्रियों और स्थानीय लोगों को सुरक्षित व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित कर रहा है।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि थोड़ी सी लापरवाही, जैसे बिना अनुमति रेलवे ट्रैक पार करना या चलती ट्रेन में चढ़ने-उतरने की कोशिश, गंभीर दुर्घटनाओं का कारण बन रही है। ऐसे हादसों में न केवल जान-माल का नुकसान होता है, बल्कि परिवारों पर भी गहरा असर पड़ता है।
205 मानव और 237 मवेशी हादसों ने बढ़ाई चिंता
मालदा मंडल के आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025–26 के दौरान अनधिकृत रूप से रेलवे ट्रैक पार करने के कारण 205 मानव दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। इसके अलावा 237 मवेशी भी ट्रेन की चपेट में आकर मारे गए।
ये आंकड़े इस बात की ओर इशारा करते हैं कि अभी भी बड़ी संख्या में लोग रेलवे सुरक्षा नियमों की अनदेखी कर रहे हैं। खासकर ग्रामीण इलाकों में यह समस्या अधिक देखने को मिल रही है, जहां लोग शॉर्टकट के लिए ट्रैक पार करते हैं।
संवेदनशील रूटों पर विशेष निगरानी
रेलवे प्रशासन ने कुछ रेलखंडों को विशेष रूप से संवेदनशील घोषित किया है, जहां दुर्घटनाओं की संख्या अधिक है। इनमें मालदा टाउन–गुमानी, भागलपुर–किउल, बरहरवा–साहिबगंज और भागलपुर–बांका सेक्शन शामिल हैं।
इन क्षेत्रों में सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है और लगातार जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं।
अधिकारियों के नेतृत्व में चल रहा अभियान
यह अभियान मंडल रेल प्रबंधक के मार्गदर्शन और आरपीएफ के मंडल सुरक्षा आयुक्त की निगरानी में चलाया जा रहा है।
रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की टीमें स्टेशनों, रेलवे क्रॉसिंग, गांवों और स्कूलों में जाकर लोगों को जागरूक कर रही हैं। इसका उद्देश्य सीधे संवाद के जरिए लोगों को सुरक्षित व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित करना है।
स्कूलों और गांवों में पहुंच रहा संदेश
अभियान के तहत विशेष रूप से स्कूलों और ग्रामीण क्षेत्रों पर ध्यान दिया जा रहा है। छात्रों को रेलवे सुरक्षा के बारे में जानकारी दी जा रही है, ताकि वे इस संदेश को अपने परिवारों तक पहुंचा सकें।
रेलवे अधिकारियों का मानना है कि अगर बच्चों को शुरुआत से ही सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जाए, तो भविष्य में दुर्घटनाओं की संख्या में कमी लाई जा सकती है।
मवेशियों की सुरक्षा पर भी जोर
रेलवे ट्रैक के आसपास मवेशियों के आने से भी दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं। कई ग्रामीण परिवारों के लिए पशुधन आजीविका का मुख्य साधन है, इसलिए रेलवे प्रशासन इस मुद्दे को भी गंभीरता से ले रहा है।
स्थानीय लोगों से अपील की जा रही है कि वे अपने मवेशियों को रेलवे ट्रैक से दूर रखें, ताकि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और ट्रेन संचालन भी बाधित न हो।
असुरक्षित गतिविधियों पर रोक जरूरी
रेलवे प्रशासन ने कुछ प्रमुख असुरक्षित गतिविधियों की पहचान की है, जिन पर तत्काल रोक लगाने की जरूरत है। इनमें बिना अनुमति ट्रैक पार करना, फुट ओवर ब्रिज (FOB) का इस्तेमाल न करना, रेलवे लाइन के पास चलना और खेतों के रास्ते ट्रैक पार करना शामिल है।
इसके अलावा यात्रियों द्वारा फुटबोर्ड पर यात्रा करना, दरवाजों पर खड़े रहना और चलती ट्रेन में चढ़ने-उतरने की कोशिश करना भी गंभीर खतरा पैदा करता है।
सुरक्षित विकल्पों का उपयोग करें
रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि वे केवल अधिकृत स्थानों से ही रेलवे लाइन पार करें। इसके लिए फुट ओवर ब्रिज (FOB), रोड ओवर ब्रिज (ROB), सबवे और लेवल क्रॉसिंग का उपयोग करें।
अधिकारियों का कहना है कि ये सुविधाएं यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर बनाई गई हैं, इसलिए इनका उपयोग करना बेहद जरूरी है।
लगातार जारी रहेगा अभियान
मालदा मंडल ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान केवल एक बार की पहल नहीं है, बल्कि इसे लगातार जारी रखा जाएगा। रेलवे का लक्ष्य एक सुरक्षित और दुर्घटना-मुक्त रेल वातावरण तैयार करना है।
यात्रियों से अपील
रेलवे ने सभी यात्रियों और आम नागरिकों से अपील की है कि वे सुरक्षा नियमों का पालन करें और जिम्मेदार व्यवहार अपनाएं। अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा केवल रेलवे की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें हर नागरिक की भागीदारी जरूरी है
कुल मिलाकर, मालदा मंडल का यह अभियान एक महत्वपूर्ण संदेश देता है कि थोड़ी सी सावधानी से बड़ी दुर्घटनाओं को टाला जा सकता है। अगर लोग नियमों का पालन करें और जागरूक रहें, तो रेलवे यात्रा को और अधिक सुरक्षित बनाया जा सकता है।


